Kanpur से देखी जाएगी ब्रह्मांड की हर गतिविधि, IIT में लगने जा रहा रेडियो टेलीस्कोप व एंटीना
अब कानपुर से ब्रह्मांड की हर गतिविधि देखी जाएगी।
कानपुर से ब्रह्मांड की हर गतिविधि देखी जाएगी। इसके लेकर आईआईटी में रेडियो टेलीस्कोप व उसका एंटीना लगने जा रहा है। भारत में अब तक का सबसे बड़ा टेलीस्कोप बनाया जा रहा है।
कानपुर, [शशांक शेखर भारद्वाज]। दुनिया भर को भारत के खगोलीय ज्ञान की ताकत का अहसास कराने की तैयारी है। देश के किसी भी कोने से ग्रहों-उप ग्रहों की चाल, आकाश गंगा में बदलाव समेत ब्रह्मांड की हर गतिविधि का आसानी से पता चल सकेगा। इसमें टूटते तारों या फिर पृथ्वी की ओर आते किसी भी उल्कापिंड की जानकारी मिलना भी शामिल है।
आईआईटी कानपुर में रेडियो टेलीस्कोप और उसका एंटीना लगने जा रहा है। इसी तरह का एक और एंटीना बेंगलुरु के आरआरआई इंस्टीट्यूट में स्थापित किया जा रहा है। इसी तरह अलग अलग हिस्सों में 50 से 60 रेडियो टेलीस्कोप व एंटेना लगेगा।
सभी एंटीना के मिलने से बहुत बड़ी क्षमता और हाई रेजोल्यूशन वाला रेडियो टेलीस्कोप तैयार हो जाएगा। पहले चरण में भारत के सात संस्थानों का चयन किया गया है। आईआईटी के खगोलशास्त्री इसे अब तक का सबसे बड़ा रेडियो टेलीस्कोप बनने का दावा कर रहे हैं।
फास्ट रेडियो बर्स्ट (एफआरबी) समेत कई ऐसी खगोलीय घटनाएं हो रही हैं, जिस पर कई देश कार्य कर रह हैं। इनकी जानकारी के लिए उपग्रहों और स्पेस स्टेशनों से लगातार उनकी फ्रीक्वेंसी और तस्वीरें कैद करने का प्रयास किया जा रहा है। देश में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अलावा कई तकनीकी संस्थानों ने कार्य शुरू कर दिया है।
आईआईटी के स्पेस साइंस विभाग ने भी शोध कार्य की तैयारी की है। यहां की नई बिल्डिंग में रेडियो टेलीस्कोप व उसका एंटीना लगाया जा रहा है, जिसके लिए काम चालू हो गया है।
शोध कार्यों में मिलेगी मदद
आईआईटी के स्पेस साइंस विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. पंकज जैन के मुताबिक रेडियो टेलीस्कोप से शोध कार्यों में मदद मिलेगी। छात्र-छात्राएं देश के अलग अलग हिस्सों से खगोलीय घटनाओं और ब्रह्मांड की गतिविधियों का अध्ययन कर सकेंगे। पहले चरण में सात संस्थानों को लिया जा रहा है।
आईआईटी कानपुर और बेंगलुरु के आरआरआई इंस्टीट्यूट का नाम फाइनल हो चुका है। देश में अभी पुणे में रेडियो टेलीस्कोप स्थापित है, जबकि नया रेडियो टेलीस्कोप कई खूबियों वाला होगा। इससे एंटेने के नेटवर्क से किसी भी ग्रह या उपग्रह को हर एंगल से देखा जा सकेगा।
