रुद्रप्रयाग: इस दिव्य स्थल में शिव जी और माता पार्वती ने लिए थे सात फेरे
आज भी हवनकुंड की ज्योति विद्यमान है
रुद्रप्रयाग, अमृत विचार। आपने भगवान शिव के अनेक ज्योतिर्लिंग और मठों के बारे में सुना ही होगा पर क्या आपको ये पता है की भगवान शिव का विवाह रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ ब्लॉक में स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर में हुई था और विवाह के पुरोहित स्वयं ब्रह्म जी थे एवं भगवान विष्णु द्वारा माता पार्वती का कन्यादान किया गया था। माना जाता है की भगवान भोले नाथ और माता पार्वती का विवाह संभवत 18 सौ साल पूर्व इस मंदिर में त्रेता युग में हुआ था। त्रेता युग आज से 17900 वर्ष पूर्व खत्म हुआ था इसलिए यह तीर्थ स्थल किसी भी रूप में 17900 वर्ष से पूराना ही है।
अखंड ज्योत का रहस्य
दूर-दूर से लोग यहां विवाह रचाने आते है। त्रियुगीनारायण मंदिर में शादी करने का प्रचलन सिर्फ स्वदेश तक सीमित नहीं बल्कि विदेशी युगल भी इस मंदिर में विवाह सम्पन्न करने की चाह रखते है। माना जाता है की लौ दिव्य विवाह के समय से जलती है जो आज भी त्रियुगीनारायण मंदिर में विद्यमान है। अखंड ज्योति के कारण इस मंदिर को अखंड धुनी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। आने वाले दर्शनार्थी हवनकुंड की राख को अपने साथ ले जाते हैं और मानते हैं की यह उनके वैवाहिक जीवन को मंगलमय बनाएगी।
