बाराबंकी : दिल की हो बात तो भूल जाइए जिला अस्पताल
अमृत विचार, बाराबंकी। अगर आप हृदय रोग से पीड़ित है, या आपको एकाएक हृदयाघात होता है, तो भूलकर भी जिला अस्पताल पूछने की गलती ना करें। यहां इलाज तो मिलेगा नहीं बल्कि अन्य गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते है। क्योंकि जिला चिकित्सालय में बीते कई महीनों से हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में …
अमृत विचार, बाराबंकी। अगर आप हृदय रोग से पीड़ित है, या आपको एकाएक हृदयाघात होता है, तो भूलकर भी जिला अस्पताल पूछने की गलती ना करें। यहां इलाज तो मिलेगा नहीं बल्कि अन्य गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते है। क्योंकि जिला चिकित्सालय में बीते कई महीनों से हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में सीनियर फिजीशियन डॉक्टर कुशवाहा दिल के मरीजों को परामर्श दे रहे है। हृदय रोग विशेषज्ञ के लिए शासन से कई बार मांग की जा चुकी है लेकिन शासन को बाराबंकी जनपद के निवासियों का दर्द नहीं दिख रहा है।
बता दें कि जिला अस्पताल में लगभग 6 महीने से कोई हार्ड स्पेशलिस्ट चिकित्सक नहीं है। से पूर्व जो डॉक्टर यहां पर तैनात थे उनका ट्रांसफर होने के बाद हृदय रोग विशेषज्ञ का पद खाली चल रहा है। ऐसे में यहां दूरदराज क्षेत्रों से पचाशों किलोमीटर चलकर आने वाले दिल के मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
यह चिकित्सक ना होने से रोगियों को प्राइवेट अस्पतालों में अपना इलाज कराना पड़ता है। जो कि उन्हें आर्थिक तौर पर और कमजोर कर देता है। जिला चिकित्सालय पुरुष के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ बृजेश कुमार ने बताया कि उनके यहां कई महीनों से हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। के लिए शासन को कई बार पत्र भेजकर सूचित किया गया है। जैसे ही हृदय रोग विशेषज्ञ शासन भेजेगा यहां तैनाती हो जाएगी।
प्रतिदिन आते हैं 100 से ज्यादा मरीज
जिला चिकित्सालय से मिली जानकारी के मुताबिक यहां प्रतिदिन 1 हजार से अधिक की संख्या में बीमार लोग अपना उपचार कराने आते है। इनमें 100 से अधिक मरीज हृदय रोग से पीड़ित होते है। लेकिन अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ ना होने के चलते उन्हें मजबूरी में सीनियर फिजिशियन की सलाह पर चलना पड़ता है।
जनप्रतिनिधियों ने नहीं ली सुध
जनपद में बड़ी संख्या में लोग बेहिसाब दिनचर्या व बदलते खानपान आदि के चलते ह्रदय रोग से पीड़ित हो रहे है। लेकिन जिला चिकित्सालय में बने हृदय विभाग में कार्डियोलॉजिस्ट नहीं है। जिसकी ओर किसी भी जनता के प्रतिनिधि ने अभी तक ध्यान देना उचित नहीं समझा।
अन्य चिकित्सालयों का भी यही हाल
जनपद में कहने को तो जिला चिकित्सालय को छोड़कर दर्जनों बड़े निजी अस्पताल संचालित है। इनमे से एक आध अस्पताल को छोड़कर किसी अस्पताल में अस्पताल में कोई कार्डियोलॉजिस्ट नहीं है।ऐसे में हृदयाघात से गंभीर व्यक्ति पड़ोसी जनपद लखनऊ तक की मात्र 30 किलोमीटर की दूरी तय करते-करते रास्ते में ही दम तोड़ देता है।
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