अयोध्या: शासन के निर्देश पर पूर्व कुलपति व प्रभारी कुलसचिव के खिलाफ मुकदमा दर्ज

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अयोध्या, अमृत विचार। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. जीसीआर जायसवाल और तत्कालीन प्रभारी कुलसचिव एएम अंसारी के खिलाफ नगर कोतवाली में धोखाधड़ी, कूट रचना, साजिश और सरकारी धन के गबन का मुकदमा दर्ज कराया गया है। यह मुकदमा शासन के निर्देश पर वर्तमान कुलानुशासक प्रो अजय प्रताप सिंह ने दर्ज …

अयोध्या, अमृत विचार। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. जीसीआर जायसवाल और तत्कालीन प्रभारी कुलसचिव एएम अंसारी के खिलाफ नगर कोतवाली में धोखाधड़ी, कूट रचना, साजिश और सरकारी धन के गबन का मुकदमा दर्ज कराया गया है। यह मुकदमा शासन के निर्देश पर वर्तमान कुलानुशासक प्रो अजय प्रताप सिंह ने दर्ज कराया है।

गड़बड़ियों की मंडलायुक्त ने की थी जांच
विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर जायसवाल के कार्यकाल में हुई अनियमितताओं और गड़बड़ियों की शिकायत पर प्रदेश सरकार ने तत्कालीन फैजाबाद मंडल आयुक्त से जांच कराई थी। मंडलायुक्त ने जांच के बाद अनियमितता और गड़बड़ी की रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी थी। जांच रिपोर्ट का अनुश्रवण करने के बाद प्रदेश सरकार ने डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय प्रशासन को मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया था। हालांकि शासन के निर्देश पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से प्राथमिकी नहीं दर्ज हो पाई थी।

एसएसपी को भेजी गई तहरीर
प्रदेश सरकार की ओर से मामले में रिमाइंडर भेजे जाने के बाद अवध विश्वविद्यालय के कुलानुशासक की ओर से लिखित तहरीर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भेजी गई। तहरीर पर नगर कोतवाली पुलिस ने भादवि की धारा 419,420,467,468,471,409 और 120 बी के तहत तत्कालीन कुलपति व प्रभारी कुलसचिव समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया है।

जांच रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर दी गई तहरीर में आरोप है कि तत्कालीन उप कुलसचिव परीक्षा ए एम अंसारी ने प्रभारी कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक के प्रभार के दौरान तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर जी सीआर जायसवाल व अन्य की शह,साजिश व दुरभि संधि से अनियमितता की और विश्वविद्यालय को कोष लाखों का नुकसान पहुंचाया। बगैर मानक प्रभारी कुलसचिव ने वाहन व चालक हासिल करने के लिए आदेश किया और बिना नोटिफिकेशन व टेंडर के मनमानी तरीके से यह सुविधा हासिल की।

आवास और कार्यालय की दूरी महज डेढ़ चीनी होने के बावजूद लॉग बुक में 80 किमी की यात्रा दर्ज की गई तथा कुलपति की मिलीभगत से अधिकारों का अतिक्रमण कराते हुए करते हुए लाखों का भुगतान ले लिया। इतना ही नहीं विश्वविद्यालय को से निजी सुरक्षा गार्ड वाणिज्य कुक रखकर अनुबंध से अधिक श्रमिकों का भुगतान कर शासकीय धन का आहरण किया। नियुक्तियों परीक्षा केंद्र निरस्त कर फिर बहाल करने के नाम पर,सर्वे ऑन हायर एजुकेशन के कार्य में तथा परीक्षकों की नियुक्ति में लूट खसोट की। वेंडिंग सहायक अखंड प्रताप सिंह को भुगतान के लिए केंद्रीय पुस्तकालय के कर्मियों के वेतन पर्ची में कूटरचना की।

“विश्वविद्यालय की शिकायत पर नगर कोतवाली पुलिस ने तत्कालीन प्रभारी कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक एएम अंसारी, तत्कालीन कुलपति प्रो जीसीआर जायसवाल व अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया है। मामले की तहकीकात की जा रही है।” -अर्जुन कुमार चौरसिया, क्षेत्राधिकारी नगर

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