प्रयागराज: मुस्लिम हॉस्टल सील, हलकान हो रहे 167 छात्र, कल से शुरू होगी यूनिवर्सिटी में परीक्षा
छात्रों के दस्तावेज हॉस्टल के कमरे में ही बंद, रेलवे स्टेशन पर गुजार रहे रात
अमृत विचार, प्रयागराज। प्रयागराज में 24 फरवरी को दिनदहाड़े उमेश पाल हत्या किये जाने के बाद मुस्लिम हॉस्टल को सील कर दिया गया था। जिससे छात्रों की समस्याएं बढ़ गई हैं। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में कल यानी 13 मार्च से परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। ऐसे में कुछ छात्र तैयारी करने के बजाय स्टेशन पर पड़े हैं, तो कुछ डीएम आवास के सामने धरने पर बैठे हैं। उनका पूरा सामान हॉस्टल के कमरे में ही कैद है। वहीं, दूसरी तरफ इलाहाबाद यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि इस हॉस्टल से हमारा कोई संबंध नहीं।
बता दें कि जिन 100 से ज्यादा छात्रों ने पिछले महीने 12 से 18 हजार रुपए हॉस्टल फीस के रूप में दिया वो अब बेसहारा हैं। हॉस्टल में 107 कमरे है। छात्रों के सामान के साथ पूरा कमरा सील किया गया है। यह कार्रवाई एक दिन की नोटिस पर की गई। उमेश पाल का मर्डर धूमनगंज की जयंतीपुर कॉलोनी में 24 फरवरी को हुआ। जांच शुरू हुई तो इस हत्याकांड के तार मुस्लिम हॉस्टल के कमरा नंबर 36 से मिले। 27 फरवरी को हॉस्टल के इसी कमरे में अवैध रूप से रह रहे हाईकोर्ट के वकील सदाकत खान को गिरफ्तार कर लिया गया।
इसके बाद जिला प्रशासन ने 5 मार्च को हॉस्टल के बाहर नोटिस चस्पा की और 6 मार्च को हॉस्टल को पूरी तरह से सील कर दिया गया। होली की छुट्टी के कारण ज्यादातर छात्र घर गए थे। ऐसे में उन्हें अपना सामान निकालने का भी वक्त नहीं मिला।इस वक्त हॉस्टल में 107 कमरे हैं। इसमें कुल 194 छात्र रहते थे। इसमें 167 छात्र ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले महीने ही 12 से 18 हजार रुपए तक की फीस जमा की थी। बाकी 27 ऐसे छात्र थे, जिन्होंने फीस जमा नहीं की लेकिन अवैध रूप से हॉस्टल में ही रह रहे थे। इसमें सदाकत खान भी शामिल था। जो कमरा नंबर 36 में रह रहा था।
रामबाग स्टेशन पर सोने को मजबूर छात्र
कुशीनगर के इरफान अली इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से एमएससी कर रहे हैं। मुस्लिम हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 15 फरवरी को ही हॉस्टल अलॉट हुआ था। 27 फरवरी तक मेरी परीक्षा हुई और फिर मैं घर चला गया। होली त्यौहार के बाद वापस लौटा तो गेट के अंदर ही नही जाने दिया गया। मेरा सारा सामान कमरे में ही है। मैं क्या करूं, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा। 5 दिन से हमारे साथी रामबाग रेलवे प्लेटफॉर्म पर सोने को मजबूर हैं। वही बलरामपुर के सलमान अली यूनिवर्सिटी से एमए कर रहे हैं। हॉस्टल के कमरा नंबर 7 में रहते हैं। छात्र मुस्लिम बोर्ड ट्रस्ट के अध्यक्ष बरकत अली के घर के बाहर भी धरना कर चुके हैं। हॉस्टल को सील करने में जितना योगदान प्रशासन का है उतना ही हॉस्टल प्रशासन का भी है। पिछले महीने बरकत अली जी ने खुद ही हॉस्टल बंद करने के लिए लेटर लिखा था।
हॉस्टल के बजाय होटल में रखने की बात
हॉस्टल के सील किए जाने के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल मो. आमिर ने कहा हॉस्टल प्रशासन अब कह रहा कि आप लोगों को प्रयागराज रेलवे स्टेशन के पास की अब्दुला मरकज होटल में रखा जाएगा। आखिर वहां छात्र कैसे पढ़ाई करेंगे। छात्र ने तो हॉस्टल में रहने का पैसा दिया है। यहां उसे एक माहौल मिलता है। फिर उसे तो इसी जनवरी-फरवरी महीने में हॉस्टल मिला। अब अगर कह दिया जाए कि होटल में रहो या फिर ईद के बाद आओ तो फिर वह पढ़ाई कब करेगा।
पूरा हॉस्टल सील करवाने की गलती
हॉस्टल के सुपरिटेंडेंट इरफान अहमद बताया कि जिला प्रशासन को हमने जो लिस्ट दी उसके मुताबिक 167 छात्र ऐसे थे, जिन्होंने यहां फीस जमा की थी। 27 छात्र ही ऐसे थे जो बिना फीस दिए यहां रह रहे थे। यूनिवर्सिटी से कोई संबंध नहीं होने की बात पर वह कहते हैं कि यहां रहने वाला छात्र यूनिवर्सिटी में ही पढ़ रहा है, तो फिर यूनिवर्सिटी प्रशासन कैसे कह सकता है कि उसे इस हॉस्टल से मतलब नहीं।
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