तिहाड़ जेल के पूर्व अधिकारी ने खोला मसाज का राज, कही ये बड़ी बात

तिहाड़ जेल के पूर्व अधिकारी ने खोला मसाज का राज, कही ये बड़ी बात

नई दिल्ली दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन के जेल की कोठरी में कथित तौर पर मालिशकराने के आए वीडियो पर विवाद के बीच तिहाड़ जेल के एक पूर्व विधि अधिकारी ने दावा किया कि वहां ऐसी गैरकानूनीगतिविधियां आमहैं।

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उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रभावशाली कैदियों की यौन इच्छाओं की पूर्ति तक की व्यवस्था वहां की जाती है। तिहाड़ जेल में 1981 से 2016 तक विधि अधिकारी एवं प्रवक्ता के तौर पर काम कर चुके सुनील गुप्ता ने दावा किया कि रसूखदार लोगोंको देश की सबसे बड़ी जेल में अधिकारियों के साथ ही कैदियों से सभी तरह की विशेष सुविधाएंमिलती थीं।

गुप्ता ने पूरी जानकारी दिए बगैर कहा कि जब उन्होंने कुछ मामलों में शिकायत की तो कार्रवाई भी की गयी थी। तिहाड़ जेल के प्रवक्ता धीरज माथुर ने गुप्ता के आरोपों पर जवाब देने से इनकार कर दिया। पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी जोकि 1993 से 1995 तक तिहाड़ जेल की महानिदेशक भी रहीं, ने कहा, ‘सुनील जो कह रहे हैं वह संभवत: मेरे आने से पहले या मेरे जाने के बाद उनके कार्यकाल में हुआ होगा।

बेदी ने हालांकि, यह स्वीकार किया कि उन्हें कैदियों से कुकर्म समेत ‘‘सभी तरह की शिकायतें’’ मिलती थीं। दरअसल बेदी ने जेल में एक मोबाइल बॉक्स के जरिए कैदियों की प्रतिक्रिया तथा शिकायतों के लिए एक व्यवस्था बनायी थी और यह बॉक्स केवल वही खोलती थीं।

बेदी ने कहा, ‘मेरी जिम्मेदारी के वक्त किसी को इस तरह की सुविधा नहीं मिली। सभी के लिए नियम समान थे। हमारी प्रतिक्रिया और कैदियों की शिकायत की बहुत प्रभावी प्रणाली थी जिसे सीधा मैं संभालती थी। मुझे भ्रष्टाचार तथा यौन अपराध की सभी तरह की शिकायतें मिलीं तथा मैंने फौरन कार्रवाई की।

उत्तर प्रदेश में कई जेलों में वरिष्ठ जेल अधीक्षक रहे अंबरीश गौड़ ने कहा कि जब वह सेवा में थे तो उन तक कैदियों के बीच कुकर्म की घटनाओं की शिकायतें पहुंचती थी हालांकि, उनके सामने ऐसा कोई मामला नहीं आया जब किसी प्रभावशाली व्यक्ति ने ऐसा किया हो।

गौड़ ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश में 74 कारागार हैं और नियमित तौर पर एक ही जेल के कई अत्यधिक प्रभावशाली व्यक्तियों को जानना मुश्किल है। दूसरी ओर, तिहाड़ में कैदी के तौर पर कई वीआईपी अक्सर आते हैं इसलिए मेरा अनुभव तिहाड़ में रहे किसी अधिकारी से अलग है।

गौरतलब है कि धन शोधन के आरोपों में गिरफ्तार जैन की कुछ कैदियों से मालिश कराने वाली एक वीडियो 19 नवंबर को सामने आने पर तिहाड़ जेल प्रभावशाली कैदियों को वीआईपी सुविधाएं देने को लेकर विवादों के केंद्र में है। मालिश करने वाले कैदियों में से एक की पहचान बाल यौन अपराध संरक्षण (पोक्सो) कानून के एक आरोपी के तौर पर हुई है।

विभिन्न खबरों में कहा गया है कि यह एक पुराना वीडियो है जिस पर पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है और तत्कालीन जेल अधीक्षक अजीत कुमार समेत संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था। आम आदमी पार्टी (आप) ने आरोप लगाया कि ये वीडियो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने लीक किया है जिसने जैन के खिलाफ अपनी जांच के तौर पर इन्हें हासिल किया था। अपनी सेवानिवृत्ति के एक साल बाद गुप्ता ने एक किताब ब्लैक वारंटलिखी जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे रसूखदार कैदी हर नियम को तोड़कर लग्जरीजीवन बिताते हैं।

गुप्ता ने कहा, ‘‘मेरे कार्यकाल में, मैंने प्रभावशाली लोगों को यौन इच्छाओं की पूर्ति की व्यवस्था की मांग करते हुए तथा इन्हें हासिल करते हुए देखा। तिहाड़ के भीतर लौंडेबाजी सामान्य बात है और प्रभावशाली कैदी, दूसरे कैदियों की रजामंदी या जेल अधिकारियों की मदद से ये हासिल करते हैं।’’

 गुप्ता ने कहा कि सत्येंद्र जैन के प्रकरण की विस्तृत जांच की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ‘अगर सत्येंद्र जैन ने किसी आरोपी से अपनी जेल की कोठरी में मालिश करायी तो यह गैरकानूनी है क्योंकि परिसर में किसी कैदी को फिजियोथेरैपी देने के लिए भी अधिकृत वार्ड हैं। वह किसी आरोपी से अपनी कोठरी में मालिश नहीं करा सकते।हालांकि, इस वायरल वीडियो ने गुप्ता को हैरान नहीं किया क्योंकि उनकी नजर में जेल में ऐसी गैरकानूनी गतिविधियां सामान्यहैं।

उन्होंने दावा किया, ‘मैंने मंत्रियों, कारोबारियों और उद्योगपतियों को खुश करने के लिए नियमों की धज्जियां उड़ते हुए देखी है। प्रभावशाली लोगों के साथ कौन नहीं जुड़ना चाहेगा? वे गरीब कैदियों को नौकरी, कानूनी सहायता और पैसे देने का वादा करते थे तथा उनसे अपनी मनमर्जी की सुविधा लेते थे।

गुप्ता ने दावा किया, ‘यहां तक कि जेल अधिकारी भी उनके इशारों पर नाचते हैं क्योंकि बदले में उन्हें धन, उनके रिश्तेदारों एवं अन्य को नौकरियां दिलाने का वादा किया जाता है।यह पूछने पर कि क्या ऐसे मामलों की उन्होंने उच्चाधिकारियों से शिकायत की तो गुप्ता ने कहा ' हां, जाहिरा तौर पर, कुछ मामलों में कार्रवाई भी हुई, लेकिन ऐसे भ्रष्ट आचरण पर हमेशा के लिए रोक मुश्किल है।'

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