जलालाबाद: कागजों में हो रहा टीकाकरण, नौनिहाल और गर्भवतियां परेशान
मुकीम हुसैन, जलालाबाद। शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रेगुलर टीके लगवाना भी टेढ़ी खीर है क्योंकि यहां टीकाकरण सिर्फ कागजों पर किया जा रहा है। धरातल पर स्वास्थ्य विभाग का काम शून्य है। यहां के परिवार सेवा केंद्र के बाहर भीड़ इकट्ठा तो होती है मगर स्वास्थ्यकर्मियों के न आने से लोग …
मुकीम हुसैन, जलालाबाद। शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रेगुलर टीके लगवाना भी टेढ़ी खीर है क्योंकि यहां टीकाकरण सिर्फ कागजों पर किया जा रहा है। धरातल पर स्वास्थ्य विभाग का काम शून्य है। यहां के परिवार सेवा केंद्र के बाहर भीड़ इकट्ठा तो होती है मगर स्वास्थ्यकर्मियों के न आने से लोग मायूस लौट जाते हैं। यदि यही हाल रहा तो क्षेत्र में कब कौन सी बीमारी विकराल रूप धारण कर ले कुछ नहीं कहा जा सकता जिसके फलस्वरूप एक बड़ी जनहानि होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
मामला उत्तर प्रदेश जिला शाहजहांपुर के जलालाबाद का है जहां लगभग पांच साल से नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण न होना क्षेत्रीय लोगो के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। नगर के मुख्य बाजार में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जलालाबाद से संचालित परिवार सेवा केंद्र बना हुआ है। जहां गर्भवती महिलाओं और 5 साल तक के बच्चो का टीकाकरण किया जाता है मगर यह केंद्र पिछले लगभग 5 माह से बंद है जिससे लोग इधर उधर भटकने को मजबूर हैं।
प्रत्येक शनिवार और बुधवार को परिवार सेवा केंद्र पर तैनात एएनएम सोनी और नेहा कश्यप पर टीकाकरण करने की जिम्मेदारी है मगर फिर भी जलालाबाद नगर के लोगो को टीकाकरण नही किया जा रहा है और पीपीसी पर कोई नोटिस बोर्ड भी नहीं लगा है। नोटिस बोर्ड न होने से लोग वहां बैठ कर स्वास्थ्यकर्मियों का घण्टों इतजार करते रहते हैं। चिकित्साधीक्षक डॉ. ओमेंद्र राठौर ने बताया कि अप्रैल और मई माह में लॉकडाउन के कारण पीपीसी बन्द थी उसके बाद पीपीसी पर टीकाकरण किया गया मगर कंटेनमेंट जोन के कारण पुनः पीपीसी बन्द करनी पड़ी।
जन्माष्टमी के अवकाश के कारण पीपीसी बंद है। टीकाकरण लगातार कराया जा रहा है। कंटेनमेंट ज़ोन के कारण पीपीसी बंद रहने से यदि टीकाकरण प्रभावित हुआ है तो वंचितों को चिन्हित कर विशेष अभियान चलाकर टीकाकरण किया जाएगा। -डॉ. लक्ष्मण सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी, शाहजहांपुर
अस्पताल में भी नहीं उपलब्ध हैं सुविधाएं
पीपीसी पर स्वास्थ्यकर्मियों का इंतजार कर रहे यूसुफजई निवासी फिरोज ने बताया कि उनकी पत्नी गर्भवती है जिसका जच्चा बच्चा कार्ड बनवाने के लिए वह लगभग 2 महीने से पीपीसी के चक्कर लगा रहे हैं मगर अब तक उनकी पत्नी का कार्ड नहीं बन सका, पीपीसी पर ताला लटका मिलता है। अस्पताल जाने पर पीपीसी पर वापस भेज दिया जाता है। अब तक तीन बार अस्पताल भी जा चुके है मगर सिवाय मायूसी के अब तक कुछ भी हाथ नहीं लगा।
बन्द रहता है एएनएम का फोन
पीपीसी पर खड़ीं सलमा, किरन, अंकिता और नेहा ने बताया कि वह कई दिन से टीकाकरण के लिए पीपीसी आ रही हैं मगर ताला देख कर बैरंग लौट जाती हैं। एएनएम बहन न तो पीपीसी पर मिलती हैं न ही मोहल्ले में आ रही हैं फोन करने पर उनका फोन भी स्विच ऑफ मिलता है। जिस कारण उन्हें बच्चों की बीमारियों का डर सताता रहता है।
टीकाकरण न होने से जा चुकी है 18 बच्चों की जान
लगभग तीन वर्ष पूर्व क्षेत्र के गांव मनोरथपुर सहसोवारी में एक रहस्यमयी बीमारी से एक ही माह में एक के बाद एक 18 बच्चों की मौत हो गई। शुरुआती चार पांच मौतों तक ग्रामीण शांत रहे मगर उसके बाद एक साथ दो बच्चो की मौत होने पर ग्रामीणों ने चिकित्साधिकारियों से मदद की गुहार लगाई मामले की जांच होने पर बच्चो में डिफ्थीरिया नामक बीमारी का पता चला जो कि टीकाकरण न होने के कारण हुई थी। लगभग एक माह में 18 बच्चों की मौत से गांव में सब तरफ मातम छा गया था जिसका गम गांव वाले अब तक भुला नहीं पाए हैं।
ग्रामीण अंचल भी टीकाकरण से महरूम
जलालाबाद के गांव पलहरई से पुत्री मनकीरत कौर को लेकर आये कुलदीप सिंह ने बताया कि वह और उनकी पत्नी राजवेंद्र कौर बच्चे को टीका लगवाने के लिए परेशान हैं। गांव में एएनएम बहन के न पहुंचने के कारण आज वो उसे लेकर जलालाबाद पीपीसी पर आये मगर यहां भी ताला पड़ा हुआ है। बेटी का टीका कब और कहां लगेगा इस बात को लेकर परेशान हैं। वहीं गौसनगर निवासी शहनाज टीकाकरण के लिए पीपीसी पर आईं थीं मगर केंद्र बन्द होने के कारण उन्हें भी बैरंग लौटना पड़ा।
मोहल्ला नौसारा निवासी शिवा ने बताया कि शादी के बाद उनकी पत्नी रुवी पहली बार गर्भवती हुई है वो पिता बनने का सुख अनुभव कर रहा है पत्नी की अतिरिक्त देखभाल के लिए स्वयं समय निकालता है। मगर रेगुलर मेडिकल चेकअप के लिए वो कई बार पीपीसी और अस्पताल के चक्कर लगा चुका है मगर अब तक उसका कार्ड तक नहीं बन सका है। वह पत्नी और होने बाले बच्चे की स्वास्थ्य चिंता में डूबा रहता है। वहीं आजादनगर निवासी सोरन सिंह ने बताया कि वह भी पत्नी के टीकाकरण के लिए आये थे मगर पीपीसी बन्द रहती है एएनएम के घर जाने पर उन्होंने टरका दिया।
कंटेनमेंट जोन सिर्फ़ बहाना होम्योपैथ हॉस्पिटल खुल रहा
राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय और परिवार सेवा केंद्र एक ही बिल्डिंग के दो अलग अलग कमरों में संचालित है जहां एक तरफ होम्योपैथिक अस्पताल लगातार लोगो का इलाज कर दवा बांट रहा है। वहीं परिवार सेवा केंद्र के स्वास्थ्यकर्मी कंटेनमेंट ज़ोन का बहाना कर केंद्र पर ताला लटकाए हुए हैं।
