महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए नीति जरूरी : डॉ. रंगराजन
लखनऊ, अमृत विचार। प्राचीन काल में विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को सही पहचान नहीं मिल पाई है। अनुसंधान एवं विकास क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी 17 फीसदी तक ही समित है, जिसमें सिर्फ 14 फीसदी महिलाएं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कार्यरत हैं। यह बातें शुक्रवार को सीएसआईआर-एनबीआरआई में 'जेंडर एंड साइंस: नेवीगेटिंग दी इंटरसेक्शन' विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में सीडीआरआई की निदेशक डॉ. राधा रंगराजन ने कही।
उन्होंने कहा कि भारतीय विज्ञान क्षेत्र में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक उचित नीति एवं प्रणाली की त्वरित आवश्यकता है। महिलाओं की प्रगति एवं उनके भविष्य के साथ होने वाले पक्षपात के प्रति हमे सजग रहना होगा। आमतौर पर देखा जा रहा है कि महिलाओं की सामाजिक जिम्मेदारी अधिक होती है। जिसमे पुरुषों को अपना योगदान देकर महिलाओं के आगे बढ़ने में मदद करनी चाहिए, जिससे महिलाओं को बेहतर वातावरण मिल सके और वह अपने बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के साथ भविष्य में प्रगति कर सकें।
कार्यक्रम की शुरूआत में मुख्य अतिथि का परिचय कराते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. एके शासनी ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है, जहां नारी के विभिन्न देवी स्वरूपों की पूजा की जाती है। वहीं दूसरी ओर वास्तविक जीवन में अभी भी इन मूल्यों को अपनाने से हम दूर हैं। हमारे जीवन में नारी का प्रभाव विभिन्न स्वरूपों जैसे माता, बेटी, पत्नी आदि में देखने को मिलता है। संस्थान की वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ.मेहर आसिफ ने बताया कि संस्थान द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अंतर्गत तीन से से 10 मार्च के मध्य विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस मौके पर संस्थान में कार्यरत महिला वैज्ञानिक व कर्मचारी उपस्थितर रहे।
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