VIDEO: CRPF के 84वें स्थापना दिवस पर अमित शाह बोले- लोकतंत्र तभी जीवित रह सकता है जब इसकी सुरक्षा समर्पित तरीके से की जाए

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

जगदलपुर (छत्तीसगढ़)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को उग्रवाद प्रभावित जगदलपुर में सीआरपीएफ के 84वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में भाग लिया। अमित शाह ने 84वें सीआरपीएफ दिवस के मौके पर जगदलपुर में ड्यूटी के दौरान शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों को श्रद्धांजलि दी।



इस मौके पर उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी जीवित रह सकता है जब इसकी सुरक्षा समर्पित तरीके से की जाए। देश के चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से अंजाम देने में बाकी सारे CAPF को साथ में रखते हुए CRPF का योगदान महत्वपूर्ण है। पिछले कई चुनावों से CRPF के जवानों ने हमारे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सुरक्षित रूप से निर्वहन करने की जिम्मेदारी निभाई है।

अमित शाह ने कहा, सीआरपीएफ ने चुनावों में लोकतंत्र की प्रक्रिया का सुरक्षित ढंग से निर्वहन करने में अपनी जिम्मेदारी निभाई है। मोदी जी की भाजपा सरकार ने जो विकास की गंगा बहाई है वो वामपंथी उग्रवाद क्षेत्र में भी बेरोक टोक पहुंच रही है । विकास के लिए स्वीकृत 70,000 किमी सड़क में से 11,000 किमी सड़कें बन चुकी है। बैंकों की 1,258 ब्रांच केवल 5 साल में खोली गई है। 1,348 एटीएम खोले गए हैं। एकलव्य स्कूल प्रायोरिटी एरिया को खोलने का कार्य बेरोक टोक चल रहा है । देश की आंतरिक शांति और सुरक्षा के लिए देश की सम्पूर्ण जनता का भरोसा इस बल पर है। 2343 मोबाइल टावर लग चुके है और उनको 4G में कन्वर्ट किया जा रहा है। 1 बटालियन से शुरू हुई सीआरपीएफ आज 246 बटालियन 4 जोनल मुख्यालय 21 सेक्टर मुख्यालय 2 परिचालन सेक्टर मुख्यालय, 17 परिचालन रेंज और 42 प्रशासनिक रेंज के सवा 3 लाख नफरी के साथ  देश का सबसे बड़ा सीएपीएफ है जिसका हम सभी को गौरव है। 

अमित शाह ने कहा,  नारीशक्ति थीम पर आयोजित महिला मोटरसाइकिल के फ्लैगइन के कार्यक्रम में 9 मार्च को 38 मोटरसाइकिल से दिल्ली से निकली 75 महिला जवान बटालियन 1838 कि.मी. की यात्रा कर यहां पहुंची नारीशक्ति को मैं नमन करता हूँ। वामपंथी और उग्रवादी फंडिंग के स्त्रोत को रोकने के लिए भी एनआईए और ईडी द्वारा अनेक प्रकार के केस दर्ज कर कठोर करवाई की जा रही है। सीआरपीएफ के जवानों ने अपने शौर्य और साहस का परिचय समग्र दुनिया के सामने देने का कार्य किया है। आज वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई विजय के अंतिम पड़ाव पर है। मैं देश के गृहमंत्री होने के नाते गर्व से कह रहा हूँ कि पहली बार सीआरपीएफ का स्थापना दिन वामपंथी उग्रवाद की समस्या के शुरुआत होने के बाद हम छत्तीसगढ़ के बस्तर में मना रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि 2010 की तुलना में देश में वामपंथी उग्रवादी हिंसा की घटनाओं में 76 फीसदी की कमी आई है और साथ ही जान हानि (आम लोग और सुरक्षा कर्मी) में भी 78 फीसदी की कमी आई है। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों एजेंसियां वामपंथी उग्रवाद का वित्त पोषण रोकने के लिए सख्ती से काम कर रही हैं। शाह ने कहा कि सीआरपीएफ का वार्षिक उत्सव पहली बार वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है और यह भी छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में। 

बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित सीआरपीएफ कोबरा की 201वीं बटालियन के करनपुर शिविर में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। पिछले तीन दशकों से वामपंथी उग्रवाद से संघर्ष कर रहे बस्तर संभाग में कुल सात जिले शामिल हैं जिनमें बस्तर, कांकेर, कोंडागांव, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और बीजापुर हैं। सीआरपीएफ के जवानों को बड़ी संख्या में दक्षिण बस्तर क्षेत्र में तैनात किया गया है, जिसमें सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले शामिल हैं। यहां सीआरपीएफ के नेतृत्व में सुरक्षा कर्मियों ने कई बड़े माओवादी हमलों में जवाबी कार्रवाई की है। 

ये भी पढ़ें : 'लोकतंत्र की हत्या करना चाहती है भाजपा', राहुल गांधी की सदस्यता रद्द करने पर बोले CM बघेल

संबंधित समाचार