बरेली: पांच साल में 73 लोगों ने किया अंगदान, सिर्फ 10 रुपये के स्टांप से शुरू होती है प्रक्रिया
अंगदान में एक साल तक शव को विशेष केमिकल से रखा जाता संग्रहित
बरेली, अमृत विचार। जीवित रहते हुए तो हर कोई अच्छे काम करता है, लेकिन कुछ लोग ऐसा काम करते हैं जो उनकी मृत्यु के बाद भी दूसरों को जीवनदान देता है। ऐसा ही काम कुछ शहर वासियों ने अंगदान करके किया है। अंगदान से आप किसी की जिंदगी बचाते हैं। जिले में हार्ट ट्रांसप्लांट के अलावा किडनी, कार्निया समेत कई अंग दान कर लोगों की जिंदगियों को बचाया जा चुका है। भारतीय विश्व अंगदान दिवस पर जिले में लगभग पांच साल में 73 लोगों ने अंगदान किया।
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10 रुपये के स्टांप से शुरू होती है प्रक्रिया
देहदान की प्रक्रिया बहुत सरल है। 10 रुपये के स्टांप पेपर पर स्वैच्छिक दान का प्रपत्र व्यक्ति अपने जीवित रहते ही बना सकते हैं। ताकि उनकी मृत्यु के बाद उनके परिजन यह महादान कर सकें। एक वर्ष तक शवगृह में दान किया गया शरीर सुरक्षित रखा जाता है, ताकि कोई भी अंतिम दर्शन कर सके। वहीं, एक वर्ष बाद ही छात्र उस शरीर पर अंग संरचना व सर्जरी सीखते हैं। इसके अलावा आवश्यक स्थिति में अंगों का प्रत्यारोपण भी कराया जाता है। 10 रुपये के स्टांप पर शरीर दान के लिए घोषणा अनुरोध भरा जाता है, उनके लिए जो उनसे संबंधित होते हैं। इसमें यह घोषणा की जाती है, यह कामना है कि मेरे पार्थिव शरीर को संबंधित संस्थान को सुपुर्द कर दिया जाए। मेरे मृत शरीर को चिकित्सा, शिक्षा एवं अनुसंधान की प्रगति के लिए जो भी तरीका सबसे अधिक लाभकारी हो उसका उपयोग किया जाए।
बाल या नाखून से अंतिम संस्कार
जब परिजन देह को विभाग में देते हैं तो उन्हें शव का एक छोटा सा भाग जैसे बाल या नाखून सौंप दिया जाता है। इसे अंतिम संस्कार के लिए व्यक्ति के धार्मिक विश्वास के अनुसार परिवार को सौंप दिया जाता है। पार्थिव शरीर को विभाग में सौंपने के बाद विभागाध्यक्ष या प्रभारी गैर शिक्षण शवगृह द्वारा हस्ताक्षरयुक्त पावती मृत व्यक्ति के संबंधी को दिया जाता है।
प्राकृतिक मौत के 8 घंटे के अंदर दें सूचना
प्राकृतिक मौत के मामले में मृत शरीर की जानकारी 8 घंटे में संबंधित विभाग को देनी होती है। इसके लिए विभाग में कार्य दिवस के दौरान सूचना दी जाती है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार देहदान की सुविधा मेडिकल काॅलेजों में है।
कुछ लोग ही ऐसे दानवीर होते हैं जो शरीर या अंग दान करते हैं। शरीर दान दिवस पर लोगों से अपील है कि यह महादान समाज कल्याण के लिए करें। साथ ही अपने परिवार से आग्रह करें कि मृत्यु के बाद शरीर चिकित्सा विज्ञान संस्था या अंग प्रत्यारोपण के लिए दान कर दिया जाएं-डा. बलवीर सिंह, सीएमओ।
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