हम सजा के दरवाजे पर खड़े हैं, जेल हमारा इंतजार कर रही : आजम खां
रामपुर, अमृत विचार। सपा प्रत्याशी आसिम राजा के पक्ष में मंगलवार को पूर्व मंत्री आजम खां ने सर्राफा बाजार, चाकू बाजार, सफदर गंज में पहुंचकर दुकानदारों से साइकिल को वोट देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आसिम राजा अच्छे इंसान हैं और इन्हें वोट दें। इस दौरान आजम खां जिंदाबाद के नारे लगते रहे।
इससे पहले जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आजम खान ने कहा मैं अपने बच्चे की उम्र साबित नहीं कर सका उसे पैदा करने वाली मां अपनी औलाद की उम्र साबित नहीं कर सकी यह हमारी बदकिस्मती है। आजम खान ने अपने ऊपर चल रहे मुकदमों का जिक्र करते हुए कहा रोज दस्तक होती है दरवाजे पर कल 24 मुकदमों में तारीख है, अगले दिन 25 मुकदमों में तारीख है और हर दफा में उम्र कैद की सजा है कई जिंदगियां चाहिए इन सज़ाओं को भुगतने के लिए कई जिंदगियां चाहिए।
कहा कि मुझे खो देने के बाद तुम खुश नहीं रह सकोगे आबाद नहीं रह सकोगे। भीड़ की तरफ जुमला उछालते हुए कहा कि हम सजा के दरवाजे पर खड़े हैं। जेल हमारा इंतजार कर रही है।
मंगलवार की दोपहर आजम खां और सपा प्रत्याशी ने शहर के बाजारों में जनसंपर्क कर वोट मांगे। इससे पहले नालापार पर हुई जनसभा में आजम खां ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि हमारी सरकारें भी आई लेकिन अमन था शांति थी मोहब्बत थी एक दूसरे का एहतराम था। हम तो यह जानते ही नहीं थे कि सरकारों का यह काम भी है हमें तो यह खबर ही नहीं थी कि सरकारों का काम घरों के दरवाजे तोड़ना है औरतों के चेहरों पर थप्पड़ मारना है।
घसीट कर ले जाकर थानों में बंद कर देना है बेगुनाह लोगों को महीनों और वर्षों जेलों में डाल देना है। कहा कि काश हमें यह मालूम हुआ होता कि सरकारों का यह काम भी है तो 50 साल के इस सियासी सफर में और चार बार की सियासी ताकत में मैं वह कर सकता था जो एक नई तारीख लिख देता। आजम खां ने कहा मैं अपने बच्चे की उम्र साबित नहीं कर सका उसे पैदा करने वाली मां अपनी औलाद की उम्र साबित नहीं कर सकी यह हमारी बदकिस्मती नहीं है तो क्या है।
कहा मैं मेरी औलाद अदालत के सामने अपनी बेगुनाही साबित नहीं कर सके न अस्पताल का सर्टिफिकेट हम साबित कर सके न नगर निगम का साबित कर सके। न मां की मेटरनिटी लीव साबित कर सके न डॉक्टर का बयान साबित कर सके और हम सजा के दरवाजे पर खड़े हैं। जेल हमारा इंतजार कर रही है भीड़ की तरफ जुमला उछालते हुए कहा कि और जानते हो क्या सलूक हुए थे हमारे साथ वह सलूक तो हिटलर ने यहूदियों के साथ भी नहीं किए थे जो हमारे साथ हुए थे।
हर दिन दरवाजे पर होती है दस्तक : आजम
जनसभा में आजम खान ने अपने ऊपर चल रहे मुकदमों का जिक्र करते हुए कहा दरवाजे पर रोज दस्तक होती है कहा जाता है कि कल 24 मुकदमों में तारीख है अगले दिन 25 मुकदमों में तारीख है और हर दफा में उम्र कैद की सजा है। कई जिंदगियां चाहिए इन सजाओं को भुगतने के लिए कई जिंदगियां चाहिए मुझे खो देने के बाद तुम खुश नहीं रह सकोगे आबाद नहीं रह सकोगे।
आजम खां ने अब्दुल्ला आजम का जिक्र करते हुए कहा मेरा बच्चा दिल्ली में है वकीलों से मशवरा कर रहा है कि जेल के दरवाजे हमारा इंतजार कर रहे हैं कैसे उनको क्या किया जाए। कहा कि मैं कैसा बदनसीब बाप हूं कैसी बदनसीब मां है उसकी यहां कितने लोग खड़े हैं कितने बाप और कितनी मां हैं जो इस जुर्म को करते हैं जो हमने किया ही नहीं और सजा कितनी संगीन भुगती है। 27 महीने 8 /12 की कोठरी में एक-एक लम्हा एक-एक बरस के बराबर था।
आजम खां ने सपा छोड़कर भाजपा ज्वाइन करने वाले अपने कार्यकर्ता फसाहत अली शानू पर तंज कसते हुए कहा हमारा जाने वाला कहता है कि वह दरी नहीं बिछाएगा वह नहीं बिछाएगा दरी क्योंकि वह जब आया था तब ईरानी कालीन पर पैर रखता हुआ आया था दरिया हमने बिछाई थी दरिया इन्होंने बिछाई थी उन्होंने नहीं बिछाई थीं
