बरेली: लगातार हादसों के बाद हुई प्लेटफार्म की तकनीकी जांच

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बरेली, अमृत विचार। जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर दो पर 45 दिन में चार तो 12 घंटे के अंदर दो हादसे होने के बाद से रेल प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। मुरादाबाद से लेकर दिल्ली स्थित उत्तर रेलवे के मुख्यालय में भी अधिकारी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। बुधवार सुबह इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों ने प्लेटफार्म नंबर दो पर जाकर संभावित तकनीकी खामियों को टटोलने का प्रयास किया। काफी देर तक अधिकारियों ने प्लेटफार्म की लंबाई और चौड़ाई नापी। खासकर उन स्पाट को देखा, जहां अब तक सबसे ज्यादा हादसे हुए हैं। तकरीबन एक घंटे तक अधिकारी नापजोख करते रहे।

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सीनियर सेक्शन इंजीनियर कार्य चमन सिंह पूर्वाह्न 11 बजे प्लेटफार्म नंबर दो पर पहुंचे। फुटओवर ब्रिज के पास काफी देर तक उनकी टीम फीते से नापजोख करती रही। इस दौरान रेलवे ट्रैक से प्लेटफार्म की ऊंचाई को नापा गया। साथ ही जिस स्थान पर प्लेटफार्म में अधिक गैप नजर आ रहा है, उसको चिन्हित किया गया। इसके बाद जिन स्पाट पर अब हादसे हुए हैं, वहां की ऊंचाई आदि नापी गई और गैप देखे गए। अब यह रिपोर्ट मंडल के अधिकारियों को भेजी जाएगी। 

मुरादाबाद रेल मंडल के अधिकारियों ने लगातार हुए हादसों के बाद प्लेटफार्म को तकनीकी रूप से चेक कराने की बात कही थी। जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर दो पर सोमवार को गरीब नवाज एक्सप्रेस में चढ़ने के दौरान एमबीए की छात्रा आकांशा का पैर फिसल गया था। ट्रेन से गिरकर वह प्लेटफार्म के नीचे चली गई। हादसे में छात्रा को बायीं टांग गंवानी पड़ी। 

इस घटना को 12 घंटे भी नहीं बीते थे कि पंजाब मेल से उतरने के दौरान एक युवक प्लेटफार्म के नीचे चला गया। हादसे में युवक की दोनों टांगे कट गईं। अस्पताल ले जाते हुए उसने दम तोड़ दिया। इसी के साथ डेढ़ महीने के अंदर इसी प्लेटफार्म पर यह चौथी घटना थी। 17 नवंबर को हुई घटना के बाद फौजी सोनू सिंह को जान गंवानी पड़ी जबकि 22 दिसंबर को एक महिला के साथ घटना हुई। हालांकि गनीमत यह रही कि प्लेटफार्म के नीचे जाने के बावजूद महिला को खंरोच तक नहीं आई।

स्पीड कम करने की दी जा रही सलाह
प्लेटफार्म नंबर दो पर लगातार होने वाले हादसों की बड़ी वजह रफ्तार को भी माना जा रहा है, क्योंकि मेनलाइन होने व कोई कर्व आदि नहीं होने के कारण इस ट्रैक पर ट्रेनों की रफ्तार 80 किमी प्रतिघंटा तक होती है। सूत्रों के अनुसार संबंधित विभाग के अधिकारी खामियां दूर करने की जगह काशन लगाकर स्पीड कम करने की सलाह ऑपरेटिंग से जुड़े अधिकारियों को दे रहे हैं।

ऐसे में ऑपरेटिंग विभाग के अधिकारियों के सामने सवाल यह है कि काशन किस बात का लगाएं। क्योंकि कागजों में तो दो नंबर प्लेटफार्म हाईलेवल है। वर्ष 2019 में प्लेटफार्म नंबर दो की लाइन नंबर तीन पर वॉशेबल एप्रोन की जगह ब्लास्ट ( पत्थर) वाला ट्रैक डाला गया था।

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