IIT Kanpur सुधारेगा Bihar की बिगड़ी हवा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहयोग से होगा संचालन, 24 घंटे मिलेगी रिपोर्ट
कानपुर आइआइटी यहां से ही बिहार की बिगड़ी हवा को सुधारेगा। वहीं, प्रदेश भर में 550 पोर्टेबल एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग सैंपलर लगाए जाएंगे। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहयोग से संचालन होगा। इसमें 24 घंटे रिपोर्ट भी मिलेगी।
कानपुर, [शशांक शेखर भारद्वाज]। IIT Kanpur के सहयोग से Bihar में धूल, गर्द, अतिसूक्ष्म तत्व और हानिकारक गैसों के असर से बिगड़ी फिजा को सुधारने की कवायद चल रही है। यहां के विशेषज्ञ न सिर्फ सभी जिलों के वायु गुणवत्ता सूचकांक पर नजर रखेंगे, बल्कि उसको सही करने का ठोस प्लान बनाएंगे।
आईआईटी की ओर से प्रदेश भर में 550 पोर्टेबल एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग सैंपलर लगाने की तैयारी है। इन्हें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहयोग से संचालित किया जाएगा, जिससे 24 घंटे मॉनीटरिंग होगी।
संस्थान के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, तमिलनाडु, राजस्थान आदि राज्यों के वायु प्रदूषण पर नजर रखी जा रही है। यहां के प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी, प्रो. मुकेश शर्मा और अन्य अधिकारियों की टीम हवा की गुणवत्ता के साथ ही वायु प्रदूषण फैलाने वाले कारकों की जांच कर रही है। सिर्फ इतना ही नहीं समस्या को दूर करने का खाका खींचा जा रहा है। वाहन, पराली, कोयला, कचरा आदि के जलाने से निकले धुएं पर अंकुश लगाने के प्रयास चल रहे हैं।
वायु प्रदूषण की यही स्थिति बिहार में भी आ रही है। वायु गुणवत्ता सूचकांक बिगड़ने लगा है। सर्दियों की शुरूआत में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मॉनीटरिंग स्टेशनों से आ रही रिपोर्ट चौंकाने वाली है। प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी और उनकी टीम को मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी मिली है।
बाहर से आने वाली गैसों की निगरानी
यह सैंपलर अत्याधुनिक हैं। इनसे न सिर्फ शहरी, ग्रामीण क्षेत्रों के प्रदूषण के कारकों का पता चलेगा, बल्कि बाहर से आने वाली गैसों की निगरानी की जा सकेगी। वायु प्रदूषण का असर काफी दूर तक रहता है।
पांच किलोमीटर तक होगी मॉनीटरिंग
एक सैंपलर से पांच किलोमीटर के क्षेत्र का हाल पता लग सकेगा। यह आवासीय, औद्योगिक, व्यवसायिक, भीड़भाड़ और हाईवे वाले क्षेत्रों में स्थापित किए जाएंगे, जिससे सभी जगहों के प्रदूषण की जानकारी मिल पाएगी।
बिहार के विभिन्न जिलों में 550 पोर्टेबल एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग सैंपलर लगाए जाएंगे। यह 24 घंटे हवा की गुणवत्ता बताएंगे। इनसे वायु प्रदूषण की असली वजह पता लग सकेगी- प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी, सिविल इंजीनियरिंग, आईआईटी कानपुर
