संस्कृति व संस्कारों से होता मानव जीवन शैली का सृजन :आचार्य विष्णु गोस्वामी

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बांदा, अमृत विचार। श्रीमद्भावत कथा के दूसरे दिन आचार्य विष्णु गोस्वामी ने वाराह चरित्र, कपिलदेव एवं भूति संवाद का वृत्तांत सुनाते हुए कहा कि संस्कृति और संस्कारों के बिना मानव बेहतर जीवन शैली को अपनाने की कल्पना भी नहीं कर सकता। 

शहर के बाकर गंज स्थित कान्ह बुंदेला में बुंदेलखंड टीवी सेंटर के तत्वावधान आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के दूसरे दिन आचार्य विष्णु गोस्वामी ने वाराह चरित्र, कपिल देव, भूति संवाद का वृत्तांत की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि संस्कृति और संस्कार ही हैं जो हम इंसानों को पशुवत जीवन से पृथक करते हैं। 

उन्होंने कहा कि दवा भी बिना विश्वास के लाभकारी नहीं होती इसलिये भक्त के लिये अपने आराध्य पर विश्वास करना बहुत जरूरी है। कथा व्यास ने कहा कि जब भक्त को अपने आराध्य पर पूर्ण विश्वास हो जाता है तो भगवान भी उस विश्वास को बनाये रखने के लिये उन नियमों को भी तोड़ देते हैं जो प्रकृति के विपरीत हैं। 

ठाकुरजी की लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि कथा सुनने मात्र से ही मानव कल्याण होता है। कथा में मुख्य यजमान सुन्नुलाल गुप्ता व राजदुलारी गुप्ता रहे। भाजपा जिलाध्यक्ष संजय सिंह, रामेंद्र भर्मा, प्रशांत शर्मा, संदीप बाजपेई, भुवनेंद्र रावत, शशि, सुमित जड़िया, अरव गुप्ता, किशनबाबू गुप्ता, भामा, कीर्ति आदि उपस्थित रहे।

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