Holi 2023 : नकारात्मक ऊर्जा पर देसी-घी और कपूर का होगा वार, आज शाम 4:17 बजे से पूर्णिमा शुरू, जानें- होलिका दहन का समय
कानपुर में जगह-जगह होलिका दहन के लिए रखी गई लकड़ियां।
कानपुर में जगह-जगह होलिका दहन के लिए रखी गई लकड़ियां। इसके साथ ही बाजारों में भी लोगों की भीड़ दिखने लगी है। वहीं, बाजार में इस बार योगी-मोदी वाली पिचकारियां भी आई है।
कानपुर, अमृत विचार। होली पर इस बार लोग घरों में देसी घी, कपूर और लौंग की खुशबू महकाकर नकारात्मक ऊर्जा को भगाने के लिए तैयार हैं। इन दिनों में होली पर्व पर इन सामग्रियों की खूब बिक्री हो रही है। व्यापारियों का कहना है कि हर साल के मुकाबले इस बार कपूर की बिक्री 40 फीसद तक बढ़ी है।
मान्यता है कि होली पर्व पर लोग अशुत्रियों, नकारात्मक विचारों और बुराइयों का दहन भी करते हैं। इसी उद्देश्य को और वास्तविक रूप देने के लिए सोशल मीडिया और तमाम जानकारों के माध्यम से अक्सर लोगों को होली पर्व पर अक्सर देसी-घी में कपूर और लॉन्ग जलाने को भी प्रेरित किया जाता है। कोरोना काल के बाद से लोगों में इसको लेकर काफी जागरूकता आई है। बाजार में जिस तरह कपूर की बिक्री बढ़ी है, उससे लोगों के इस बार घर में कपूर जलाकर घर महकाने और नकारात्मक ऊर्जा को भगाने को लेकर जागरूकता दिख रही है।
पी-रोड के किराना स्टोर के मालिक रमेश कुमार गुप्ता बताते हैं कि पिछले साल के मुकाबले कपूर, घी और लॉन्ग की बिक्री चालीस फीसद तक बढ़ी है। दुकान में पिछले साल की बिक्री को देखते हुए ही कपूर का स्टॉक किया था, लेकिन बिक्री बढ़ती देख दोबारा कपूर का ऑर्डर दिया, जिससे पूर्ति हो सके। उधर नवाब गंज के रोध श्याम अग्रवाल बताते हैं कि उनकी दुकान में कपूर की बिक्री इस बार ज्यादा हो रही है। पिछले साल भी बढ़ थी, लेकिन इस बार उससे भी ज्यादा बढ़ी है।
क्या हैं अध्यात्मिक कारण
- घर में कपूर जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है
- इससे घर में खुशहाली बनी रहती है
- प्रतिदिन उपले पर कपूर जलाकर दिखाने से बुरी शक्तियों का आगमन नहीं होता
- बुरी नजर से बचाव होता है
- यदि पितृदोष और देवदोष को शांत करना हो तो कपूर जलाना चाहिए
- कपूर जलाने से ईश्वर प्रसन्न होते हैं
- रात को सोते समय शयनकक्ष व घर में कपूर जलाना चाहिए।
क्या हैं वैज्ञानिक कारण
- कपूर जलाने के कई तरह के बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं
- कपूर जलाने से वायुमंडल शुद्ध होता है
- हानिकारक बैक्टिरिया के संपर्क में आने से बच सकते हैं
- ऐसा करने से बीमारियों से बचा जा सकता है
- कपूर जलाने के वातावरण में एक सौंधी खुशबू बिखर जाती है
- इससे मानसिक शांति का अनुभव भी होता है
- कफ, मांसपेशियों में खिंचाव, गर्दन में दर्द, आर्थराइटिस आदि बीमारियों से राहत में कपूर कारगर है
- कपूर के तेल का प्रयोग बहुत ही लाभदायक माना जाता है
गन्ना हुआ 40 रुपये का
- होली को देखते हुए बाजार में गुन्नों के लिए भी काफी फड़ लग गए हैं। नवाबगंज, पी-रोड, रावतपुर, काकादेव, कल्याणपुर, गोविंद नगर, किदवई नगर, रेल बाजारा, घंटाघर, बड़ा चौराहा, फूलबाग आदि बाजार में गन्ने की कीमत भी उछाल मार गई है। इस समय एक गन्ना 40 रुपये का बिक रहा है।
अपने फेवरेट हीरो को पिचकारी में देख खिलखिलाए बच्चे
- बाजार में इन दिनों बच्चों के फेवरेट हीरो के प्रिंट के साथ पिचकारी आई हैं। हर साल के मुकाबले इस बार इस प्रकार की पिचकारियों की संख्या ज्यादा है। छोटा भीम से लेकर सुपरमैन, स्पाइडर मैन और अन्य सुपर हीरों के प्रिंट के साथ उसको और ज्यादा आकर्षक बनाया गया है। बाजार में आने वाले बच्चे जैसे ही इन पिचकारियों को देखते हैं, बड़ों को खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। साथ ही इस बार चेहरे को रंग से बचाने के लिए मास्क भी आए हैं। शेर के मास्क सबसे ज्यादा पंसद किए जा रहे हैं।
रंगों की खरीदारी बढ़ी
- बाजार में रंगों की खरीदारी बढ़ गई है। गुलाल की खरीद सबसे ज्यादा हो रही है। अच्छी बात यह है कि ग्राहक इन दिनों हर्बल कलर की बिक्री ज्यादा हो रही है। दुकानदार सुरेश कुमार बताते हैं कि ग्राहक रंगों की खरीदारी करने के दौरान सीधे हर्बल कलर की मांग करता है। इस बार सिंथेटिक और मिलावटी रंगों से लोग बच रहे हैं।
आज शाम 4:17 बजे से पूर्णिमा शुरू, लेकिन होली जलेगी कल
पूर्णिमा में होली दहन को शुभ माना जाता है। परंपरागत ढंग से इसी मुहुर्त में होली जलाई जाती है। लेकिन, इस बार ऐसा नहीं हो सकेगा। इसकी बड़ी वजह भद्रा शुरू होना है। अधिकतर ज्योतिषाचार्यों का मत है कि सोमवार की शाम 4:17 बजे से पूर्णिमा शुरू हो जाएगी, लेकिन इसी समय से भद्रा भी शुरू होने से होली का दहन मंगलवार की शाम मुह़ुर्त के अनुसार शाम 6:12 से रात 8:39 बजे तक ही शुभ माना जा रहा है।
ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि इस बार अनेक दुविधाओं के बीच होलिका दहन सात मार्च को होगा। आठ मार्च को होली खेली जाएगी। उन्होंने बताया कि पूर्णिमा तिथि की शुरुआत छह मार्च को शाम चार बजकर 17 मिनट पर होगी और इसका समापन सात मार्च को शाम छह बजकर नौ मिनट पर होगा। इसके साथ ही छह मार्च को ही भद्रा की शुरुआत शाम चार बजकर 17 मिनट पर हो जायेगी, जोकि सात मार्च को प्रात: काल पांच बजकर 15 मिनट तक रहेगी।
भद्रा काल में होलिका दहन नहीं होता। माना जाता है कि इस काल में अगर होलिका दहन किया जाता है तो इसका काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए तिथि की भूमिका अहम हो जाती है। ज्योतिषाचार्यों के मतों के अनुसार इस बार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त मंगलवार (सात मार्च) को शाम छह बजकर 12 मिनट से रात आठ बजकर 39 मिनट तक रहेगा ।
होलिका दहन के साथ मिलेगी शनि दोष से मुक्ति
- पंडित मनोज द्विवेदी बताते हैं कि वैदिक शास्त्रों अनुसार होलिका की रात्रि के समय पूजा करने से जिस भी जातक की कुंडली में व्याप्त दोष होते हैं, उन्हें कम किया जा सकता है। इसके साथ ही होलिका की पूजा कर व्यक्ति शनि दोष और पितृ दोष को भी दूर कर सकता है। होलिका दहन पर गन्ना भूनने और अग्नि की परिक्रमा करने से दोष दूर होते हैं। होलिका की परिक्रमा से जातक की ग्रह बाधा भी दूर होती है।
होलिका पूजन में इन सामग्रियों का काफी महत्व
- ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि होली पूजन के दौरान पूर्व या उत्तर की ओर दृष्टि करते हुए बैठें और पूजन की थाली में पूजा समाग्री ले लें। इसमें रोली, पुष्प, माला, नारियल, कच्चा सूत, साबूत हल्दी, मूंग, गुलाल और पांच तरह के अनाज, गेहूं की बालियां व एक लोटा जल होना चाहिए।
