बरेली: रॉयल्टी न ठेकेदारों का भुगतान, सबसे पहले भरेंगे कागज का पेट

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। खनन विभाग को नगर निगम के ठेकेदारों पर बकाया उसकी रॉयल्टी और ठेकेदारों को भुगतान करने के लिए कवायद शुरू कर दी गई है। नगर निगम के सभी जेई को शहर में हुए निर्माण कार्यों की फाइलें देकर उनमें इस्तेमाल हुए रेत-बजरी और गिट्टी का हिसाब तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि उस पर बनने वाली रायल्टी तय की जा सके। हालांकि रायल्टी का भुगतान ठेकेदारों को करना है और ठेकेदारों का भुगतान नगर निगम को। अड़चन यह है कि नगर निगम के पास भुगतान करने के लिए पैसा ही नहीं है। लिहाजा फिलहाल यह कार्रवाई कागजी खानापूरी तक ही सीमित रहने की उम्मीद है।

किसी भी निर्माण कार्य में रेत-बजरी और पत्थर के इस्तेमाल के मुताबिक खनन की रायल्टी का भुगतान किए जाने का प्रावधान है। नगर निगम की ओर से पिछले तीन सालों से कराए गए निर्माण कार्यों पर रायल्टी का भुगतान नहीं किया गया है।

पिछले दिनों शासन की ओर से इस बारे में पूछताछ किए जाने पर जिला खनन अधिकारी ने नगर निगम से संपर्क किया तो पता चला कि अफसर शहर में निर्माण तो कराते रहे लेकिन ठेकेदार निर्धारित प्रपत्र पर रायल्टी का हिसाब तैयार कर रहे हैं या नहीं, इस पर ध्यान नहीं दिया। इन तीन सालों में रायल्टी की करोड़ों की धनराशि बकाया हो गई है। उधर, नगर निगम ने भी ठेकेदारों के करीब 60 करोड़ बकाया का भुगतान नहीं किया है। इस वजह से ठेकेदार नगर निगम के काम बंद कर भुगतान के लिए लगातार चक्कर काट रहे हैं।

कुछ समय पहले नगर निगम 90 ठेकेदारों को बमुश्किल तीन-तीन लाख रुपये दे पाया था। इधर, अब खनन विभाग के दबाव के बाद नगर आयुक्त ने बकाया रायल्टी का हिसाब तैयार करने का निर्देश दिया है। कई दिनों की माथापच्ची के बाद निर्माण कार्यों की फाइलें अवर अभियंताओं को दी गई हैं। वे निर्माण कार्यों में इस्तेमाल की गई रेत-बजरी और पत्थर की खपत और उस पर बनने वाली रॉयल्टी का आंकलन करेंगे।

ठेकेदारों के पास यदि खनन वस्तुओं के खरीदने का प्रपत्र 11 होगा तो उसे लगाएंगे। फाइल पर प्रपत्र का मिलान बार कोड से कर लेने की बात भी प्रमाणित करेंगे। इसके बाद फाइल एई, एक्सईएन और चीफ इंजीनियर की मेज से गुजरती नगर आयुक्त के पास पहुचेगी। जो ठेकेदार प्रपत्र 11 उपलब्ध नहीं करा पाएंगे, उन्हें रायल्टी के साथ पांच गुना पेनाल्टी भी भरनी होगी।

देना है 60 करोड़ और नगर निगम के पास पैसा है नहीं
ठेकेदारों ने पिछले दिनों कैंट विधायक संजीव अग्रवाल से मिलकर नगर निगम से अपना 60 करोड़ का बकाया भुगतान कराने की मांग की थी। उनका कहना था कि उन्होंने उधार लेकर निर्माण कार्य कराए थे, जिस पर ब्याज बढ़ता जा रहा है। उधर नगर निगम अपने खजाने में पैसा न होने के कारण ठेकेदारों का भुगतान करने में हाथ खड़े कर दिए। इस बीच बकाया रायल्टी का भी पेच फंस गया। अब स्थिति यह है कि न नगर निगम के पास ठेकेदारों को देने के लिए पैसा है न ठेकेदारों के पास रायल्टी अदा करने को। नगर आयुक्त का कहना है कि टैक्स की वसूली से जैसे-जैसे पैसा आएगा, वैसे-वैसे बकाया भुगतान कर दिया जाएगा।

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