बरेली: ट्रिपल टेस्ट में फंसी पार्षद-सभासद की 89 सीटें, दावेदारों में बढ़ी बेचैनी
सैकड़ों दावेदारों की उम्मीदों पर फिर सकता है पानी
बरेली, अमृत विचार। नगरीय निकाय निर्वाचन के लिए राज्य सरकार की ओर से घोषित ओबीसी आरक्षण हाईकोर्ट से रद होने के बाद उन दावेदारों काे बड़ा झटका लगा है, जो सीटें 1 दिसंबर को ओबीसी के खाते में पहुंची थीं। अब सीटों का आरक्षण फिर बदले जाने की संभावना से दावेदारों में बेचैनी बढ़ गई है।
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हाईकोर्ट के फैसले से नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों की 89 सीटें ट्रिपल टेस्ट में फंसती नजर आ रही हैं। इस टेस्ट में सीटों का नए सिरे से आरक्षण होगा। राज्य सरकार ट्रिपल टेस्ट के जरिए ओबीसी आरक्षण लागू कराने की बात कह रही है। इसके लिए आयोग का गठन हाेगा। इसमें देखा जाएगा कि राज्य में ओबीसी की आर्थिक शैक्षणिक स्थिति क्या है?,
उनको आरक्षण की जरूरत है या नहीं? उन्हें आरक्षण दिया जा सकता है या नहीं?, उपरोक्त विषयों पर आयोग सर्वे कराकर रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, इसके बाद राज्य सरकार ओबीसी आरक्षण लागू करा सकती है। अब देखना यह है कि ट्रिपल टेस्ट में बरेली की 89 सीटों के समीकरण किस तरह से बदलते हैं। इन सीटों के लिए सैकड़ों की संख्या में दावेदार हैं जो भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे थे।
नगर निगम की ये सीटें हैं ओबीसी
बिहारीपुर सिविल लाइंस, शुगर फैक्ट्री, नवादा शेखान, कंजादासपुर, खलीलपुर, बनखंडीनाथ, नदौसी, कांकरटोला, सहसवानी टोला, चौधरी मोहल्ला, आकाशपुरम, गांधीपुरम, जोगी नवादा, रोहलीटोला, सैदपुर हाकिन्स, कुंवरपुर, सिकलापुर, सुरेश शर्मा नगर, एजाजनगर, सौदागरान, चकमहमूद नगर।
चार नगर पालिका परिषदों की ये सीटें थीं
नगर पालिका आंवला की कटरा पुख्ता विलायत गंज, गौसिया चाैक नई बस्ती, भुर्जी टोला बाग बख्शी, बजरिया ताड़गंज, बजरिया किला नई बस्ती, पक्का कटरा पश्चिमी। नगर पालिका फरीदपुर की मठिया बुखारा रोड, फर्रखपुर नई बस्ती, पढ़ेरा रोड लाइनपार, कस्सावान, परा नई बस्ती, तकिया नई बस्ती। नगर पालिका बहेड़ी की शेखूपुर उत्तरी, गोदाम, नई बस्ती उत्तरी, टांडा दक्षिणी, टांडा पश्विमी, शेखूपुर दक्षिणी। नगर पालिका नवाबगंज की इंदिरा नगर, आदर्श नगर, प्रभात नगर, पुराना ब्लॉक, प्रेमनगर, गांधी टोला।
15 नगर पंचायतों की ये सीटें ओसीबी हुई थीं
ठिरिया निजावत खां की पुलिया नाईयान। रिठौरा की जाटवपुरा, खेड़ा, कुर्मियान। धौराटांडा की होली, इस्लाम नगर, मस्जिद नाई, जामा मस्जिद। देवरनियां की शुगर फैक्ट्री, राईयान और नई बस्ती। फरीदपुर की होरी पुरा, मियां साहब। शेरगढ़ की कांवर उत्तरी, शिव मंदिर, नई बस्ती। रिछा की गौटिया, मस्तान प्रथम, नई बस्ती द्वितीय। शीशगढ़ की तिगड़ी, तकिया, कुरैशी नगर, अगवाड़ा। शाही की नेहरूनगर, रजानगर, मोती नगर। फतेहगंज पश्चिमी की अंसारी दक्षिणी, नई बस्ती, लोधी नगर, भोलेनगर। मीरगंज की मालीपुरा, शेखूपुरा, मीरखां बाबर नगर। बिशारतगंज की गोस्वामी नगर, गुलाब नगर, पुराना बाजार। सिरौली की पाण्डान, नूरी घेर और फरजंद नगर। फतेहगंज पूर्वी की नई बस्ती, जमीदारान। सेंथल की मस्जिद हम्दे अली, नई बस्ती, पछायां।
क्या कहते हैं राजनैतिक दलों के नेता
जपा के महानगर अध्यक्ष डा. केएम अरोड़ा कहते हैं कि हाईकोर्ट के फैसले से तैयारियों को झटका लगा है। भाजपा की चुनाव की पूरी तैयारी थी। अधिसूचना जारी होते ही सबसे पहले प्रत्याशी घोषित किए जाते। अब ट्रिपल टेस्ट के हिसाब से आरक्षण होने में समय लगेगा। इससे चुनाव आगे बढ़ते नजर आ रहा है।
चुनाव टलने का आभास सभी को था। उप चुनाव में समाजवादी पार्टी के पक्ष में आए नतीजों से भाजपा सरकार डर गई है। भाजपा ने शुरुआत से चक्रानुक्रम का पालन नहीं किया। इस वजह से हाईकोर्ट ने सरकार को नियमों का पालन करने का आदेश दिया है---शमीम खां सुल्तानी, निवर्तमान सपा महानगर अध्यक्ष।
सरकार ने पिछड़ों, अति पिछड़ों और दलितों के साथ जो अन्याय किया था उसको उच्च न्यायालय ने आयोग का गठन करके ठीक करने का आदेश दिया है, उसकी हम सराहना करते हैं। अब आरक्षण की व्यवस्था से नगर निकाय चुनाव में मिलने की उम्मीद---मिर्जा अशफाक सकलैनी, जिलाध्यक्ष कांग्रेस।
ओबीसी आरक्षण को लेकर सरकार की कारगुजारी का संज्ञान लेने संबंधी हाईकोर्ट का फैसला सही मायने में भाजपा एवं उनकी सरकार की ओबीसी एवं आरक्षण विरोधी सोच व मानसिकता को प्रकट करता है---डा. जयपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, बसपा।
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