मुद्रा किसी भी देश की संस्कृति एवं सभ्यता का प्रतिबिम्ब- राज्यपाल
अमृत विचार लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने गुरुवार को अर्न्तराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान, गोमतीनगर के प्रांगण में राज्य संग्रहालय की ओर से आयोजित भारतीय मुद्रा परिषद के 104वें वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि मुद्रा किसी भी देश की संस्कृति एवं सभ्यता का प्रतिबिम्ब होती है। इससे तत्कालीन इतिहास एवं अर्थव्यवस्था की जानकारी मिलती है, जिससे हमारी आगामी पीढ़ियों को हमारी समृद्ध संस्कृति का ज्ञान होता है। तीन दिवसीय इस सम्मेलन राज्यपाल ने कहा कि सिक्कों पर प्राप्त तिथियां एवं अंकन उस कालखंड के इतिहास व संस्कृति की जानकारी का सशक्त माध्यम है। क्योंकि सिक्के तत्कालीन धर्म एवं दर्शन व सामाजिक जीवन को प्रतिबिम्बत करते हैं।
हमारी पीढ़ी का अनिभिज्ञ होना दुर्भाग्यपूर्ण
दुर्भाग्य से हमारी युवा पीढ़ी इस प्रकार की जानकारियों से अनभिज्ञ है। हमारा प्रयास होना चाहिये कि इस प्रकार की प्रदर्शनी को अलग-अलग शहरों में लगायें तथा उनका भ्रमण भी अपने बच्चों को अवश्य करायें ताकि हमारे बच्चे हमारी संस्कृति के बारे में जान सकें। राज्यपाल जी ने शिक्षकों से अपील की कि वे अपने विद्यालय के बच्चों को भी शैक्षिक भ्रमण पर अवश्य ले जायें ताकि वे हमारे पर्यटन स्थलों एवं संस्कृति के बारे में जान सकें। राज्यपाल ने सुझाव दिया कि टूर पर जाने वाले बच्चों में से ही 4 या 5 बच्चों की टीम बनाकर भ्रमण वाले स्थल की सम्पूर्ण जानकारी दें ताकि वे भ्रमण पर गये अन्य बच्चों को भी जानकारी दे सकें। उन्होंने कहा कि मुझे दुःख है कि हमारे बच्चे हमारी ऐतिहासिक समृद्धता से अनभिज्ञ
कल के लिए जल का सरंक्षण जरूरी
कार्यक्रम के मौके पर राज्यपाल ने जल संरक्षण पर चर्चा करते हुये कहा कि स्वच्छता एवं जल संरक्षण की सीख हमे अपने बच्चों को बचपन से ही देनी चाहिये। सरकार हर घर नल योजना के तहत घर-घर जल पहुंचाने का काम कर रही है। हमारा संकल्प होना चाहिये कि किसी भी दशा में जल की बर्बादी न हो। राज्यपाल ने बौद्ध संस्थान में लगायी गयी मुद्रा प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुये कहा कि सिक्कों की दुनिया बहुत निराली है। इसका ज्ञान हमें अपने बच्चों को अवश्य कराना चाहिये। उन्होंने राजभवन में एक सिक्का एल्बम रखने की घोषणा की।
