बरेली: जेब पर रखते हैं नजर, इसलिए छोटू और मुन्ना किसी को पसंद नहीं
बरेली, अमृत विचार। राशन की दुकानों पर पांच और दो किलो के एलपीजी के सिलिंडरों को छोटू और मुन्ना नाम देकर बेचने की योजना नाकाम हो गई है। इन सिलिंडरों की बिक्री के जरिए कोटेदारों को उनकी आय बढ़ाने की आस बंधाई गई थी, लेकिन चूंकि इन सिलिंडरों के रेट कॉमर्शियल के बराबर तय किए गए हैं लिहाजा सरकारी राशन से पेट भरने वाले गरीब उपभोक्ता इन पर हाथ रखने को तैयार नहीं हैं। नतीजा यह है कि ये योजना न गरीबों को राहत देने का मकसद पूरा कर पाई और न कोटेदारों की आय बढ़ाने की।
खाद्य और रसद विभाग की ओर से इस प्रयोग के तहत राशन की दुकानों को मॉडल शॉप के तौर पर विकसित करने की घोषणा की गई थी। इस क्रम में जिले की 75 राशन की दुकानों को मॉडल शॉप घोषित कर उन पर छोटे एलपीजी गैस सिलिंडरों की बिक्री शुरू करने का विभागीय आदेश जारी किया गया था। पिछले साल अक्टूबर में राशन की दुकानों पर इन सिलिंडरों की बिक्री शुरू हो गई। लोगों को लुभाने के लिए इन सिलिंडरों का नाम छोटू और मुन्ना रख दिया गया लेकिन फिर भी राशन उपभोक्ताओं ने इसे घाटे का सौदा माना और खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
पूर्ति विभाग के अफसरों का भी यही मानना है कि महंगा होने की वजह से छोटू और मुन्ना को खरीदने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। दरअसल पांच किलो के छोटू एलपीजी सिलिंडर के कनेक्शन की कीमत 1549 रुपये रखी गई है। खाली होने के बाद इसे कोटेदार की दुकान पर ही रिफिल कराना पड़ेगा और इसके लिए 545 रुपये चुकाने पड़ेंगे। दो किलो के मुन्ना सिलिंडर की रिफिलिंग का रेट भी 220 रुपये है। दोनों सिलिंडरों की रिफिलिंग का यह रेट कॉमर्शियल सिलिंडरों के लगभग बराबर है। इन्हें रिफिल कराने के लिए एलपीजी का लगभग 110 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मूल्य चुकाना पड़ेगा। इसी कारण कोई इन्हें खरीदने को तैयार नहीं है।
पांच महीने से किसी दुकान पर सिलिंडर या रिफिलिंग की एक भी मांग नहीं
जिले में सरकारी सस्ते राशन की लगभग 1800 दुकानें हैं। इनमें 75 दुकानों का छोटे एलपीजी सिलिंडरों की बिक्री के लिए चयन किया गया है। खाद्य एवं रसद विभाग का दावा था कि इससे न सिर्फ कोटेदारों की आय बढ़ेगी बल्कि गैस की कम खपत करने वाले उपभोक्ताओं को भी सुविधा मिलेगी। हर दुकान पर 5-5 सिलेंडर रखवाए गए थे। इनमें इक्का-दुक्का सिलेंडर ही बिके। पांच महीनों से किसी भी दुकान पर रिफलिंग या फिर नए सिलिंडर की एक भी मांग नहीं आई। प्रति सिलिंडर कोटेदार के लिए 45 रुपये का कमीशन रखा गया था। अधिकारियों का कहना है कि छोटू और मुन्ना की बिक्री बढ़ाने की कोशिश जारी है ताकि कोटेदारों को अतिरिक्त आय हो सके।
जिले की 75 दुकानों को मॉडल शॉप के तौर पर चयनित कर पांच किलो और दो किलो के एलपीजी सिलिंडरों को बिकवाना शुरू कराया था। कुछ दुकानों पर सिलिंडर बिके लेकिन रिफलिंग की मांग कम है। इनकी बिक्री बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।-नीरज सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी
ये भी पढे़ं- बरेली: रात में चेकिंग कर अवैध खनन में लगे तीन डंपर पकड़े
