Banda News : छत्रसाल संग्रहालय स्वयं इतिहास बन जायेगा, भूमाफियाओं ने करोड़ों में बेच डाली सरकारी जमीन

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बांदा में भूमाफियाओं ने करोड़ों में संग्रहालय की सरकारी जमीन बेच डाली।

बांदा में भूमाफियाओं के हौसले बढ़ते जा रहे है। भूमाफियाओं ने करोड़ों में संग्रहालय की सरकारी जमीन बेच डाली।

बांदा, अमृत विचार। मंडल मुख्यालय में स्थित छत्रसाल संग्रहालय दुर्दशा का शिकार है। यहां रखी बेशकीमती मूर्तियां गायब हो चुकी हैं। जो बची हैं वह धूल और मिट्टी में दबी हैं। संग्रहालय की पुस्तकों को दीमक चट कर रही है। कहने को तो सरकारी दस्तावेजों में महाराजा छत्रसाल संग्रहालय के नाम दर्ज 2 बीघे 17 बिस्वा जमीन दर्ज है, लेकिन मौके पर कुछ नहीं बचा है।

भूमाफियाओं ने कागजों में हेर-फेर करते हुए करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति बेचकर ठिकाने लगा दिया है और जो बची है उसमें बांस-बल्ली विक्रेताओं ने कब्जा कर रखा है। वह दिन दूर नहीं जब इतिहास को सहेजने वाला यह संग्रहालय खुद इतिहास बन जायेगा।

जिलाधिकारी आवास से चन्द कदम की दूरी पर शहर के मोहल्ला बिजलीखेड़ा में मुख्य मार्ग पर स्थित छत्रसाल संग्रहालय दुर्दशा का शिकार है। देखरेख के अभाव में संग्रहालय में रखी बेशकीमती मूर्तियां अब गायब हो चुकी हैं। अब यहां मूर्तियां बची हैं वह धूल और मिट्टी में दबी पड़ी हैं, जिन्हें पुन: संरक्षित करने के प्रयास नहीं किये गये। संग्रहालय में कभी सैकड़ों दुर्लभ किताबें उपलब्ध थीं, लेकिन संरक्षण न मिलने से इन किताबों को दीमक चाट गई।

जिन अलमारियों में यह किताबें सुरक्षित की गई थीं, वह भी टूट चुकी हैं। और तो और संग्रहालय का दरवाजा और खिड़की भी लोग उखाड़ ले गये। संग्रहालय भवन पूरी तरह से जर्ज हो चुका है। मरम्मत के अभाव में दीवार और छतों से प्लास्टर टूट चुका है। सरकारी दस्तावेजों में महाराज छत्रसाल संग्रहालय के नाम दर्ज 2 बीघे 17 बिस्वा जमीन वर्तमान में सिर्फ पुराने कागजों में दर्ज है। जबकि मौके पर कुछ नहीं बचा है।

भूमाफियाओं ने कागजों में हेर-फेर करते हुए करोड़ों रुपये की सरकारी सम्प्पत्ति का विक्रय भी कर दिया है। अब जमीन का जो हिस्सा बचा है, उस पर बांस-बल्ली विक्रेता अनाधिकृत रूप से कब्जा किये हुए हैं और एक माफिया किराये के रूप में उनसे धन वसूली कर रहा है।

जनप्रतिनिधियों ने की संग्रहालय की अनदेखी

ऐसा नहीं है कि संग्रहालय की दुर्दशा की जानकारी जनप्रतिनिधयों और प्रशासनिक अधिकारियों को न हो, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं देना चाहता। दूसरी तरफ प्रदेश के मुखिया ने हाल ही में नजदीक स्थित प्रताप चौराहे में महाराणा प्रताप की प्रतिमा का अनावरण किया। लोगों का कहना है कि शासन और प्रसासन को इस संग्रहालय पर ध्यान देना चाहिये। यदि इसे अब भी संरक्षित करने का प्रयास न किया गया तो जो कुछ मूर्तियां और बेशकीमती साहित्य यहां उपलब्ध है वह भी नहीं बचेगा।

संबंधित समाचार