Kanpur Zoo में आरक्षियों को सिखाया ट्रैंकुलाइजर गन चलाना, वानिकी प्रशिक्षण संस्थान Haldwani से आए महिला और पुरुष आरक्षी
कानपुर चिड़ियाघर में पुरुष और महिला को सिखाया ट्रैंकुलाइजर गन चलाना।
कानपुर चिड़ियाघर में आरक्षियों को ट्रैंककुलाइजर गन चलाना शुरू किया है। इसके साथ ही वानिकी प्रशिक्षण संस्थान हल्द्वानी उत्तराखंड से सवा सौ से ज्यादा महिला और पुरुष आरक्षी आए है।
कानपुर, अमृत विचार। खतरनाक बाघ और फुर्तीले तेंदुए को भी चंद मिनटों में काबू में किया जा सकता है। बिना घबराए ट्रैंकुलाइन गन का प्रयोग करना होगा। इस गन को 50 से 60 मीटर की दूरी से भी इस्तेमाल कर सकते हैं और फिर 30 से 35 मिनट तक जानवरों को बेहोश कर उन्हें सुरक्षित स्थान पर लाया जा सकता है। इसी तरह की सुरक्षा संबंधित बारीकियों के साथ उत्तराखंड से आए 128 आरक्षियों को कानपुर चिड़ियाघर में प्रशिक्षण दिया गया।
दो दिन चले प्रशिक्षण में पहले दिन वानिकी प्रशिक्षण संस्थान हल्द्वानी उत्तराखंड की 60 महिला आरक्षियों को ट्रेनिंग दी गई। शुक्रवार को महिला आरक्षियों के बाद शनिवार को 68 पुरुष आरक्षियों को प्रशिक्षण दिया गया। आरक्षियों को ट्रैंकुलाइन गन के बारे में बताया। इस गन की विशेषता के बारे जानकारी दी गई। आरक्षियों ने गन चलाना सीखा।
इसके साथ ही बेकाबू और बाड़े से भागने या फिर जंगल में टाइगर, लैपर्ड जैसे जानवरों को किस तरह से पिंजड़े में बंद किया जा सकता है। इसके साथ ही चिड़ियाघर या फिर ऐसे स्थान पर जहां लोगों की मौजूदगी है, वहां किस तरह से लोगों को सुरक्षित कर रेस्क्यू अभियान किया जा सकता है। जू प्रबंधन के बारे में भी बताया गया।
इसके साथ ही सांपों को पकड़ने के लिए भी विशेषतौर पर जानकारी दी गई। जहरीले और बिना जहर वाले सांपों, अजगर के बारे में बताया गया। उनको पकड़ने के तरीके बताए गए। स्पीच के माध्यम से भी चिड़ियाघर और वन संबंधित जानकारियां दी गईं। जू के पशु चिकित्साधिकारियों द्वारा जानवरों के स्वभाव को लेकर जानकारी दी।
इसके साथ ही पशुओं के चिकित्सा संबंधित उपकरण व अन्य सामग्रियों के बारे में बताया। इस दौरान पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुराग, क्षेत्रीय वन अधिकारी दिलीप कुमार गुप्ता, क्षेत्रीय वन अधिकारी प्रभारी विश्वजीत सिंह तोमर आदि मौजूद रहे।
