उर्जा क्षेत्र की भूमिका
विश्व का भविष्य तय करने में उर्जा क्षेत्र की बहुत बड़ी भूमिका है। भारत तेजी से ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार कर रहा है और इस सेक्टर में अभूतपूर्व संभावनाएं हैं। सरकार ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने, अधिक अन्वेषण और उत्पादन के लिए निवेश आकर्षित करने को विभिन्न पहल कर रही है।
सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक निवेशकों से देश के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया और भारत को दुनिया में निवेश के लिए सबसे उपयुक्त स्थान बताया है। पीएम मोदी ने भारत ऊर्जा सप्ताह-2023 का उद्घाटन करने के बाद कहा कि इस वर्ष बजट में 10 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का प्रावधान किया गया है। भारत का ऊर्जा क्षेत्र दुनिया में सबसे विविध क्षेत्रों में से एक है।
भारत में कोयला, लिग्नाइट, प्राकृतिक गैस, तेल, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा जैसे विद्युत उत्पादन के पारंपरिक स्रोतों से लेकर पवन, सौर, कृषि घरेलू अपशिष्ट जैसे व्यवहार्य गैर-पारंपरिक स्रोत उपलब्ध हैं। सरकार आजादी के 100 वर्ष पूरे होने से पहले यानी वर्ष 2047 तक ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की योजना बना रही है।
जैसे-जैसे वैश्विक योजना में हरित ऊर्जा अधिक महत्त्वपूर्ण हो रही है, भारत ने हरित हाइड्रोजन पर कार्य करना शुरू कर दिया है। ऊर्जा क्षेत्र में क्रांति के उद्देश्य से सरकार चार प्रमुख बिंदुओं पर काम करेगी। आत्मनिर्भर भारत के तहत घरेलू चीजों की खोज और उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। आपूर्ति को प्राथमिकता और कुछ नया करने की चाह को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए बायोफ्यूल, एथेनॉल और सोलर एनर्जी के स्त्रोतों में इजाफा किया जाएगा। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन और हाइड्रोजन के जरिए डीकार्बोनाइजेशन का काम भी किया जाएगा। आशा की जा सकती है कि भारत 2030 तक अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का 50 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा करेगा।
देश की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए न केवल बुनियादी ढांचा मज़बूत करने की ज़रूरत है, बल्कि ऊर्जा के नए स्रोत तलाशना भी जरूरी है। ऐसे में, सौर ऊर्जा क्षेत्र भारत के ऊर्जा उत्पादन और मांगों के बीच की बढ़ती खाई को बहुत हद तक पाट सकता है।
सौर ऊर्जा स्वच्छ अक्षय ऊर्जा है, इसका अधिकतम दोहन देश के ऊर्जा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने का काम करेगा और इसका लाभ देश की प्रगति में अनेक क्षेत्रों में उपलब्ध होगा।भारत को लगातार बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए अपनी विद्युत व्यवस्था में सौर और पवन ऊर्जा तथा विशेष रूप से हरित हाइड्रोजन ऊर्जा का उपयोग करना चाहिए।
