रामपुर: 110 दिन बाद पूर्व मंत्री आजम खां मुरादाबाद में दूसरे मामले में दोषी करार
भड़काऊ भाषण के मामले में 27 अक्टूबर 2022 को एमपी-एमएलए कोर्ट ने सुनाई थी तीन साल की सजा
रामपुर, अमृत विचार। पूर्व मंत्री आजम खां को 110 दस दिन के बाद मुरादाबाद की कोर्ट ने दूसरे मामले में दोषी करार दिया है। हालांकि अभी तक सजा का ऐलान नहीं किया गया है। इस बार उनके साथ उनके बेटे स्वार-टांडा विधायक अब्दुल्ला आजम को भी कोर्ट ने दोषी बनाया है। देखना है कि अब दोनों को कोर्ट कितनी सजा सुनाता है।
अपने चर्चित बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले सपा के कद्दावर नेता आजम खां सपा सरकार जाने के बाद सूबे में आई भाजपा सरकार में चारों तरफ से घिरे हुए हैं। उन पर दर्ज करीब 100 मामलों में अब वह कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाकर अपने बयान दर्ज करा रहे हैं। जिन मामलों में अब उनको धीरे-धीरे सजा भी होना शुरू हो गई है।
बताते चलें कि आजम खां के बसपा और सपा के गठबधन के 2019 में लोकसभा प्रत्याशी बनाए गए थे। इस दौरान मिलक कोतवाली इलाके के खाता नगरिया गांव में जनसभा को संबोधित किया था। आरोप है कि उन्होंने भड़काऊ भाषण दिया था जिससे दो वर्गों में नफरत फैल सकती थी, जिसका वीडियो वायरल हुआ था।
जिसमें कहा था कि मोदी जी आपने हिन्दुस्तान में ऐसा माहौल बना दिया है कि मुसलमानों का जीना दुश्वार हो गया है। इसके अलावा और भी आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी। इसके साथ ही रामपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी और मुरादाबाद मंडल के मौजूदा कमिश्नर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
दंगा भड़काने वाले शब्दों का उपयोग किया गया था। उस समय के प्रभारी वीडियो अवलोकन टीम के अनिल चौहान ने मिलक थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने इस मामले में विवचेना करने के बाद चार्जशीट कोर्ट में दाखिलकर दी थी। जिसकी सुनवाई एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रही थी। 27अक्टूबर को उनको कोर्ट से तीन साल की सजा और 25 हजार का जुर्माना लगाया था। अब 110 दिन के बाद मुरादाबाद में चल रहे छजलैट के मामले में सोमवार को कोर्ट ने आजम व अब्दुल्ला को दोषी करार दिया है। हालांकि सजा का ऐलान नहीं हुआ है। इस बार आजम खां और उनका बेटा अब्दुल्ला आजम खां भी शामिल हैं।
विधायकी गई और वोट डालने का अधिकार भी गया
आजम खां को जब तीन साल की सजा हुई थी, तो उसके कुछ रोज के बाद आजम खां की विधायकी चली गई वहीं वोट डालने का अधिकार भी छीन लिया गया था। अब आजम खां वोट भी नहीं डाल सकते हैं। इसके अलावा वह लगातार मुकदमों के गवाही देने के लिए वह कभी मुरादाबाद तो कभी शाहजहांपुर और मुंबई तक कोर्ट पेश होने जा रहे हैं। रामपुर में काफी तारीखों पर कोर्ट में आ चुके हैं। जबकि कई मुकदमें यहां से तबादले के लिए वह लगातार कोर्ट में प्रार्थना पत्र दे रहे हैं।
इन धाराओं में आजम खां को हुई थी सजा
आजम खां के भड़काऊ भाषण मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए (मजिस्ट्रेट ट्रायल) में चल रही थी। जहां 27 अक्टूबर को आईपीसी की धारा 153-ए, 505-ए और 125 लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में तीन साल की सजा के साथ 25 हजार का जुर्माना लगाया था। यह आजम खां की पहली सजा थी।
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