ED के छापेमारी पर भड़की कांग्रेस, कहा- 'सरकार के इशारे पर काम कर रही है'
नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के साथ ही सारी सरकारी एजेंसियां सरकार के इशारे पर काम कर रही है और इसी आधार पर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस महाधिवेशन से ठीक पहले पार्टी के कई नेताओं के घरों और दफ्तरों पर सोमवार सुबह छापे मारे गये।
कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश और मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार ईडी का इस्तेमाल विपक्ष से प्रतिशोध लेने के लिए कर रही है। मोदी सरकार के इशारे पर ईडी ने पिछले आठ साल में 3010 छापे मारे हैं और इनमें 95 प्रतिशत से ज्यादा छापे विपक्षी दलों के नेताओं के यहां पड़े। यही नहीं, नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से 50 घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की गई। इसी तरह से पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और वर्तमान अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी घंटों तक पूछताछ की गई।
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— Congress (@INCIndia) February 20, 2023
उन्होंने कहा कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से बौखलाई भाजपा सरकार ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 24 से 26 फरवरी तक होने वाले पार्टी के महाधिवेशन से पहले ईडी ने आज सुबह पांच बजे से छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कई पदाधिकरियों, विधायकों, नगर निगमों के अध्यक्ष तथा पार्टी के अन्य कई नेताओं के घरों पर छापे मारे।
मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद विपक्षी दलों के घरों और कार्यालयों पर पिछले आठ साल में पड़े छापों का विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि इस दौरान ईडी ने तीन हज़ार से ज्यादा छापे मारे जबकि कांग्रेस के 2014 तक के कार्यकाल में एजेंसी ने 150 से भी कम छापे मारे। मौजूदा सरकार ने कांग्रेस नेताओं के घरों और कार्यालयों पर आठ साल में 24 बार, तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के ठिकानों पर 19 बार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेताओं पर 11बार , शिव सेना पर आठ बार, द्रमुक पर छह बार तथा राष्ट्रीय जनता दल एवं बहुजन समाज पार्टी पर पांच बार, वाईएसआर पर तीन, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी पर दो, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी पर दो तथा अन्य कई दलों के नेताओं के ठिकानों पर छापे मारे गये।
उन्होंने कहा कि कमाल की बात यह है कि भाजपा नेता हिमंत विश्व शर्मा, शुभेंदु अधिकारी, नारायण राणे, येदियुरप्पा जैसे कई नेताओं पर घोटालों के खुले आरोप लगे हैं लेकिन ईडी ने एक बार भी छापा नहीं मारा और आरोपी नेता भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की आंख के तारे बने हैं। सरकार की नीतियों की आलोचना करने वालों को निशाने पर लेने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने न्यायपालिका को भी मजबूर किया है इसलिए उसे भी प्रेस वार्ता करनी पड़ी है।
उनका कहना था कि खुद कानून मंत्री न्यायपालिका को लेकर तरह-तरह की टिप्पणी करते हैं। यहां तक कि उच्चतम न्यायालय पर भी राष्ट्र विरोधी ताकतों का हथियार बनने का आरोप लगाया गया है। उनका सवाल था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गौतम अडानी घोटाला मामले में जांच क्यों नहीं करवाते हैं।
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