Saudamini Pethe : Bar Council of Delhi में पहली बार रजिस्ट्रेशन कराने वालीं 'Deaf Advocate'
नई दिल्ली। सौदामिनी पेठे दिल्ली विधिज्ञ परिषद में पंजीकरण कराने वाली पहली बधिर वकील हैं। उनका कहना है कि वह सुनने में अक्षम लोगों के अधिकारों के लिए काम करने के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा एवं न्याय तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने में मदद करना चाहती हैं।
सौदामिनी (45) भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) दुभाषिए के माध्यम से अदालतों में अपने मामलों पर बहस करेंगी। वह कानूनी पेशे में शामिल होने के लिए बधिर युवाओं को प्रेरित करना चाहती हैं। सौदामिनी ने नौ साल की आयु में दिमागी बुखार के कारण सुनने की क्षमता खो दी थी।
उनका मानना है कि विकलांगता और अक्षमता का नकारात्मक अर्थ होता हे। उन्होंने कहा, मेरा लक्ष्य है कि मैं बधिर लोगों को उनके अधिकार दिलाने के लिए अपनी कानून की डिग्री का इस्तेमाल करूं।
मैं जीवन के हरेक पहलू, भले ही वह शिक्षा हो, स्वास्थ्य सेवा हो, करियर हो या सबसे महत्वपूर्ण न्याय की बात हो, मैं भारत में बधिर समुदाय के लिए इन तक पहुंच को सक्षम बनाना चाहती हूं।
सौदामिनी ने कहा, मैं और जागरुकता फैलानी चाहती हूं तथा बधिरों को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में बताकर उन्हें सशक्त बनाना चाहती हूं।
मैं बधिरों को कानूनी पेशे में शामिल होने के लिए प्रेरित करना चाहती हूं। दिल्ली विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष वरिष्ठ वकील के के मेनन ने कहा, हमने उन्हें वकालत के लिए लाइसेंस दिया है, जो ऐसी स्थितियों में दुर्लभ ही दिया जाता है, लेकिन हम चाहते हैं कि वह अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। वह अपने दम पर कुछ कर सकें।
वह अपने और अपने परिवार के लिए आजीविका कमा सकती हैं। हमने इन सभी बातों को ध्यान में रखा है और इसीलिए हमने ऐसा किया।
सौदामिनी के लिए यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। उन्होंने कहा, मुझे अपने बेटे की परीक्षा से पहले के उसके कीमती समय में उसे अपने साथ ले जाना पड़ता था ताकि वह विश्वविद्यालय में मेरी (दाखिले संबंधी) औपचारिकताओं, अदालत में हलफनामा दायर करते समय और संबंधित प्राधिकारियों से बैठक का प्रबंध कराते समय दुभाषिए का काम कर सके।
मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि विधिज्ञ परिषद के प्रपत्र में दिव्यांगों के लिए न कोई श्रेणी थी और न ही कोई प्रासंगिक आरक्षण था। मुझे वास्तव में लगता है कि इस बात को राष्ट्रीय स्तर पर उठाए जाने की आवश्यकता है।
सौदामिनी ने 2000 में मुंबई विश्वविद्यालय से अंग्रेजी भाषा में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने नोएडा डेफ सोसाइटी में कार्य करने के दौरान 2008 के बाद आईएसएल सीखी थी।
इस समय, वह अखिल भारतीय मूक बधिर महिला फाउंडेशन की निदेशक और एक्सेस मंत्र फाउंडेशन की न्यासी हैं। उन्होंने हरियाणा के फरीदाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ एंड रिसर्च से इस साल अगस्त में एलएलबी की डिग्री ली और नवंबर में बार में पंजीकरण कराया।
ये भी पढ़ें : वेणुगोपाल ने गहलोत और पायलट के बीच टकराव पर कहा-सबकुछ हल किया जाएगा सहजता से
