प्रेम का दूसरा नाम भक्ति है :आचार्य
अमृत विचार, बल्दीराय/ सुल्तानपुर। आचार्य राम कुमार मिश्र शास्त्री ने कहा कि प्रेम ही परमेश्वर है। प्रेम करने वाला जहां शून्य हो जाता है वहीं परमात्मा प्रकट होता है। अनंत रूपों में उसकी वास्तविकता प्रकट होने लगती है, जहां हम स्वयं को खो देते हैं वहीं उसकी अनुकंपा हमारे ऊपर बरसने लगती है। वे बल्दीराय में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में प्रवचन कर रहे थे।
आचार्य ने कहा कि यदि हम सच्चे हृदय से परमेश्वर को याद करते हैं तो उस तक हमारी तरंगे भी पहुंचने लगती हैं। प्रेम का दूसरा नाम भक्ति है। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित से कलयुग ने एक स्थान मांगा तो उन्होंने सोने में वास करने के लिए कहा। जब जरासंध का मुकुट एक दिन राजा परीक्षित धारण किए तो कलयुग ने उनकी मति को भ्रमित कर दिया और आखेट पर निकले राजा परीक्षित समीक ऋषि के गले में मरा हुआ सांप लपेट दिया। जब यह बात उनके पुत्र श्रृंगी ऋषि को पता चला तो उन्होंने राजा परीक्षित को श्राप दे दिया कि इसी सांप के काटने से आज के सातवें दिन उनकी मृत्यु हो जाएगी। राजा परीक्षित बहुत दुखी हुए तब उनको ऋषियों ने कहा कि आप श्रीमद् भागवत कथा का रसपान करें, जिससे जीवन मृत्यु के बंधन से आप को मोक्ष मिल जाएगा। तब राजा परीक्षित ने सुखदेव महाराज से कथा का रसपान किया और मोक्ष को प्राप्त हुए। आयोजक जय बहादुर सिंह के साथ राघवेंद्र प्रताप सिंह, कौशलेंद्र प्रताप सिंह, रंजीत सिंह, राम सिंह सहित क्षेत्र के तमाम गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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