दलितों को जोड़ने निकले चाचा शिवपाल और भतीजा अखिलेश, शुरुआत कानपुर से, 28 को लाजपत भवन में कार्यक्रम होगा आयोजित
कानपुर में खटिक समाज के सम्मेलन में 28 को अखिलेश व शिवपाल आएंगे। लाजपत भवन में राष्ट्रवादी खटिक समिति का रजतजयंती समारोह।
कानपुर, [महेश शर्मा]। नगरीय निकाय चुनाव और 2024 में लोकसभा चुनाव में पार्टी को मजबूती देने के लिए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दलित वोटों को जोड़ने की राजनीतिक मुहिम कानपुर से शुरू कर दी हैं। वह चाचा शिवपाल यादव के साथ 28 मार्च को कानपुर के लाजपत भवन में राष्ट्रवादी खटिक समिति के रजत जयंती समारोह में शामिल होंगे। खबर है कि दोनों सपा नेता जातीय सम्मेलनों में शामिल होंगे।
पिछले विधानसभा चुनाव से बहुजन समाज पार्टी का दलित वोट धीरे-धीरे खिसक रहा है। भाजपा, सपा और कांग्रेस दलित वोटों पर डोरे डालने में जुट गयी है। कांग्रेस ने बसपा से आए पूर्व सांसद ब्रजलाल खाबरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर सीधा संकेत दे दिया है कि उसकी नजर दलित वोटों पर है। जालौन में पूर्व कोआर्डिनेटर कमल दोहरे को खाबरी कांग्रेस में ज्वाइन कराने वाले हैं। भाजपा भी दलित कार्ड चल चुकी है। सपा की कोशिश है कि इस वोट को पार्टी की ओर लाने के लिए कोई कद्दावर नेता उनके साथ जुड़े तो बात भी सकत है।
राष्ट्रवादी खटिक समाज समिति सम्मेलन सम्मेलन के संयोजक पूर्व डीजीपी एसएन चक से सपा नेताओं की नजदीकियों से राजनीतिक संकेत मिलते हैं कि चक सपा का दलित चेहरा हो सकते हैं। वह भी इसी बिरादरी से आते हैं। कानपुर में भी खटिक वोट बहुतायत में है जो पहले कांग्रेस व अब भाजपा के साथ बताया जाता है। बसपा ने अनुभव चक को एक बार कानपुर संसदीय क्षेत्र से टिकट दिया था पर वह हार गए थे लेकिन उन्हें बिरादरी का खासा वोट मिला था। एसएन चक रिश्ते में उनके चाचा हैं। एसएन चक देश शक्ति राजनीतिक पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं। कालांतर में पार्टी का सपा से गठजोड़ भी कर सकती है।
एसएन चक का कहना है कि देश के संविधान खतरे हैं। जातीय अस्तित्व बनाए रखने और संविधान को बचाने वाली राजनीतिक ताकत सपा है। समाज यदि इसे ताकत देता है तो इसमें कोई गुरेज नहीं होना चाहिए। चक का कहना है कि सामाजिक और देशहित उनके लिए सर्वोपरि है। सम्मेलन में अखिलेश और शिवपाल यादव को बुलाने के पीछे वैचारिक धरातल पर समन्वय एक कारण है।
