Kanpur : चिड़ियाघर तीन बाघों की सजा माफ नहीं कर पा रहा, नया बाड़ा बनने के बावजूद नहीं किया गया शिफ्ट

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कानपुर का चिड़ियाघर तीन बाघों की सजा माफ नहीं कर पा रहा।

कानपुर का चिड़ियाघर तीन बाघों की सजा माफ नहीं कर पा रहा। नया बाड़ा बनने के बावजूद शिफ्ट नहीं किया गया। अस्पताल के पिंजड़े में सजा काट रहे हैं। पिछले साल सितंबर में बाड़ा बन गया था।

कानपुर, [मनीष तिवारी]। सजा सिर्फ इंसानों को नहीं जानवरों को भी भुगतनी पड़ती हैं। चिड़ियाघर का कानून दो बाघिन और एक बाघ की सजा माफ नहीं कर पा रहा है। उन्हें अस्पताल की जेल से आजाद ही नहीं किया जा रहा है। ये हालात तब है जब छह महीने पहले बाघों के लिए नया घर बनकर तैयार हो गया। इसके बावजूद चिड़ियाघर प्रशासन कोई फैसला नहीं ले पा रहा है। 
 
राष्ट्रीय पशु बाघ के संरक्षण को लेकर अक्सर सरकार अपनी चिंता जाहिर करती है। वर्ष 2011 की 28 मार्च को नई गणना में जो बाघों के आंकड़े सामने आए थे, उसने इन पशुओं को लेकर काफी चिंता दूर कर दी थी। उस समय जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार बाघों की संख्या 1706 हो गई थी, जो कि वर्ष 2006 के आंकड़ों (1411 संख्या) के मुकाबले काफी अधिक थे। हालांकि वर्तमान में वर्ष 2018 में सर्वेक्षण के दौरान बाघों की अनुमानित संख्या 2967 बताई जाती है।
 
बाघों के संरक्षण को लेकर केंद्र सरकार की ओर से विशेष गंभीरता नजर आने के बावजूद प्रदेश के सबसे बड़े चिड़ियाघर में बाघों का नया बाड़ा बनने के बाद भी बाघिन पुष्पा, लुना, मल्लू (बाघ व बाघिन) को अब भी पिंजड़े में सजा काटनी पड़ रही है। चिड़ियाघर के उप निदेशक डॉ. अनुराग सिंह ने बताया कि जल्द ही नए बाड़े का भेजने की तैयार है। 
 

जानें क्या है बाड़े की खासियत

- 1145 वर्ग मीटर में बना है
- 4 पिंजड़े हैं इस बाड़े में
- 1.80 मीटर चौड़ाई है पिंजड़ों की
- 2.5 मीटर ऊंचाई है इनकी
- 25 लाख रुपये की लागत में बना
 
केस:1
उम्र 5 वर्ष और नाम है पुष्पा 
- उम्र है पांच वर्ष और नाम है पुष्पा। पशु चिकित्सक डॉ. नितेश कटिया बताते हैं कि अक्टूबर महीने में इस बाघिन को लायन सफारी इटावा से लाया गया था। वहां वह दो सौ से ज्यादा दिन तक रही थी। इससे पहले वह एटा के जंगल में वन विभाग की टीम को मिली थी, किसी हमले में उसका कैनाइल दांत टूट गया था। यह बाघिन बेहद आक्रामक स्वभाव की है। फिलहाल उसे अस्पताल के पिंजड़े में ही रखा गया है।
 
केस:2
तीन साल से कैद है मल्लू
- पीलीभीत के जंगल से सात लोगों को निवाला बनाने के जुर्म में कैद हुए मल्लू को कानपुर चिड़ियाघर की छोटी जेल में करीब तीन साल हो गए हैं। वर्ष 2020 में उसे पीलीभीत टाइगर रिजर्व से लाया गया था। उसके साथ मालती भी है, जिस पर एक के कत्ल का इल्जाम है। हालांकि उसकी सजा पूरी होने के बाद उसे दूसरे बाड़े में बाघों के साथ शिफ्ट कर दिया गया।
 
केस:3
मां से बिछड़ी नन्ही शावक लुना 
- मां बिछड़ी नन्ही शावक चिड़ियाघर के पिंजड़े में पिछले तीन महीने से सजा काट रही है। अस्पताल प्रशासन ने उसका ख्याल रखते हुए उसे स्वस्थ तो कर लिया है, लेकिन अभी बड़े बाघों के बीच उसे नहीं रखा गया है। पूर्णिमा के दिन दिसंबर में इसे चिड़ियाघर लाया गया था, जिस वजह से इसका नाम लुना रखा गया। यह बाघिन पीलीभीत के पूरनपुर क्षेत्र में खारजा नहर की झाड़ियों में मिली थी और मां से बिछड़ने और खाना नहीं मिलने की वजह से उस वक्त बेहद कमजोर डरी हुई थी। 
 

बेहद दिलचस्प हैं बाड़े में रह रहे बाघ- बाघिन

 
-बघीरा : इस बाघ की बाड़े में बादशाहत चलती है। उसके तेवर और अनुशासन को बाकी बाघ भी स्वीकार करते हैं।
-मालती : पीलीभीत के टाइगर रिजर्व जंगल से लाई गई मालती ने दो लोगों का कत्ल किया था, लेकिन उन्हें खाया नहीं था।
-प्रशांत : बेहद शांत स्वभाव का दिखने वाला यह बाघ अक्सर अपने साथी बाघों के बीच चुपचाप नजर आता है।
-बादल : अपनी दहाड़ से दर्शकों को अपनी ओर खींच लेने वाला यह बाघ सबसे ज्यादा और तेज दहाड़ की वजह से रोमांचकारी रहता है।
-त्रुषा : यह बाघि बेहद प्यारी है। इसका ख्याल रखने वाला कीपर भी अक्सर जाल की दूसरी ओर से इशारों में बात भी करता है।
-सावित्री : यह बाघिन बाड़े में अपने साथी बाघ व बाघिनों के साथ खेलती है। कीपर उसके स्वभाव को बेहद गंभीर व साथियों से मिलनसार बताते हैं।
-लव : सफेद बाघ लव बेहद शांत स्वभाव का बताया जाता है। अब उसे तिरुपति चिड़ियाघर भेजा जा रहा है।
 
(नोट: बाघ और बाघिन के इन स्वभाव की जानकारी चिड़ियाघर प्रशासन की ओर से दी गई है।)

 

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