सपा रालोद मिलकर लड़ेंगे उपचुनाव, मैनपुरी रामपुर से SP और खतौली से RLD उतारेगा प्रत्याशी

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लखनऊ, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी उपचुनाव में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल मिलकर चुनाव लड़ेंगे। दोनों दलों में बनी सहमति के अनुसार मैनपुरी लोकसभा और रामपुर विधानसभा सीट पर सपा प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे और खतौली विधानसभा सीट पर आरएलडी का प्रत्याशी चुनाव लड़ेगा। यूपी में होने वाले आगामी उपचुनाव में समाजवादी …

लखनऊ, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी उपचुनाव में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल मिलकर चुनाव लड़ेंगे। दोनों दलों में बनी सहमति के अनुसार मैनपुरी लोकसभा और रामपुर विधानसभा सीट पर सपा प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे और खतौली विधानसभा सीट पर आरएलडी का प्रत्याशी चुनाव लड़ेगा।

बताते चलें कि इससे पहले हुए गोला के गोकर्ण नाथ विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जीत हासिल की है। अभी रामपुर, मैनपुरी और खतौली में चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशियों की घोषणा होना बाकी है।

निर्वाचन आयोग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मैनपुरी और रामपुर सीट पर उपचुनाव के लिए 10 नवंबर को अधिसूचना जारी होगी। वहीं 17 नवंबर तक नामांकन किया जा सकता है। 18 नवंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 21 नवंबर तक प्रत्याशी, नामांकन वापस ले सकते हैं। इन दोनों सीटों पर 5 दिसंबर यानी सोमवार को मतदान होगा। वहीं गुरुवार यानी 8 दिसंबर को मतगणना होगी।

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1996 से यादव परिवार के पास रही है मैनपुरी
मैनपुरी लोकसभा सीट 1996 से सपा का गढ़ रही है। मुलायम सिंह यहां से पांच बार लोकसभा सांसद चुने गए। 1996 में मुलायम सिंह इस सीट से सांसद चुने गए। 1998 और 1999 में मुलायम ने अपने विरोधी रहे बलराम सिंह यादव को कांग्रेस से सपा में शामिल कराकर मैनपुरी से चुनाव लड़ाया और जिताया। 2004 में मुलायम ने मैनपुरी और संभल से चुनाव जीता था। बाद में मुलायम ने मैनपुरी सीट छोड़ी तो उप चुनाव में यादव परिवार के ही धर्मेंद्र यादव चुनाव जीते। 2009 और 2014 में फिर मुलायम सिंह चुने गए। 2014 में मुलायम आजमगढ़ से भी जीते थे। बाद में उन्होंने मैनपुरी सीट छोड़ी तो तेजप्रताप यादव चुने गए। 2019 में फिर मुलायम सिंह इस सीट से सांसद चुने गए थे।

रामपुर विधानसभा क्षेत्र में आजम का रहा है दबदबा
आजम खां 1980 में पहली बार जनता पार्टी सेक्युलर के टिकट पर रामपुर से विधायक निर्वाचित हुए थे। इसके बाद वे यहां से 1985 में लोकदल, 1989 में जनता दल, 1991 में जनता पार्टी, 1993 में सपा से विधायक रहे। 1996 में कांग्रेस से अफरोज अली खान ने आजम की जीत के सिलसिले को तोड़ा। लेकिन 2002 से 2022 तक आजम और उनकी पत्नी तजीन फात्मा ही इस सीट से विधायक चुनी जाती रही हैं।

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