Kanpur की सड़कों के गड्ढे भरने का दावा फेल, टूटी सड़कों में बिना हेलमेट के फर्राटा भर रहे लोग
कानपुर में टूटी सड़कों में बिना हेलमेट के लोग यात्रा कर रहे।
कानपुर में सड़कों के गड्ढे भरने का दावा फेल साबित हो रहा। यहां टूटी सड़कों में बिना हेलमेट के लोग फर्राटा भर रहे।
कानपुर, अमृत विचार। स्मार्ट सिटी का नाम आते ही चौड़ी और साफ सुथरी सड़कों पर फर्राटा भरते वाहनों की तस्वीरें लोगों की जेहन में आने लगती हैं। सड़कों के निर्माण में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जब उसकी तस्वीरें दुर्दशा की दास्तां बयां कर रही हों, तो क्या आप क्या सोचेंगे। हम बात कर रहे हैं, शहर की कुछ सड़कों की जहां के हालात बद से बदत्तर हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी दो माह पूर्व सड़कों को गड्ढामुक्त करने के कड़े निर्देश अफसरों को जारी किए थे। सड़कों के निर्माण तो हुए, लेकिन कुछ ही दिन में फिर से टूटकर बजरी फैलने लगी है। इससे आए दिन हादसे की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है, लेकिन विभाग भीषण ठंड में काम बंद कर अलाव के सहारे है।
वहीं यातायात विभाग भी नियमों का पालन कर सड़कों पर चलने के लिए रोज जागरूक कर रहा है, लेकिन जब शहर की सड़के ही गड्ढामुक्त नहीं होंगी तो आपकी सुरक्षा ईश्वर के भरोसे होगी। पिछले वर्ष नवंबर में यातायात माह में सड़क सुरक्षा को लेकर कई आयोजन किए गए।
इसी तरह जनवरी में भी जागरूक करने का काम किया जा रहा है, लेकिन लोग अभी भी बिना हेमलेट के तीन सवारी बैठाकर हादसों को दावत दे रहे हैं। जबकि लगातार विभाग बता रह है कि हेड इंजरी से ज्यादातर मौते हुई हैं।
यहां पर सबसे ज्यादा गड्ढे
लाल इमली, ग्वालटोली, जीटी रोड, चेन फैक्ट्री चौराहा, बर्रा छह, शास्त्री नगर, श्यामनगर, रामादेवी, गोविंदपुरी पुल, पांडु नगर, नौबस्ता, यशोदा नगर, किदवई नगर, विश्वबैंक, जाजमऊ, कानपुर लखनऊ हाईवे, टाटमिल, नई सड़क, मूलगंज समेत दर्जनों इलाकों में सबसे ज्यादा गड्ढे हैं।
यातायात विभाग उठाता फायदा
शहर की सड़कों की दयनीय स्थिति देखकर यातायात विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को बोलने का मौका मिल जाता है। उन लोगों का साफ कहना है कि पीडब्ल्यूडी सड़कों के निर्माण में लापरवाही बरत रहा है। जिसके चलते लोग टूटी सड़कों पर फर्राटा भरते हैं व फिसलकर मौत के आगोश में समा जाते हैं। इसी कारण हादसों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, लेकिन विभाग नहीं चेत रहा है। अगर सड़कों का निर्माण हुअ होगा तो हादसे पर लगाम अपने आप लग जाएगी।
रफ्तार बन रही काल फिर भी नहीं चेत रहे
पिछले वर्ष घाटमपुर के कोरथा गांव में अनियंत्रित ट्रैक्टर ट्राली पानी की खंती में पलटने से 13 महिलाएं व 13 बच्चों की पानी में दम घुटने मौत हो गई थी। साल का यह सबसे बड़ा हादसा जिसने सभी को हिला कर रख दिया था। इसी तरह पूरे वर्ष रफ्तार कहर बनकर कई परिवारों पर टूटी। जिसमें कई जिंदगियां चली गईं व परिवार बिखर गए।
यातायात विभाग निरंतर सड़कों पर नियमों का पालन कराने के लिए लगातार लोगों को जागरूक करने का काम कर रहा है। फिर भी लोग बात न मानकर अपनी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। वर्ष 2021 से 2022 में बढी हादसों की संख्या केवल व केवल लापरवाह लोगों की देन है। इसके बाद भी लोग कतई नहीं चेत रहे हैं।
दर्द जो दे रहे गड्ढे
-आए दिन हादसों की वजह बनते हैं गड्ढे
-पीठ दर्द के साथ अन्य परेशानियां दे रहे गड्ढे
-वाहनों की गति धीमी पड़ जाती है
-शहर में इसके कारण जाम लगना आम हो गया है
-वाहनों का माइलेज गिरता है
-साथ ही वाहनों में मेंटीनेंस के साथ पेट्रोल की बर्बादी होती है
वर्ष 2021 में शहर में हादसों का आंकड़ा
-हादसों में मृतकों की संख्या -598
-हादसे में मृतक पुरुष की संख्या -506
-हादसे में मृतक महिला की संख्या -92
-हादसे में घायलों की संख्या- 1354
वर्ष 2022 में हुए हादसों के आंकड़े
वाहन हादसे मौत घायल
दो पहिया वाहन 179 128 75
कार-जीप 150 97 53
बस 10 25 09
ट्रक-लॉरी 48 150 197
- ये आंकड़े तो केवल एक बानगी हैं, वर्ष 2022 में मौतों की कुल संख्या 618 रही है।
हादसों में हुईं मौतों पर पांचवें नंबर पर कानपुर
हादसों में हुई मौतों पर अपना शहर कानपुर पांचवें नंबर पर है। सड़क परिवाहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने वर्ष 2021 में हुए हादसों की वार्षिक रिपोर्ट जारी कर दी है। अन्य पऱदेशों की अपेक्षा यहां की मौतों की संख्या अधिक होने के कारण अधिकारी भी घबरा गए हैं। उन लोगों ने विभागों को जागरूक करने के निर्देश जारी किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार कानपुर में हर नौ हादसों में चार की जान चले जाने का रिकार्ड है।
लगातार शहर की जनता को नियमों का पालन कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है। अब अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।- तेज स्वरूप सिंह, डीसीपी यातायात
सड़कों के गड्ढे भरे गए हैं। जहां गड्ढे अभी हैं तो संबंधित अधिकारियों को इसको लेकर निर्देशित किया जाएगा। भौतिक सर्वे कराकर वे सड़कें चिन्हित कराई जाएंगी। अभी सर्दी के चलते डामरीकरण का काम रुका हुआ है।- कन्हैया झा, अधीक्षण अभियंता, पीडब्ल्यूडी
