अयोध्या: गीता जयंती पर तीन हजार बटुक ब्राह्मणों ने किया पाठ, नृत्य गोपाल दास बोले- संपूर्ण मानव जाति को ज्ञान देती है गीता
अमृत विचार, अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के आश्रम मणिराम दास छावनी में गीता जयंती के पर्व को बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। 3000 से ज्यादा वैदिक विद्वान, बटुक ब्राह्मण और संत धर्माचार्यों ने गीता का सस्वर पाठ किया।
वाल्मीकि रामायण भवन में आयोजित समागम के दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अध्यक्ष व मणिराम दास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि गीता जयंती सिर्फ हिंदू धर्म का मार्गदर्शन ही नहीं करती है, बल्कि सम्पूर्ण मानव जाति को ज्ञान देती है। उत्तराधिकारी महंत कमलनयन ने कहा कि पांडवों के साथ अन्याय हुआ।
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यहीं से असत्य, कदाचार, पापाचार अनाचार को जड़ मूल से समाप्त करने के लिए श्रीमद भगवद गीता का जन्म हुआ। विहिप नेता शरद शर्मा ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की वाणी से प्रकट हुई श्रीमद्भगवदगीता का हम पठन पाठन करें तो हमारा जीवन लोकहितकारी राष्ट्र को गौरवशाली बनाने में सहयोगी बन जाएगा। उन्होंने स्मरण कराते हुए कहा गीता जयंती का दिन अयोध्या के लिए महत्वपूर्ण है।
छह दिसंबर 1992 को हिन्दी तिथिनुसार गीता जयंती थी, जिस दिन गुलामी का प्रतीक ढांचा समाप्त हुआ। इस दौरान वैदिक वटुकों, विद्वानों और संत धर्माचार्यों को अंगवस्त्र दक्षिणा देकर सम्मानित किया। श्रीमणिराम दास छावनी ट्रस्ट के सचिव कृपालु राम दास पंजाबी बाबा, राम नाम बैंक के मैनेजर पुनीत राम दास, संत जानकी दास, रामरक्षा दास, संत रामशंकर दास उपस्थित रहे।
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