अयोध्या: विश्व दिव्यांग दिवस पर खाली हाथ ही रहेंगे दिव्यांग, विभाग के पास एक भी उपकरण मयस्सर नहीं
अयोध्या अमृत विचार। प्रत्येक वर्ष 3 दिसम्बर को विश्व दिव्यांग दिवस मनाया जाता है। इस खास दिवस पर दिव्यांगता के बावजूद उत्कृष्ट कार्य करने वालों का हौसला बढ़ाने के लिए 3 दिसंबर को हर वर्ष पुरस्कार दिया जाता है। इस क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों को भी पुरस्कृत करने का भी प्रावधान है। लेकिन इस वर्ष विश्व दिव्यांग दिवस पर जिले के दिव्यांगों को खाली हाथ ही रहना होगा। इसलिए कि दिव्यांग कल्याण विभाग के पास दिव्यांगों को देने के लिए कुछ भी मयस्सर नहीं है।
दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की 1992 में हुई आम बैठक में तीन दिसंबर को विश्व दिव्यांग दिवस मनाने का निर्णय लिया गया था। इसी के मद्देनजर प्रत्येक वर्ष विश्व दिव्यांग दिवस पर दिव्यांगों को पुरस्कार, उपकरण सहित केन्द्र व प्रदेश सरकार से संचालित अन्य योजनाओं का लाभ दिया जाता है। लेकिन इस बार दिव्यांग कल्याण विभाग के पास दिव्यांगों को देने के लिए कुछ नहीं है। विभाग द्वारा 3 दिसम्बर को न तो कोई उपकरण वितरण किया जायेगा और न ही दिव्यांगों को किसी प्रकार का कोई उपहार वितरण या अन्य आयोजन निर्धारित है। जनपद अयोध्या में 11 हजार 997 दिव्यांग व्यक्तियों को पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। लेकिन विश्व दिव्यांग दिवस पर दिव्यांगों को कोई उपकरण नहीं बंटेगा। जिला दिव्यांग कल्याण अधिकारी जयनाथ गुप्त का कहना है कि 3 दिसम्बर को जनपद में कोई आयोजन नहीं होगा। उन्होंने बताया कि बचपन स्कूल में ही जो कार्यक्रम हर साल होते हैं, केवल वही होंगे। इसके अलावा दिव्यांगों को किसी तरह के उपकरण वितरण का कोई कार्यक्रम नहीं है। उन्होंने बताया कि दिव्यांगों को उपकरण वितरण के लिए डिमांड भेजी गयी है, जब उपकरण आएंगे तो वितरण की तिथि निर्धारित की जाएगी।
3 साल बाद ही एक दिव्यांग को दोबारा मिल सकता है उपकरण
भारतीय विकलांग कल्याण समिति के सदस्य मो.अकरम ने बताया कि 100 दिव्यांगों का रजिस्ट्रेशन मोटराइज्ड साइकिल के लिए हो चुका है। अन्य जिलों में इसका वितरण हो गया है लेकिन अयोध्या जनपद के दिव्यांग भटक रहे हैं। इसके विरोध में 3 दिसम्बर को दिव्यांगजन रैली निकालकर जिलाधिकारी को अपनी बात बताएंगे। वहीं, इस बारे में जिला दिव्यांग कल्याण धिकारी का कहना है कि मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल की वही लोग मांग कर रहे हैं, जिन्हें पिछले वर्ष ही दिया गया था। पिछले वर्ष 101 दिव्यांगों जो परीक्षण में पात्र पाये गये थे उन्हें ही मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरित की गयी थी। उन्होंने बताया कि एक उपकरण किसी दिव्यांग को 3 साल बाद ही दुबारा दिया जाता है
