बरेली : अवैध कॉलोनियों में बनाईं सड़कें, किराए के स्कूलों का कराया कायाकल्प... यूं ही फूंक दिए शहर के हिस्से के करोड़ों रुपए
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम के अफसर पिछले सालों में जहां एक तरफ जायज कामों के लिए पैसा न होने का बहाना बनाते रहे, वहीं दूसरी तरफ नाजायज कामों पर खुले हाथों से करोड़ों फूंक डाले। कहीं किसी अवैध कॉलोनी में सड़क बनवाईं तो कहीं किराए की इमारतों में चल रहे स्कूलों का कायाकल्प करा डाला। एक निजी स्कूल को जाने वाली सड़क बनवाई तो रेलवे के इलाके में भी सड़क निर्माण करा डाला। इस बीच टैक्स भरने वाले शहरवासी छोटे-छोटे कामों के लिए पैसे न होने का बहाना सुनकर नगर निगम से मायूस होकर लौटते रहे।
नगर निगम के अफसरों ने पिछले साल कई अवैध कॉलोनियों में जमकर काम कराए। वार्ड नंबर 35 की एक अवैध कॉलोनी में करीब 50 लाख लागत के निर्माण कार्य करा दिए गए। इज्जतनगर में रोड नंबर सात रेलवे के अधिकार क्षेत्र में है, इसके पास बनी कॉलोनी भी अवैध है लेकिन फिर भी नगर निगम ने 2021 में यहां सड़क का निर्माण करा डाला। इसी तरह पीलीभीत बाईपास पर 2020 में स्प्रिंगडेल कॉलेज जाने वाली 300 मीटर की सड़क बनवाने पर लाखों फूंके गए। कुछ समय बाद इस पर पैचवर्क भी नगर निगम के खाते से करा दिया गया। हैरतअंगेज ढंग से बन्नूवाल नगर कॉ़लोनी में तो सवा करोड़ के कामों के टेंडर स्वीकृत कर दिए गए। तत्कालीन पार्षद सतीश कातिब ने अवैध कॉलोनी के लिए हुए इस टेंडर पर आपत्ति की, तब कहीं उसे निरस्त किया गया।
इसके अलावा किराए के भवनों में चल रहे कई स्कूलों का कायाकल्प कराने के लिए भी नगर निगम का खजाना जमकर खाली किया गया। दिलचस्प यह है कि ऐसे ज्यादातर नाजायज कामों के हाथोंहाथ भुगतान भी कर दिए गए। उधर, नगर निगम के अपने इलाकों में लोग नाली और सीसीरोड तक के लिए तरसते रहे। यहां तक कि स्ट्रीट लाइट जैसे मामूली कामों के लिए भी उन्हें ठेंगा दिखा दिया गया। दिलचस्प यह है कि पिछले साल वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार ने मुंशीनगर की सड़क पर बेतहाशा गड्ढे और सरदार जी कॉलोनी की हालत खराब देखकर वहां काम कराने को कहा तो साथ में मौजूद मुख्य अभियंता वीके सिंह ने दो टूक जवाब दिया था कि कॉलोनी अवैध है, इसलिए नगर निगम यहां सड़क का निर्माण नहीं करा सकता।
ठेकेदारों का दुखड़ा, दबाव डालकर करा लिए काम
अवैध कॉलोनियों और निजी स्कूलों के लिए लाखों के काम कराने के बाद नगर निगम के अफसरों ने कई का तो हाथ के हाथ भुगतान कर दिया लेकिन कई ठेकेदारों का भुगतान अब तक फंसा हुआ है। ये ठेकेदार अब तक भुगतान के लिए नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं। उनका कहना है कि अफसरों ने उन पर दबाव डालकर काम कराए थे लेकिन भुगतान का समय आया तो चुप्पी साध ली। अब तक वे तमाम चक्कर लगा चुके हैं लेकिन फिर भी भुगतान नहीं मिला है और न कोई यह बताने को तैयार है कि भुगतान कब मिलेगा। खेल यह भी हुआ कि मार्च 2021 की फाइल का भुगतान अब तक नहीं हुआ लेकिन फरवरी-मार्च 2023 की फाइल का भुगतान कर दिया गया ।
तत्कालीन मेयर और पार्षदों पर फोड़ा ठीकरा
मुख्य अभियंता बीके सिंह ने नगर निगम की ओर से करोड़ों के नाजायज काम करा देने के सवाल पर सफाई दी कि नगर निगम के अफसरों ने खुद अपनी तरफ से कुछ नहीं कराया। निगम में बोर्ड और कार्यकारिणी ही सर्वोपरि होती है। जैसा बोर्ड और कार्यकारिणी के लोगों ने कहा, वैसा ही किया गया। हालांकि इस सवाल पर कोई जवाब नहीं मिला कि नगर निगम बोर्ड या कार्यकारिणी में प्रस्ताव पारित हुए बगैर नाजायज काम सिर्फ मौखिक निर्देशों पर क्यों करा दिए गए।
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