बरेली: जिले में तेजी से पांव पसार रहा फाइलेरिया, पांच ब्लॉक संवदेनशील

बरेली: जिले में तेजी से पांव पसार रहा फाइलेरिया, पांच ब्लॉक संवदेनशील

बरेली, अमृत विचार। डेंगू, मलेरिया के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में फाइलेरिया भी बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने 15 ब्लॉकों में से पांच ब्लॉकों को फाइलेरिया के दृष्टिगत संवेदनशील माना है। इनमें सबसे अधिक दलेलनगर ब्लॉक को बढ़ते मामलों के चलते अति संवेदनशील घोषित किया गया है। दलेलनगर में अब तक कुल 37 फाइलेरिया से ग्रसित मरीज मिले हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांवों में फाइलेरिया के रोकथाम के लिए नाइट ब्लड सर्वे अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें रात के समय खून के नमूनों की जांच की जा रही है।

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जांच के दौरान पुष्टि होने पर चिह्नित गांवों में फाइलेरिया के मरीजों का पंजीकरण कर उन्हें शासन के निर्देशानुसार इलाज दिया जा रहा है। वहीं शासन की टीम भी बरेली पहुंच गई है फाइलेरिया ग्रसित इलाकों में यह टीम सर्वे कर शासन को रिपोर्ट सौंपेगी। पांच ब्लॉकों को मरीजों की संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने संवेदनशील माना है। इनमें से फतेहगंज पश्चमी, मीरगंज, फरीदपुर, बिथरी चैनपुर और कुआटांडा में फाइलेरिया के मरीज सामने आ चुके हैं। ऐसे में फाइलेरिया अभियान के तहत इन चिह्नित क्षेत्रों में विशेष निगरानी की जा रही है। जिले में सर्वे के तहत कुल चार हजार ग्रामीणों की जांच की जाएगी।

अब तक कुल 158 मरीज फाइलेरिया से ग्रसित
जिला मलेरिया अधिकारी डा. देशराज सिंह ने बताया कि जिले में पिछले वर्ष 139 मरीज फाइलेरिया के मरीज खोजे गए थे। वहीं इस वर्ष प्रकोप बढ़ा है और अब तक 158 मरीजों में फाइलेरिया की पुष्टि हो चुकी है। बताया कि फाइलेरिया के मरीजों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के तहत निशुल्क ऑपरेशन कराया जाता है। जिला अस्पताल में चार मरीजों के सूजे हुए हाथ, जबकि फाइलेरियल हाइड्रोसिल से जूझ रहे आठ लोगों का ऑपरेशन विशेषज्ञ सर्जनों ने किया है।

ये होते हैं फाइलेरिया के लक्षण
जिला अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि फाइलेरिया के कोई लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते हैं। हालांकि बुखार, बदन में खुजली और पुरुषों के जननांग और उसके आस-पास दर्द व सूजन की समस्या होती है। पैरों और हाथों में सूजन, हाइड्रोसिल (अंडकोषों की सूजन) भी फाइलेरिया के लक्षण हैं। इस बीमारी में हाथ और पैरों में हाथी के पांव जैसी सूजन आ जाती है, इसलिए इस बीमारी को हाथीपांव भी कहा जाता है।

ऐसे करें बचाव
फाइलेरिया चूंकि मच्छर के काटने से फैलता है, इसलिए बेहतर है कि मच्छरों से बचाव किया जाए।
सोते वक्त हाथों और पैरों पर व अन्य खुले भागों पर सरसों या नीम का तेल लगाएं।
हाथ या पैर में कहीं चोट लगी हो या घाव हो तो उसे साफ रखें

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