बरेली: त्योहारों पर कैसे करें असली मावा की पहचान, एक बूंद से खुल जाएगा सारा राज
एक बूंद टिंचर आयोडीन कर देगा असली नकली की पहचान
विकास यादव/ बरेली, अमृत विचार। होली का पर्व नजदीक आ चुका है। ऐसे में मावा की डिमांड बढ़ जाती है। होली के पर्व में पकवान बनाने के लिए मावा का ज्यादा उपयोग किया जाता है। बाजार में इसकी डिमांड बढ़ते ही मावा में मिलावट करने वाले मिलावटखोर सक्रिय हो जाते है। कई तरह से मावा में मिलावट का खेल किया जाता है। नकली मावा बनाने वाले शकरकंद, सिंघाड़े का आटा, आलू, मैदा और डालडा घी आदि मिलाकर मिलावटखोर मोटा मुनाफा कमाने के लिए लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करते हैं। जिसको रोकने में खाद सुरक्षा एव औषधि विभाग नाकाम रहता है।
नकली मावा बनाने वाले शकरकंद, सिंघाड़े का आटा, आलू और मैदा का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा मावे में घटिया किस्म का सॉलिड मिल्क, टेलकम पाउडर, चॉक और सफेद केमिकल की मिलावट मावा लड्डू के लिए की जाती है। इसलिए बाजार से खरीदारी करते समय पूरी पड़ताल कर लें। मावा का वजन बढ़ाने के लिए स्टार्च और आलू मिलाया जाता है।

लेकिन इस मिलावट के खेल में किस तरह से इससे बचा जा सकता है और असली मावे की पहचान की जा सकती है। इसका बहुत ही आसान तरीका है। कुतुबखाना बाजार में मावा का काम करने वाले दुकानदार इसके लिए टिंचर आयोडीन की एक बूंद मावा में मिलाते है। अगर मावा असली होता है तो टींचर का रंग नहीं बदलता है वह पीले रंग में रहता है। अगर मावे में जरा भी अरारोट या अन्य किसी प्रकार की मिलावट रहती है तो तुरंत ही मावा में पड़ा टींचर उसे काला कर देता है।
नकली मावा-खोया की ऐसे करें पहचान
पूरन स्वीट के महेश गुप्ता ने बताया कि किस तरह से वह नकली मावे की पहचान करते हैं। इसके लिए मावा या खोया को अपने अंगूठे के नाखून पर रगड़ें, अगर यह असली है तो इसमें से घी की महक आएगी और खुशबू देर तक रहेगी। खोया को हथेली पर गोली बनाएं। फटने लग जाए तो समझिए मावा नकली है या फिर इसमें मिलावट है। दो ग्राम मावा का पांच मिली लीटर गरम पानी में घोल बनाकर ठंडा कर लें। इसके बाद आयोडीन सॉल्यूशन डालें। रंग नीला हो जाए तो मावा नकली है। मावे में चीनी डालकर गरम करने पर अगर यह पानी छोडऩे लगे तो मावा नकली है। असली मावा खाने पर कच्चा दूध जैसा हो जाएगा। विश्वसनीय दुकान से मावा खरीदें। मावा असली है तो वो चिपचिपा नहीं होगा। दो दिन पुराना मावा न खरीदें।

तीन प्रकार का होता है मावा
बट्टी मावा, चिकना मावा और दानेदार मावा। बट्टी मावा काफी कड़ा जमा हुआ रहता है। दानेदार मावे में रेशे टाइप के होते हैं। बाजार में इसकी ज्यादा डिमांड रहती है। इस समय बाजार में मावा तीन सौ रुपये किलो तक बिक रहा है। होली की तरफ दूध के रेट ज्यादा होने के कारण चार सौ रुपये किलो तक बिकने की उम्मीद जताई जा रही है। बरेली में इस मावा जिला बदांयू के गंडा, कुकरैली, कुकरी अमरोली दूनी आदि दर्जन गावों से बिक्री के लिए आ रहा है। गंगा पार के गौसगंज, बनारा, जंझरी, तिरकुनिया आदि गांवों से आ रहा है।
बाजार में पसरा संन्नाटा
शहर की कुतुबखाना मावा मंडी की अपनी अलग ही पहचान है। किसी समय में अन्य जिलों से लोग यहा पर मावा खरीदने आते थे। लेकिन अब यहा पर सन्नाटा है। मावा मंडी के दुकानदारों ने बताया कि बाजार पूरी तरह ठंडा पड़ा हुआ है। मोहल्लो में छोटी डेयरियों के खुलने से बाजार में खरीदार नहीं है।
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