अयोध्या: शहर में चारों तरफ ई-रिक्शों का बोलबाला, बीच सड़क रोक देते हैं चालक, हादसों को दे रहे न्यौता
अयोध्या, अमृत विचार। शहर में चारों तरफ ई-रिक्शा चालकों का ही बोलबाला है। ये आगे देखते हैं न पीछे। जहां मन कहा, वहीं बीच सड़क रोककर सवारी भरने लगते हैं। यही कारण है कि शहर के तमाम इलाकों में ये मिनटों में घंटे भर का जाम लगा देते हैं। कुछ बोल दो तो रिक्शे से उतरकर गुस्से में हाथों की आस्तीन चढ़ाते लगते हैं। वैसे तो सरकारी रिकॉर्ड में इनकी संख्या मात्र 5200 ही है, लेकिन सड़कों पर इनकी बाढ़ आ चुकी है।
अमूमन सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनने वाले ई-रिक्शा परिवहन विभाग और पावर कार्पोरेशन को भी चूना लगा रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी देखकर भी इन सभी मसलों को अनदेखा कर रहे हैं। इस वक्त हाल यह है कि ई रिक्शा चालकों के लिए यातायात विभाग की ओर से जिन जगहों पर प्रतिबंध लगाया गया है उन स्थानों पर भी ई-रिक्शा वाले दिखाई पड़ते हैं।
व्यापारी बताते हैं कि जाम की समस्या आयेगी ही। न कोई पार्किंग स्थल हैं और न ही कोई यातायात की व्यवस्था है। अब ई-रिक्शा की बढ़ रही संख्या और नियमों को ना मानना आमजन के ऊपर भारी पड़ रहा है। कोरोना त्रासदी के बाद से देश भर में बेरोजगारों की फौज खड़ी हो गई। कुछ ने तो अपना बिजनेस डाल दिया कुछ ने गाड़ियां चलानी शुरू कर दी।
नाम न छापने की शर्त पर एक ई-रिक्शा वाले ने बताया कि वह 2019 तक चौक स्थित एक दुकान में आठ हजार पर काम करता था, लेकिन कोरोना त्रासदी के बाद उसे हटा दिया गया। इसके बाद उसने लोन पर ई-रिक्शा लिया और चलाना शुरू कर दिया।
नाबालिगों ने भी थाम लिया है ई-रिक्शा
सड़क पर चल रहे ई-रिक्शे का संचालन अधिकतर नौजवान ही कर रहे हैं। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि अमूमन ई-रिक्शा नाबालिग ही दौड़ा रहे हैं। बेहूदे गीत बजाते हुए ये सड़कों पर फर्राटा भरते हैं। कुछ माह पहले रिक्शों पर लगी रेट लिस्ट भी गायब हो चुकी हैं। मनचाहा किराया वसूलने वाले ई-रिक्शा संचालक अब मनमर्जी कर रहे हैं।
2100 ई-रिक्शे पर 1.17 करोड़ है बकाया
एआरटीओ प्रशासन आरपी सिंह ने बताया कि 5200 से भी अधिक ई-रिक्शा विभाग में रजिस्टर्ड हैं। 2100 से अधिक संचालकों ने विभाग में टैक्स नहीं जमा कराया है। तकरीबन 1.17 करोड़ रुपये टैक्स बकाया है। इसे वसूलने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। साथ में नोटिसें भी भेजी जा रही हैं। ई-रिक्शा को एलएमवी लाइसेंस धारक भी चला सकता है।
जतना है त्रस्त, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं
लक्ष्मणपुरी अमानीगंज निवासी रिचा अग्रवाल का कहना है कि ई-रिक्शा और जाम की समस्या से चौक एरिया में चलना दूभर हो गया है। जब भी आप किसी तरफ निकलेंगे तुरंत जाम में फंस जाते हैं।
नाका पर रहने वाली विजयलक्ष्मी सिंह कहती हैं कि शहर में यातायात व्यवस्था चौपट है। जिस तरफ भी निकलेंगे ई-रिक्शा ही नजर आते हैं। बच्चों को भी स्कूल व कोचिंग जाने में आए दिन समस्याएं बनी रहती है।
रजत पांडेय ने कहा कि ई रिक्शा की वजह से शहर में निकलना मुश्किल हो जाता है कभी-कभी तो कोचिंग में पहुंचने में 10 से 15 मिनट लेट भी हो जाता है। जाम की समस्या से शहरवासियों को निजात मिले इसके लिए उचित प्रबंध किए जाने चाहिए।
डॉ सत्य प्रकाश मिश्रा का कहना है कि ई-रिक्शा की वजह से लगने वाले जाम की वजह से फोर व्हीलर लेकर शहर में एंट्री करने का मन नहीं करता,यदि आप भूल से भी रिकाबगंज चौक की तरफ चले गए तो घंटों वापसी में लग जाता है।
प्रेम कुमारी का कहना है कि जब भी आप किचन के सामान को लेने के लिए शहर में प्रवेश करते हैं। जाम की विकट समस्या देखने को मिलती है और घंटों समय बर्बाद होता है। जिससे रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित होती है।
सीमा रानी का कहना है कि ई-रिक्शा कम होने से जहां शुरू में लाभ दिखाई पड़ रहा था वही ई रिक्शा की संख्या में लगातार बढ़ोतरी ने विकट समस्या बना दी। अब हर तरफ निकलने के बाद घंटो जाम में फंसे रहते है।
फिटनेस व रोड टैक्स समेत तमाम कारणों को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 100 से भी अधिक ई-रिक्शा को सीज किया जा चुका है। साथ ही नाबालिग चालकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। आगे भी अभियान चलता रहेगा... प्रवीण कुमार सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन।
ई-रिक्शा हमारे अधिकारी क्षेत्र के बाहर है। उनका कोई रूट निर्धारित नहीं है। उनका न तो कोई लाइसेंस बनता है और न ही परमिट होती है। हम कुछ नहीं कर सकते। मेले के दौरान डायवर्जन को लेकर इनकी मीटिंग बुलाई जाती है... प्रमोद यादव, सीओ ट्रैफिक।
यह भी पढ़ें:-मिर्जापुर: भारतीय मानक भूमध्य रेखा ‘सेल्फी प्वाइंट’ बना लोगों के आकर्षण का केंद्र
