बरेली: महिलाएं संभालेंगी सामुदायिक शौचालयों का रखरखाव

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बरेली, अमृच विचार। स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में बनाए गए सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव की जिम्मेदारी महिला समूहों को दी जाएगी। इसके बदले में आजीविका मिशन महिला समूह को नौ हजार रुपया प्रति माह दिया जाएगा। बरेली सामुदायिक शौचालय के निर्माण में देश में तीसरे और प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। स्वच्छ …

बरेली, अमृच विचार। स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में बनाए गए सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव की जिम्मेदारी महिला समूहों को दी जाएगी। इसके बदले में आजीविका मिशन महिला समूह को नौ हजार रुपया प्रति माह दिया जाएगा। बरेली सामुदायिक शौचालय के निर्माण में देश में तीसरे और प्रदेश में दूसरे स्थान पर है।

स्वच्छ भारत मिशन अभियान के तहत ग्राम पंचायतों में आबादी के हिसाब से तीन, पांच, सात लाख के बजट से सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया जाता है। मोटी रकम से बने शौचालय देखभाल के अभाव में खराब हो जाते थे। इस समस्या को देखते हुए विभाग ने रखरखाव पर विशेष जोर देने की योजना बनाई है। आजीविका मिशन के महिला समूह को रखरखाव, सफाई और इस्तेमाल की जिम्मेदारी दी जाएगी।

इसके लिए पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने जिले के जिम्मेदार अफसरों को निर्देश दिए हैं। ग्राम पंचायतें और नगर निकाय में स्थित शौचालयों की देखभाल के लिए जिम्मेदार अधिकारी लिखित रूप से महिला समूहों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसके साथ ही महिला सामुदायिक शौचालय पर महिला और पुरूष शौचालयों पर पुरूष केयर टेकर की नियुक्ति भी की जाएगी। जिसके मानदेय का भुगतान 14 वें वित्त के बजट से किया जाएगा।

महिला समूहों को मिलेगी धनराशि
14 वें वित्त की धनराशि में 25 फीसदी रकम स्वच्छता के मद में मिलती है। इसी मद से नौ हजार रुपये प्रतिमाह महिला समूह को दिया जाएगा। इसमें छह हजार रुपये सफाइकर्मी को कम से कम दो बार सफाई के लिए दिया जाएगा। 500 रुपया प्रति माह बिजली और प्लंबिंग, नल, टोटी के मरम्मत पर खर्च किया जाएगा। स्वच्छता सामग्री झाड़ू, ब्रुश, वाईपर, स्पंज, कपड़े का पोछा, बाल्टी, मग के मद में 1200 रुपये हर छह माह और एक हजार रुपये प्रति माह साबुन, वाशिंग पाउडर, एयर, ग्लब्स, हारपिक, मास्क, एप्रेन के लिए मिलेंगे।

महिला समूहों को सामुदायिक शौचालय की देखभाल की जिम्मेदारी दी जाएगी। शौचालय को स्वच्छ रखने के लिए बजट दिया जाएगा। इससे शौचालय की बेहतर देखभाल हो सकेगी। गंदगी के कारण लोग सामुदायिक शौचालय जाने से परहेज करते थे। – शैलेन्द्र भूषण, परियोजना अधिकारी, डूडा

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