बरेली: ‘हम डीजीपी की भी नहीं सुनते, तुम तो फरियादी हो’

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ओमेन्द्र सिंह, बरेली। खाकी और खादी के गठजोड़ के चलते लोगों को थाना स्तर पर न्याय नहीं मिल पाता है। यही वजह है कि प्रतिदिन पुलिस अधिकारियों के यहां सैकड़ों की संख्या में लोग शिकायती पत्र लेकर पहुंचते हैं। उन्हें उम्मीद रहती है कि बड़े साहब के यहां से न्याय मिल जाएगा। लेकिन हकीकत इससे …

ओमेन्द्र सिंह, बरेली। खाकी और खादी के गठजोड़ के चलते लोगों को थाना स्तर पर न्याय नहीं मिल पाता है। यही वजह है कि प्रतिदिन पुलिस अधिकारियों के यहां सैकड़ों की संख्या में लोग शिकायती पत्र लेकर पहुंचते हैं। उन्हें उम्मीद रहती है कि बड़े साहब के यहां से न्याय मिल जाएगा। लेकिन हकीकत इससे जुदा है। अधिकारी उसी थाने के लिए जांच लिख देते हैं, लेकिन थानों में बैठे विवेचक डीजीपी तक की बात को हवा में उड़ा देते हैं।

यही वजह है कि जिले के 3176 लोगों को आठ माह बाद भी न्याय नहीं मिल सका है। अब पुलिस के प्रदेश स्तरीय अधिकारियों से लेकर जिला स्तरीय अधिकारियों ने दोबारा थानों को रिमाइंडर भेजा है। जिससे लोगों को न्याय मिल सके।

जिले के थानों से फरियादियों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। इसकी वजह है कि थाना स्तर पर राजनीति के कारण सिफारिशों के चलते पुलिस कर्मी जानते हुए भी ठोस कदम नहीं उठा पाते हैं, जबकि कहीं रिश्वत का लालच ऐसा करने से रोका देता है। यही वजह है कि न्याय के लिए अधिकारियों की चौखट पर जिले के 3176 लोग हाजिरी लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है। वहीं आरोपी पक्ष दबंगई से खुलेआम घूम रहे हैं। ऐसे ही कई मामले हैं।

जिले भर के थानों में डीजीपी स्तर से 295, एडीजी स्तर से 515, डीआईजी स्तर से 605, डीएम स्तर से 678 और एसएसपी स्तर से 1083 शिकायतें थानों में निस्तारण के लिए भेजी गई हैं। ऐसा नहीं है कि इन शिकायतों के निस्तरण के लिए अधिकारियों की ओर से पहली बार निर्देश मिले हों, कई बार निर्देश मिले। लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया। यही वजह है कि अब तक लोग इधर उधर भटक रहे हैं।

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