मुरादाबाद : उच्च शिक्षा के लिए निजी विश्वविद्यालयों पर निर्भर विद्यार्थी, वर्षों पुरानी मांग अब तक नहीं हुई पूरी 

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद , अमृत विचार। 11 नवंबर को हर साल राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता हैं और इस दिन शिक्षा की बेहतरी के लिए सरकार की ओर से भले ही बड़े-बड़े दावे किए जाएं, लेकिन जमीनी सच्चाई किसी से छिपी नहीं है। बेसिक से लेकर उच्च शिक्षा तक स्थिति बेहद खराब है। इसी का नतीजा है कि शिक्षा व्यवस्था पर निजी स्कूल-कालेज और विश्वविद्यालयों का कब्जा बढ़ता जा रहा है।

मुरादाबाद मंडल में कोई सरकारी विश्वविद्यालय नहीं है। जिसके कारण मंडल के विद्यार्थी निजी विश्वविद्यालयों पर निर्भर हैं। अन्यथा के लिए उच्च शिक्षा के लिए अन्य जिलों का रुख करना पड़ता है। सरकारें आई और गईं, लेकिन मंडल में सरकारी विश्वविद्यालय की आस पूरी नहीं हो पाई। 

ये है माध्यमिक स्कूलों का हाल  
जिले में माध्यमिक शिक्षा के 437 विद्यालय हैं। इसमें 38 राजकीय विद्यालय है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में छठीं से लेकर 12वीं तक 10 हजार विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया। इसके अलावा नौवीं में 45024 और ग्यारहवीं में 36189 विद्यार्थी पंजीकृत है। हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के आंकड़ों पर गौर करें तो छह सालों में हाईस्कूल में 11997 व इंटरमीडिएट में 13736 विद्यार्थियों की संख्या कम हुई है।, अब हाईस्कूल में 42520 और इंटर में 37818 रह गई है।

परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति और खराब 
जिले में 1408 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों का संचालन हो रहा है। इसमें दो लाख 19 हजार विद्यार्थी कक्षा एक से पांच कक्षा में अध्ययनरत है। यहां आलम ये है कि सत्र को बीते सात माह हो गए। अब तक न तो विद्यार्थियों को यूनिफार्म मिली है और न ही किताबें। जबकि जिम्मेदारों का दावा निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं देने का है। इतना ही नहीं शिक्षकों के लापरवाह रवैये के चलते बच्चे अ,आ, इ, ई भी नहीं लिखना जानते।

यूनिवर्सिटी न होने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। शिक्षा-संबंधी कार्यों के लिए बार-बार बरेली जाना खर्चीला होने के साथ ही मानसिक तनाव-युक्त होता है।  -अभिषेक चौहान, छात्र

सरकारी विश्वविद्यालय न होने से प्राइवेट यूनिवर्सिटी की मनमानी का सामना करना पड़ता है। महंगी फीस के बावजूद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पाती।  - शोहित राघव, छात्र

यूनिवर्सिटी न होने के कारण कई प्रोफेशनल कोर्सेज की शिक्षा प्राप्त करना मध्यम वर्ग के लिए कठिन है। इन कोर्सेज के लिए दूसरे शहर जाना पड़ता है। कई छात्र इन कोर्सेज की शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। -गीता कुमारी, छात्रा

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