बरेली: मंझा में भी मुश्किल... रेत पर नहीं रख पाएंगे वानिकी विश्वविद्यालय की बुनियाद

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Edited By Amrit Vichar
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आर्किटेक्ट्स की टीम ने मंझा में ग्राम्य वन का किया सर्वे, रेतीली जमीन पर विश्वविद्यालय की इमारत खड़ी करने में तकनीकी दिक्कत आने का अंदेशा

बरेली, अमृत विचार। वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार की पहल पर अफसर बरेली में प्रदेश का पहला वानिकी विश्वविद्यालय बनाने की कवायद में जुटे हैं लेकिन फिलहाल हर कदम पर रोड़े अटक रहे हैं। वानिकी विश्वविद्यालय के लिए मंझा ग्राम में जमीन चिह्नित की गई थी लेकिन अब आर्किटेक्ट्स की टीम के वन विभाग के अफसरों के साथ साथ सर्वे करने के बाद इसमें भी रोड़ा अटक गया है। यहां जमीन रेतीली है जिस पर कोई इमारत खड़ी होनी मुश्किल है। हालांकि सर्वे की रिपोर्ट अभी नहीं आई है मगर वन विभाग के अधिकारी ही अनाधिकारिक तौर पर जमीन को अनुपयुक्त बता रहे हैं।

मंझा में वानिकी विश्वविद्यालय के लिए चिह्नित जमीन का कुल क्षेत्रफल 183 हेक्टेयर है। इसमें करीब 70 हेक्टेयर जमीन को कुछ समय पहले कब्जा मुक्त कराया गया था जो ग्राम समाज की है। विश्वविद्यालय को मंजूरी मिलने के बाद जमीन के हस्तानांतरण की प्रक्रिया शुरू होनी थी लेकिन इससे पहले ही तकनीकी दिक्कतें सामने आने लगी हैं।

दरअसल वानिकी विश्वविद्यालय के लिए चिह्नित की गई 113 हेक्टेयर जमीन पूरी तरह रेतीली है। इसके अलावा इस जमीन का एक बड़ा हिस्सा संभावित बाढ़ क्षेत्र में भी आता है। इसके साथ काफी हिस्सा ऊबड़-खाबड़ है। लिहाजा इस जमीन पर वानिकी विश्वविद्यालय की इमारत बनाने में और ज्यादा दिक्कत आने का अंदेशा है।

सूत्रों के मुताबिक सर्वे करने आई आर्किटेक्ट्स की टीम इस पर सवाल खड़े कर चुकी है। हालांकि आधिकारिक तौर पर वन विभाग के अधिकारी इस तरह की दिक्कत होने से इन्कार कर रहे हैं। उनका कहना है कि सर्वे रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ तय होगा। फिलहाल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

विश्वविद्यालय बना तो छात्रों को मिलेगी करियर की नई राह
बरेली में अगर प्रदेश का पहला वानिकी विश्वविद्यालय बनता है तो यह जिले के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। वानिकी क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्र यहां वाइल्ड लाइफ और संपूर्ण वानिकी से संबंधित विषयों की शिक्षा हासिल कर सकेंगे। अधिकारियों के मुताबिक विश्वविद्यालय बनने के बाद वानिकी में स्नातक, परास्नातक डिग्री लेने के साथ छात्र शोध कार्य भी कर सकेंगे। यहां से निकलने वाले छात्रों के लिए फॉरेस्ट रेंजर, जू क्यूरेटर, फॉरेस्ट काउंसलर, फॉरेस्ट गार्ड जैसी नौकरियों के लिए अवसर होंगे। विश्वविद्यालय के एक बड़े हिस्से पर फील्ड एरिया होगा जहां शोध किया जा सकेगा।

रेतीली जमीन पर नहीं पनप सके ट्रांसलोकेट किए गए पेड़
मंझा में जमीन की हाल क्या है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता कि पिछले दिनों हजारों की संख्या में शहर की सड़कों से पेड़ों को हटाकर मंझा में ट्रांसलोकेट किया गया था लेकिन इनमें से अधिकतर पेड़ जीवित नहीं बचे। 60 प्रतिशत ट्रांसलोकेट पेड़ पनप ही नहीं पाए। इसकी वजह रेतीली जमीन को ही माना गया था जो पेड़ों की जड़ों को पकड़ नहीं पाई। पेड़ों के ट्रांसलोकेशन के दौरान अमृत विचार ने इस मुद्दे को उठाया था। इसके बाद मंझा में पेड़ों का ट्रांसलोकेशन बंद कर दिया गया।

अभी सिर्फ मंझा में वानिकी विश्वविद्यालय बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। आर्किटेक्ट्स की टीम ने भी सर्वे किया है, जिसकी रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ निर्णय लिया जा सकेगा--- समीर कुमार, प्रभागीय वनाधिकारी।

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