Nikay Chunav 2022: कानपुर मेयर सीट सामान्य घोषित, प्रमिला पांडेय ने उपलब्धियां गिना फिर दावेदारी ठोकी

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर में कई वरिष्ठ पार्षद भी महापौर के पद के लिए दावेदारी कर रहे हैं।

भाजपा से सरला सिंह और प्रमिला पांडेय ने आरक्षित सीट पर बाजी मारी थी। अब पार्टी दफ्तरों में हलचल बढ़ गई है। टिकटार्थियों ने संगठन से संपर्क साधा है। सीधे चुनाव में दो बार महिलाओं के लिए सीट आरक्षित रह चुकी है।

कानपुर, अमृत विचार। निकाय चुनाव में आरक्षण को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ हो गयी है। मेयर सीट के लिए जारी सूची में कानपुर की सीट अनारक्षित घोषित हुई है। यानी सामान्य श्रेणी। इस सीट पर किसी भी जाति का व्यक्ति लड़ाया जा सकता है।

कानपुर मेयर सीट पर पहले पार्षद ही मेयर का चुनाव करते थे। बाद में ये चुनाव प्रत्यक्ष होने लगे। यानी शहर की जनता चुनती है। लंबे अरसे के बाद 1988-89 में चुनाव हुए थे। तब 50 वार्ड होते थे और एक वार्ड से दो-दो पार्षद (सभासद) चुने जाते थे। इस चुनाव में भाजपा के सिंबल पर तो कांग्रेस बिना सिंबल के लड़ी थी।

यही पार्षद सीधे मेयर प्रत्याशियों को वोट देकर चुना करते थे। पर निकायों के प्रत्यक्ष चुनाव की शुरुआत होते ही कानपुर में पहला चुनाव हुआ। चुनाव क्षेत्र में छह विधानसभा क्षेत्र आते हैं यानी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से भी बड़ा कानपुर मेयर का निर्वाचन क्षेत्र होता है। पहले चुनाव में कानपुर सीट महिला आरक्षित घोषित हुई। इसमें भाजपा ने सरला सिंह को मैदान में उतारा और कांग्रेस से डा.प्रभा पांडेय मैदान में थीं। इस चुनाव में राममंदिर आंदोलन का माहौल था। खुद अटल बिहारी वाजपेयी यहां सरला सिंह के चुनाव प्रचार में आए थे। वह भारी मतों से विजयी घोषित की गयीं।

दूसरे चुनाव में कानपुर सीट तो सामान्य हो गयी पर भाजपा ने फिर सरला सिंह पर दांव लगाया और कांग्रेस ने पूर्व मेयर रतनलाल शर्मा के बेटे अनिल शर्मा को टिकट दिया। कांटे की लड़ाई में सत्ता विरोधी रुझान के चलते सरला सिंह हार गयीं। अगले चुनाव में सीट सामान्य रही भाजपा ने रवींद्र पाटनी को टिकट दिया और कांग्रेस ने बद्रीनारायण तिवारी को उतारा। ब्राह्मण बहुल सीट होने के बाद भी पाटनी जीत गए और तिवारी हार गए। अगले चुनाव में भाजपा के टिकट पर पूर्व सांसद कैप्टन पंडित जगतवीर सिंह द्रोण मैदान में आए। कांग्रेस ने पवन गुप्ता को उतारा। द्रोण जीत गए। फिर कानपुर महिल सीट हो गयी और प्रमिला पांडेय पर भाजपा ने दांव लगाया। मुकाबले में कांग्रेस ने दिल्ली पब्लिक स्कूल के मालिक एवं कांग्रेसी नेता आलोक मिश्रा की पत्नी बंदना मिश्रा को उतारा, लेकिन प्रमिला विजयी रहीं।

दावेदारों की संख्या बढ़ी

मेयर सीट की सूची जारी होते ही यह सीट एक बार फिर सामान्य कर दी गयी। दलों में प्रत्याशी की तलाश शुरू हो गयी। सबसे ज्यादा दावेदार भारतीय जनता पार्टी में हैं। मेयर प्रमिला पांडेय ने इस बार मजबूती से दावेदारी की है। उन्होंने हवाला भी दिया कि सरला सिंह दूसरे कार्यकाल के लिए पार्टी की पसंद थीं। उन पर विश्वास जताया गया वो बात दीगर वह जीत नहीं सकीं। मेयर का कहना है कि विकास कार्य बहुत कराए पर तमाम ऐसे कार्य रह गये हैं जिन्हें पूरा किया जाना है। यदि पार्टी उन्हें अवसर देती है तो वह जनता की सेवा को आगे आएंगी। सांसद सत्यदेव पचौरी के रिश्तेदार संजीव पाठक बॉबी पाठक, डॉ उमेश पालीवाल, भाजपा उत्तर क्षेत्र अध्यक्ष सुनील बजाज, दक्षिण क्षेत्र अध्यक्ष डॉ. वीना आर्या, निर्मल तिवारी, पूनम कपूर, कमलावती सिंह, अरविंद अग्निहोत्री ऐसे नाम हैं जो टिकट हासिल करने को लेकर काफी गंभीर प्रयास कर रहे हैं।

कांग्रेस से विकास अवस्थी, महेश दीक्षित चच्चू, पवन गुप्ता, आलोक मिश्रा, बंदना मिश्रा, प्रमोद जायसवाल, अंकज शुक्ला, शैलू शुक्ला अभी तक प्रमुख दावेदार के रूप में बताए जाते हैं। सपा से पूर्व विधायक सतीश निगम, ब्राह्मण और मुस्लिम में अच्छी पैठ रखने वाले विधायक अमिताभ वाजपेयी को भी सपा उतार सकती है। किसी मुस्लिम प्रत्याशी पर दांव लगा दे तो चौंकाने वाली बात न होगी। बसपा से अर्चना निषाद, सुरेंद्र कुश्वाहा, देवी प्रसाद तिवारी के नाम प्रमुख रूप से चल रहे हैं।

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