Kanpur Weather Today : फरवरी के मुकाबले मार्च में दोगुनी गति से बढ़ेगी गर्मी, मौसम विभाग ने जताई यह आशंका
Kanpur Weather Today कानपुर में फरवरी के मुकाबले मार्च में दोगुनी गति से गर्मी बढ़ेगी।
Kanpur Weather Today कानपुर में फरवरी के मुकाबले मार्च में दोगुनी गति से गर्मी बढ़ेगी। इस महीने भी गर्मी कई रिकॉर्ड बनाएगी। मौसम विभाग ने भीषण गर्मी की आशंका जताई।
कानपुर, अमृत विचार। Kanpur Weather Today मार्च में जून वाली गर्मी सहने के लिए आप तैयार हो जाइए। मौसम विभाग कुछ इसी तरह की भविष्यवाणी कर रहा है। मौसम विभाग की मानें तो इस महीने फरवरी के मुकाबले दो गुनी तेजी से गर्मी बढ़ेगी। भीषण गर्मी का असर पहले सप्ताह से ही दिखना शुरू हो सकता है। इस सप्ताह तापमान 35 और दूसरे सप्ताह 40 का आंकड़ा पार कर सकता है। ऐसा होता है तो दो महीने पहले ही इतनी गर्मी पड़ने का यह रिकार्ड भी कानपुर के मौसम इतिहास में पहली बार दर्ज किया जाएगा।
वर्ष 2023 की गर्मी के तेवर बड़े रिकार्ड बनाने के लिए तैयार लग रही है। मौसम विभाग इसी तरह के संकेत दे रहा है। मौसम विभाग के अनुसार फरवरी महीना सर्दी के हिस्से में आता है, लेकिन जिस प्रकार से गर्मी रही, उसने जैसे इस महीने को ग्रीष्म ऋतु में शामिल कर लिया हो। फरवरी में कई वर्षों के रिकार्ड टूटे। मौसम विभाग के पास मौजूद 52 साल के रिकार्ड में ऐसा पहली बार हुआ, जब फरवरी में 11 बार पारा तीस या तीस के पार पहुंच गया हो।
फरवरी में ही मौसम ने अपने तेवर से यह साफ कर दिया कि मार्च में गर्मी और भीषण हो सकती है। मौसम से मिल रहे संकेत के अनुसार इस बार पहले सप्ताह 35 और दूसरे सप्ताह 40 डिग्री सेल्यिसस तक तापमान हो सकता है। ऐसा होता है तो यह भी बड़ा रिकार्ड होगा, जो फिलहाल अब तक के 52 सालों में नहीं रहा है।
भीषण गर्मी की वजह है अलनीनो
सीएसए विवि के मौसम विज्ञानी डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि अल नीनो प्रशांत महासागर में आने वाला एक तरह का मौसमी परिवर्तन या बदलाव है। इसकी वजह से सर्दियों में गर्मी और गर्मी में और जायदा गर्मी रहती है। वहीं, बारिश की संभावना भी कम हो जाती है। फरवरी के महीने में भी पहली बार इतनी गर्मी का रिकार्ड दर्ज किया गया। इसकी वजह भी अलनीनो है, जिस वजह से बर्फबारी और बारिश कम हुई।
सूखे के संकेत से किसान चिंतित
मौसम विज्ञानी डॉ. पांडेय बताते हैं कि इस बार भीषण गर्मी और बारिश नहीं होने के संकेत के कारण सूखे की आशंका लग रही है। ऐसे में जरूरी है कि संसाधनों के माध्यम से खेत और फसलों में नमी देते रहें, जिससे मौसम प्रभावित न करे।
