सुल्तानपुर: ...उतरती गई दिल में वो धीरे धीरे, चुरा ले गई मेरा दिल धीरे धीरे, पुस्तक प्रदर्शनी में युवा कवि गोष्ठी का हुआ आयोजन
अमृत विचार, सुल्तानपुर। उतरती गई दिल में वो धीरे धीरे, चुरा ले गई दिल मेरा धीरे धीरे। नहीं उसके बिन दिल है लगता कहीं पर, बढ़ी बेकरारी अब धीरे धीरे। यह पंक्तियां युवा कवि डॉ. अरुण निषाद ने जब पढ़ीं तो लोग झूम उठे। वह राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय व राजकमल प्रकाशन समूह द्वारा क्षत्रिय भवन सभागार में लगाई गई पुस्तक प्रदर्शनी के तीसरे दिन गांव देहात समूह द्वारा आयोजित युवा काव्य गोष्ठी में काव्य पाठ कर रहे थे।
विशिष्ट अतिथि केएनआई के असिस्टेंट प्रो. डॉ. पवन कुमार रावत की पंक्तियां थीं, मैं जीतना चाहता हूं कोई दुख नहीं, सिर्फ तुम्हारे मन का एक कोना। प्रदर्शनी के सह संयोजक व असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि ने सुनाया, जमाने ने जबसे बदली है पश्चिमी करवट, सोने का ये वतन भी कर्जदार हो गया। दुनिया के सबसे बड़े इस लोकतंत्र में, सत्य अहिंसा प्रेम कहना पाप हो गया।
कवयित्री बबिता सिंह की पंक्तियां थीं, किस मां का दूध पिया तुमने, छुप कर प्रहार जो करते हो, हम तुम्हें खदेरेंगें ऐसा, घुस कर बीजिंग में मारेंगे। अप्रतिम चतुर्वेदी ने कहा वर्षों से सोया नहीं हूं मैं, कितने दिन बीत गये तुम्हें भूला नहीं हूं मैं। अजय कुमार जायसवाल अनहद ने सुनाया, दिल में इतनी तल्खियां होने लगीं, किसने घोला जहर इस तालाब में, रेत में आ मछलियां रोने लगीं।
गौरव त्रिपाठी ने कहा मन उदासी में हो जब नया कीजिए, दर्द जो भी हो उसकी दवा कीजिए। बीएचयू के छात्र अवनीश शुक्ल ने कहा मेरी कविताएं आरक्षित हैं कुछ और लिखने के लिए ,मैं तुम्हें अपनी कविताओं में नहीं लिख पाऊंगा। डॉ. आभा सिंह की पंक्तियां थीं अग्नि परीक्षा भी दे डाला तब भी जग ने सती न माना, अवध में हुआ बड़ा अपमान।
शिवम शुक्ल ने कहा मैंने सबके लिये घोंसले बनाये थे, दोस्त मेरे सब बाज हो गये। मर्चेंट नेवी के कैप्टन रीतेश पांडेय ने कहा जेबें हैं खाली फिर भी दिल से हंसते हैं हम, मेरी खाली जेबों में बहुत से ख्वाब हैं। अध्यक्षता राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष इंद्रमणि कुमार, संचालन गांव देहात समूह के संस्थापक अंजनी तिवारी व आभार ज्ञापन राजकमल प्रकाशन समूह के अंजनी कुमार मिश्र ने किया।
यहां गरिमा चौरसिया, लोकेश श्रीवास्तव, अंकुरण के अभिषेक सिंह, अशोक चौधरी आदि ने अपनी कविताएं सुनाईं। युवा काव्य गोष्ठी के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार अनुराग द्विवेदी ने कहा कि आज के दौर में कविताएं हमें नई रोशनी दिखाती हैं। विशिष्ट अतिथि पूर्व विधायक अनूप संडा ने कहा जिस कविता में लय और विचार हो वही कविता सबके दिल को छूती है। जब हमारी जड़ें बचेंगीं तभी हम बचेंगे।
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