बरेली: 43 पोल की 85 फैंसी लाइटों की बत्ती गुल, सड़क पर छाया अंधेरा
विश्वदीपक त्रिपाठी, बरेली। गांधी उद्यान से लेकर डेलापीर चौराहे तक लगीं 2.79 करोड़ की फैंसी लाइटों में 43 पोल की 85 लाइटों की बत्ती गुल हो गई है। इस वजह से सड़कों पर शाम ढलते ही अंधेरा छा जाता है। मेयर डा. उमेश गौतम के लोकार्पण के एक पखवाड़े के भीतर ही फैंसी लाइटों का …
विश्वदीपक त्रिपाठी, बरेली। गांधी उद्यान से लेकर डेलापीर चौराहे तक लगीं 2.79 करोड़ की फैंसी लाइटों में 43 पोल की 85 लाइटों की बत्ती गुल हो गई है। इस वजह से सड़कों पर शाम ढलते ही अंधेरा छा जाता है। मेयर डा. उमेश गौतम के लोकार्पण के एक पखवाड़े के भीतर ही फैंसी लाइटों का सच उजागर हो गया। हल्की हवा के झोंके में गिरने वाले खंभे खुद ही घोटाले की पोल खोल रहे हैं। इससे साफ जाहिर है कि घटिया सामग्री लगाकर विभागीय मिलीभगत से करोड़ों का गोलमाल किया गया है।
मंगलवार की रात में अमृत विचार के संवाददाता ने फैंसी लाइटों की सच्चाई जाने के लिए गांधी उद्यान से लेकर डेलापीर तक लगी लाइटों की स्थिति परखी। जिसमें गांधी उद्यान से चंद कदम की दूरी पर शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक के कार्यालय के पास से मानसिक चिकित्सालय तक लगे 43 खंभे पर लगीं 85 लाइटें बंद मिलीं। इससे लाइटों की जो सच्चाई सामने आई। उससे साफ नजर आ रहा है कि इस सड़क पर लाइट लगवाने के नाम पर गोलमाल हुआ है।
करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी लोगों को रात के समय अंधेरे से गुजरना पड़ रहा है। रात में निकलते समय राहगीरों के लिए वाहनों की लाइट का ही सहारा है। कई दिनों से आई खराबी के कारण सड़कों पर अंधेरा रहता है। विकास भवन, अर्बन हाट, रामपुर गार्डन कालोनी में आने-जाने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। श्यामगंज पुल पर अंधेरा तो था ही, अब माडल टाउन पुलिस चौकी के पास भी कुछ फैंसी लाइटें खराब हैं। इससे साफ जाहिर है कि घोटाले की जड़ें काफी गहरी हैं।
इसमें पोल के नाम पर 70 हजार का भुगतान किया गया है। सिर्फ दो और चार इंच के पानी के पाइप को खरीदकर उस पर पालिश की और लाइटें लगा दी गईं। अब करीब 250 लाइटों में एक के बाद एक खराब हो रही हैं। विभागीय सूत्रों की बातों पर गौर करें तो लाइटों में आई खराबी को ठीक करने में नगर निगम के कर्मचारियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। इसके कारण आला अफसर फर्म से संपर्क साध रहे हैं।
काम ठेकेदार का, मशीनरी निगम की प्रयोग की
करोड़ों का कार्य कराने वाली फर्म पर नगर निगम के अफसरों की खास मेहरबानी रही है। फर्म ने मनमर्जी से सामानों की खरीदारी की। इसके बाद नगर निगम में गहरी पैठ का भी फायदा उठाया है। पोल पर लाइटों को लगाने के लिए नगर निगम के संसाधनों का उपयोग किया गया है। इतना ही नहीं कुछ कर्मचारियों से लाइटों को लगवा भी दिया है। पोल की ढुलाई भी निगम के वाहन से की गई। जबकि नियम यह है कि ठेका लेने वाली फर्म को अपने संसाधनों से कार्य कराया जाना चाहिए था, क्योंकि निविदा लेने के समय शर्त के अनुसार अनुभव और संसाधनों के बारे में बताना होता है। अगर संसाधनों कमी है तो नगर निगम के वाहनों का उपयोग करने के बदले में किराया जमा करना होता है। लेकिन नगर निगम को फर्म ने एक पैसे का भुगतान नहीं किया है। केवल लाइट लगाईं और भुगतान ले लिया। यहां तक कार्यपूर्ति जमा करने के कुछ ही दिन बाद भुगतान भी करा लिया।
एक जनप्रतिनिधि के कहने पर पुराने पोल दूसरी जगह लगाए
नई लाइटों को लगवाने के नाम पर कुछ वर्ष पहले लगे बिजली के खंभों को नगर निगम के स्टोर में जमा करने की वजाए एक जन प्रतिनिधि के मौखिक आदेश पर दूसरी जगह शिफ्ट कर दिए गए। उन पर फिर लाइटों को लगवा दिया गया। इतना सह मिलने का फायदा कुछ लोगों ने खूब उठाया है। एक जनप्रतिनिधि की नजर में अपना नम्बर भी बढ़ा लिए। इसके बाद उनके नाम पर लाखों के पुराने पोल और तार को गायब कर दिया। इससे मिलने वाली रकम का हिसाब नगर निगम के अभिलेखों में नहीं है। क्योंकि कुछ जिम्मेदारों ने सभी पोल को दूसरी जगह शिफ्ट करने की बात आला अफसरों से कही। इस बारे में प्रकाश प्रभारी व महाप्रबंधक जल राजेश कुमार ने बताया कि पोल को एक जनप्रतिनिधि के कहने पर दूसरी जगह लगाया है। स्टोर में पुराने पोल और तार नहीं लाए गए। उन्होंने बताया कि लाइट खराब हैं तो ठीक करा लिया जाएगा।
जब साहब ने डांट कर भगाया
मंगलवार को पथ प्रकाश विभाग के जिम्मेदार जब आला अफसर के पास पहुंचे तो उनका पारा चढ़ गया। फैंसी लाइट की शिकायतों से गुस्साए आला अधिकारी ने फटकार लगाते हुए बाहर जाने को कह दिया। इसको लेकर वहां मौजूद अन्य कर्मचारी सकते में आ गए। उन्होंने कहा कि मेरे पास मत आया करो, जिसका दरबार करते हो, उसी के पास जाओ। पूरे विभाग की हो रही बदनामी का ठीकरा पथ प्रकाश विभाग पर फोड़ दिया। इसके लेकर पूरे दिन नगर निगम में चर्चा होती रही।
