लखनऊ :  प्रदेश अध्यक्षों के लिए निकाय चुनाव बने चुनौती

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Edited By Amrit Vichar
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भाजपा, रालोद और कांग्रेस नए कमांडरों के साथ मैदान में, सपा पुराने प्रदेश अध्यक्ष के सहारे

अमृत विचार, लखनऊ। विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश का राजनीतिक तापमान फिर बढ़ना शुरू हो गया है। निकाय चुनाव में वर्चस्व दिखाने के लिये राजनीतिक क्षत्रपों की पैतरेबाजी शुरू हो गयी है। भाजपा, कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल ने प्रदेश में अपने नए कमांडर तैनात कर दिये है। केवल मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने ही अपने पुराने कमांडर पर भरोसा जताया है।

प्रदेश में होने वाले नगर निकाय चुनाव जहां विभिन्न दलों के इन नये कमांडरों की पहली चुनौती है तो सपा के पुराने कमांडर को भी यह साबित करना है कि प्रदेश की राजनीति में उनका रसूख अभी भी बरकरार है। वैसे सभी चुनावों की तरह सत्तारूढ़ भाजपा निकाय चुनाव की तैयारियों के मामले में फिलहाल सबसे आगे दिख रही है।

भाजपा के नये प्रदेश अध्यक्ष चौधरी भूपेन्द्र सिंह ने पदभार संभालने के बाद से ही निकाय चुनाव की तैयारियों को लेकर जिलों में बैठक कर कार्यकर्ताओं को जीत के मंत्र देना आरंभ कर चुके हैं। दरअसल, पिछले निकाय चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन उनके लिये बेंचमार्क है और अब उन पर इसे बेहतर करने का दारोमदार है। वैसे तो निकाय चुनाव में स्थानीय मुद्दे प्रभावी होते है, लेकिन इन चुनावों की हार-जीत को योगी सरकार-2.0 के कामकाज पर प्रदेश के मतदाताओं का पहला रिमार्क माना जायेगा ।

इसके अलावा तो वहीं यह आगामी लोकसभा चुनाव के लिये जनता के मूड का आकलन भी माना जायेगा। ऐसे में भूपेन्द्र सिंह के सामने निकाय चुनाव एक बड़ी चुनौती है। वहीं, एक बार फिर समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बने नरेश उत्तम के कंधों पर विधानसभा चुनाव में मिली पाटी की शिकस्त का हिसाब चुकाने की चुनौती है तो लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी की राह प्रशस्त करना भी है।

पिछले विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन कर विधानसभा की आठ सीट हासिल करने वाली रालोद ने भी प्रदेश की कमान रामाशीष राय को सौंपी है। रामाशीष राय भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके है। ऐसे में वहअपने अनुभव को वह रालोद में अमल में ला रहे है। राय लगातार सक्रियता दिखाते हुये जिलावार दौरे कर रहे है और निचले स्तर तक कार्यकर्ता को चुनावी गुर सिखा रहे है।

भाजपाई रीति-नीति से अच्छी तरह से वाकिफ रामाशीष कार्यकर्ताओं को उससे निपटने के तरीके भी बता रहे है और रालोद का विस्तार पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी कर रहे हैं। कांग्रेस ने भी दलित कार्ड खेलते हुए बसपा से आयातित पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। निकाय चुनाव में खाबरी से बड़े उलट-फेर की उम्मीद तो नहीं है लेकिन फिर भी चुनावी प्रदर्शन में पार्टी की लगातार आ रही गिरावट को रोकने व संगठन को फिर से खड़ा करने की उम्मीद है।

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