रेलवे बनाएगी 11 हजार कि.मी. सेमीहाईस्पीड मार्ग
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने कोविड महामारी काल में मार्च 2025 तक देश के सात अतिव्यस्त (एचडीएन) मार्गाें को सेमीहाईस्पीड मार्गों में बदलने का लक्ष्य तय किया है तथा इससे पहले ही यात्रियों को मांग पर सीट उपलब्ध होगी। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने यहां वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि स्वर्णिम …
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने कोविड महामारी काल में मार्च 2025 तक देश के सात अतिव्यस्त (एचडीएन) मार्गाें को सेमीहाईस्पीड मार्गों में बदलने का लक्ष्य तय किया है तथा इससे पहले ही यात्रियों को मांग पर सीट उपलब्ध होगी। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने यहां वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि स्वर्णिम चतुर्भुज एवं उसकी तिर्यक लाइनों तथा दिल्ली से गुवाहाटी मार्ग समेत 11 हजार 295 किलोमीटर की एचडीएन लाइनों को मार्च 2025 तक 160 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति के परिचालन के अनुकूल बना दिया जाएगा।
जिस पर भारतीय रेलवे का कुल 60 प्रतिशत से अधिक यातायात चलता है। भारतीय रेलवे के क्षमता संवर्द्धन लक्ष्यों के बारे में चर्चा करते हुए यादव ने बताया कि इसी प्रकार से 23 हजार 347 किलोमीटर लंबे अत्यधिक उपयोग वाले (एचयूएन) 11 मार्गों काे जुलाई 2021 तक 130 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से परिचालन के उपयुक्त बनाया जाएगा। इस साल दिसंबर तक एचडीएन एवं मार्च 2014 तक एचयूएन दोनों प्रकार की लाइनों के विद्युतीकरण एवं दोहरीकरण का काम पूरा हो जाएगा।
करीब 34 हजार 642 किलोमीटर लंबे एचडीएन एवं एचयूएन मार्ग कुल रेलवे नेटवर्क का करीब 51 प्रतिशत हैं लेकिन इन मार्गों पर रेलवे का 96 प्रतिशत से अधिक यातायात चलता है। उन्होंने कहा कि इसी के साथ 2021 में दिसंबर तक समर्पित मालवहन गलियारे (डीएफसी) बन कर तैयार हो जाएंगे । इस प्रकार से भारतीय रेलवे की परिवहन क्षमता अगले तीन-चार साल में दोगुना से अधिक हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि देश में सबसे पहले वित्त वर्ष 2022-23 में दिल्ली मुंबई और दिल्ली हावड़ा मार्ग पर गाड़ियों में प्रतीक्षा सूची समाप्त हो जाएगी और किसी भी वक्त मांग पर टिकट उपलब्ध होंगे। अन्य मार्गों पर उसके दो साल के भीतर यह स्थिति आ जाएगी। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय रेलवे के क्षमता निर्माण की दृष्टि से सुपर क्रिटीकल 58 परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है।
इनमें से 15 परियोजनाएं पूरी हो चुकीं हैं और बाकी सभी दिसंबर 2021 तक पूरी हो जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय रेल बजट में आवंटित पूंजीगत व्यय की सीमा का पूरा पूरा इस्तेमाल करेगी और अधिक से अधिक काम करेगी। यादव ने कहा कि रेलवे की सिगनलिंग प्रणाली को आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि डीएफसी में यूरोपीय तकनीक वाले ईटीसी-1 संरक्षा प्रणाली लगायी गयी है।
भारत ने स्वदेशी टी-कैस प्रणाली विकसित की है और इसका प्रायोगिक परीक्षण सफल रहा है। इस तकनीक को गुणवत्ता की दृष्टि से और विकसित किया जाएगा। इसके बाद भारतीय रेलवे के नेटवर्क में लगाया जाएगा। स्टेशन पुनर्विकास परियोजना के बारे में उन्होंने बताया कि नयी दिल्ली एवं मुंबई स्टेशनों के पुनर्विकास की परियोजनाओं को स्वीकृति के लिए वित्त मंत्रालय भेजा गया है।
अगले सप्ताह तक आर्थिक मामलों के विभाग की स्वीकृति मिलने की आशा है जिसके बाद अगले एक पखवाड़े में टेंडर जारी किया जाएगा। कोविड-19 पश्चात संरक्षा उपायों की चर्चा करते हुए रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने यह भी बताया कि रेलवे के कोच कारखानों में बनने वाले नये कोचों में टाइटेनियम डाइ ऑक्साइड की कोटिंग की जा रही है जिससे कोरोना विषाणु के प्रसार का खतरा कम हो जाता है।
उन्होंने कहा कि इसमें प्रति कोच तीन से चार लाख रुपए का खर्च आता है जो बहुत कम है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मुंबई अहमदाबाद हाईस्पीड रेल परियोजना में लागत वृद्धि को लेकर जापान के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है और ना ही होगी।
उन्होंने कहा कि समझौता दस्तावेज में दर्ज राशि हमेशा ही अनुमानित होती है। वास्तविक राशि टेंडर के दस्तावेजों में दर्ज होती है। उनसे उन रिपोर्टों के बारे में पूछा गया था जिनमें कहा गया था कि बुलेट ट्रेन परियोजना की लागत बढ़ गयी है और जापान की एजेंसी जाइका लागत के पुनर्निर्धारण को लेकर बात करना चाहती है।
