Kanpur : सेहत के फिक्रमंद लोगों के लिए FFDC बनाएगा हर्बल गार्डन, नेशनल मेडिसिनल प्लांट बोर्ड को भेजा गया प्रस्ताव
कानपुर में एफएफडीसी हर्बल गार्डन बनाएगा।
कानपुर में सेहत के फिक्रमंद लोगों के लिए एफएफडीसी हर्बल गार्डन बनाएगा। इसके लिए एक हेक्टर के एक चौथाई हिस्से पर विकसित होगा। वहीं, नेशनल मेडिसिनल प्लांट बोर्ड को प्रस्ताव भेजा गया।
कानपुर, अमृत विचार। कोरोना महामारी के बाद लोग स्वास्थ के प्रति जागरूक हुए तो घरों में हर्बल प्लांट लगाने का शौक भी तेजी से बढ़ा है। आपका यह शौक एफएफडीसी (सरस एंव सुगंध विकास केंद्र) कानपुर केंद्र की मदद से परवान चढ़ेगा। विभाग एक अभिनव प्रयोग की तैयारी में है। विभाग कार्यालय परिसर में हर्बल गार्डन यानी आरोग्य वाटिका विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है।
कोरोना महामारी के दौरान घर-घर इसकी उपयोगिता का महत्व समझा गया था। अब एफएफडीसी की मदद से आप किचन गार्डन में हर्बल प्लांट्स के माध्यम से रोगों से भी लड़ते हुए अपने भीतर प्रतिरोधन क्षमता भी बढ़ा सकेंगे। एफएफडीसी ने हर्बल गार्डन का प्रस्ताव नेशनल मेडिसिनिल प्लांट्स बोर्ड में मंजूरी के लिए भेजा है।
हर्बल गार्डन को विकसित करने की शुरुआती लागत करीब-करीब 20 लाख रुपया आएगी। परिसर ढाई एकड़ में फैला है जिसका एक चौथाई भाग हर्बल गार्डन के लिए प्रस्तावित है। इसी में 500 वर्गमीटर का वाकिंग ट्रैक भी विकसित किया जाएगा ताकि आने-जाने वालों को हर्बल गार्डन में मनपसंद प्लांट तक पहुंचने में असुविधा न हो।
एफएफडीसी के सहायक निदेशक भक्तिविजय शुक्ला का कहना है कि निदेशालय के माध्यम से यह केंद्र को भेजा गया है। बजट मिलने के साथ ही कार्य शुरू हो जाएगा।
हर्बल गार्डन में आपको किचन गार्डन लायक लगभग समस्त पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। हर्बल गार्डन में एक गाइड भी उपलब्ध होगा जो बताएगा कि आप अपने किचन गार्डन में कौन-कौन से हर्बल प्लांट कब-कब लगा सकते हैं। स्वाद बढ़ाने के साथ ही सेहत में दुरुस्त रखने वाले प्लांट्स घरों में लगाकर जीवन को खुशहाल बनाया जा सकता है।
जैसे पार्सले से विटामिन सी और के भरपूर मिलता है। इसकी पत्तियां कब्ज, मधुमेह, किटनी स्टोन को ठीक करने में सहायक होता है। चाइव्स पौधा की पत्तियां खाने से नींद बढ़िया आती है। रोजमेरी एकाग्रता बढ़ाता है। तीन प्रकार तुलसी, कई तरह से मिंट पौधे भी मिलेंगे। थाइम, लेमनबाम, लेमनग्रास व जड़ी बूटियों को घर के अंदर या कंटेनर में उगाया जा सकता है। तुलसी, चिव्स, पुदीना, अजवायन, अजमोद, गिलोय, पुदीना एलोवेरा और मेहंदी उपयुक्त माने जाते हैं।
भक्तिविजय शुक्ला कहते हैं कि कंटेनरों में जड़ी बूटियों को उगाना आसान होता है, बस उन्हें थोड़ी धूप, पानी, अच्छी मिट्टी और उर्रवरक की जरूरत होती है। जड़ी बूटियों को अच्छी तरह से विकसित होने के लिए 6-8 घंटे धूप की जरुरत होती है।
वह बताते हैं कि रसोई घर की खिड़की के बाहर बक्शे में इसकी खेती की जा सकती है ताकि जरुरत पड़ने पर तुंरत तोड़कर इसका इस्तेमाल किया जा सके। हैंगिंग हर्ब गार्डन भी घर में हर्बल पौधे लगाने का एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है।
कई ऐसे जड़ी बूटियां होते हैं जिन्हें आप घर के अंदर भी उगा सकते हैं। तो अगर आपके पास बालकनी या बाहर में जगह नहीं है तो घर के अंदर भी इसे लगा सकते हैं। घर के अंदर अगर आप जड़ी बूटियां लगाते हैं तो इसे ऐसी जगह पर करें जहां धूप आती हो क्योंकि इन्हें कम से कम 6 घंटे धूप की आवअश्यकता होती है।
सहायक निदेशक शुक्ला कहते हैं कि जड़ी बूटियों को बाहर उगाने के बहुत फायदे हैं। पर इसके लिए यह सुनिश्चित करें की उस जगह पर मिट्टी अच्छी हो और धूप मिलती हो।
हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में अच्छे खान-पान के साथ-साथ जड़ी बूटियों का भी बहुत अधिक योगदान होता है। कोरोना में हम सबने देखा कि किस तरह गिलोय, अश्वगंधा, तुलसी, लौंग, दालचीनी आदि के काढ़े ने लोगों को मदद की है। गांव में तो गिलोय होती है कि शहरों में भी लोगों ने अपने घरों में गिलोय की बेल लगाई। आरोग्य वाटिका आप घरों में लगा सकते हैं।- डॉ.भक्तिविजय शुक्ला
