बरेली: अफसरों का क्या कहना... कागजों पर तो जहां कहो वहां बना दें चिड़ियाघर

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Edited By Amrit Vichar
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सीबीगंज के औद्योगिक इलाके के नजदीक चिड़ियाघर बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा, जू अथॉरिटी से अनुमति मिलना माना जा रहा है मुश्किल

खलीलपुर वन ब्लॉक स्थित चिड़ियागर के लिये चिन्हित जमीन(फोटो)

बरेली, अमृत विचार। मंत्री को अफसर न कह दें, यह मुमकिन नहीं है। मंत्री की इच्छा पूरी करने के लिए कुछ करते नजर न आएं, यह भी अफसरशाही के तौर-तरीकों के खिलाफ है। इसी वजह से वन मंत्री का जिले में चिड़ियाघर बनाने का सपना मुश्किल होते हुए भी मुश्किल नजर नहीं आ रहा है।

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शासन को एक के बाद एक प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। अब सीबीगंज औद्योगिक क्षेत्र के नजदीकी जंगल में चिड़ियाघर बनाने का प्रस्ताव भेज दिया गया है, हालांकि अनाधिकारिक तौर पर खुद अफसरों का मानना है कि जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मानकों के हिसाब से यहां चिड़ियाघर बन ही नहीं सकता।

वन मंत्री की पहल के बाद विभाग के अधिकारी बरेली में चिड़ियाघर बनाने के लिए काफी समय से उपयुक्त जगह की तलाश में जुटे हुए हैं। फिलहाल सीबीगंज के खलीलपुर ब्लॉक के वन क्षेत्र का चयन चिड़ियाघर बनाने के लिए किया गया है।

वन विभाग के रिसर्च विंग की यह जमीन करीब 60.14 हेक्टेयर में फैली हुई है। वन विभाग के अधिकारियों की ओर से इस जमीन की उपयुक्तता का आधार यह माना गया है कि यह शहर से सटा हुआ इलाका है। इस वन क्षेत्र से एयरपोर्ट की दूरी आठ किलोमीटर और रेलवे स्टेशन की सात किलोमीटर है। इसका प्रस्ताव अधिकारियों ने तैयार करके आगे बढ़ा दिया है।

हालांकि अफसर भी जानते हैं कि यह जमीन औद्योगिक इलाके में होने के कारण यहां चिड़ियाघर बनना मुमकिन नहीं है। इस पर खुलकर कुछ नहीं कहा जा रहा है लेकिन अफसर अनाधिकारिक तौर पर इसे स्वीकार करने में कोई हिचक भी नहीं दिखा रहे हैं।

दरअसल, कैंफर फैक्ट्री का एक बड़ा हिस्सा इस जमीन से सटा हुआ है। इसी कारण माना जा रहा है कि इस जगह चिड़ियाघर बनाने की जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया से अनुमति मिलना संभव नहीं है। वन संरक्षक विजय सिंह कहतै हैं कि पिछले दिनों आर्किटेक्ट्स की एक टीम सर्वे के लिए यहां आई थी जो अपनी सर्वे रिपोर्ट शासन को भेजेगी। वन विभाग की तरफ से भी चिड़ियाघर बनाने के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया है।

जंतु विशेषज्ञ कहते हैं, ऐसी जगह वन्य, प्राणियों का रह पाना मुमकिन नहीं
बरेली कॉलेज में जंतु विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र सिंह का कहना है कि फैक्ट्रियों के नजदीक चिड़ियाघर बनाने से जीव-जंतुओं को नुकसान होगा। पेड़-पौधों तक ऐसे वातावरण का काफी असर पड़ता है।

औद्योगिक इलाके के करीब होने से हवा में प्रदूषण रहना स्वाभाविक है जिसकी वजह से वन्य प्राणियों को सांस संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। इससे जानवरों के अंदर कई तरह के प्राकृतिक बदलाव आ जाते हैं। अगर वायु प्रदूषण के साथ ध्वनि प्रदूषण भी है तो और ज्यादा दिक्कत पैदा होगी। ध्वनि से छोटे वन्य जीवों सबसे ज्यादा परेशानी होती है।

सीबीगंज में चिड़ियाघर का बनाने का प्रस्ताव है लिहाजा प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। अब जो भी फैसला लिया जाना है, वह शासन स्तर से ही लिया जाएगा। शासन से निर्देश मिलने के बाद आगे कदम बढ़ाएंगे---ललित कुमार वर्मा, मुख्य वन संरक्षक।

मुश्किल: वन विभाग के पास और कोई जमीन भी नहीं
वन विभाग के सामने मुश्किल यह है कि उसके पास कोई दूसरी भी ऐसी जमीन नहीं है जहां चिड़ियाघर विकसित किया जा सके। ऐसे में वन मंत्री का अपने गृहजनपद में चिड़ियाघर बनाने का सपना पूरा होना फिलहाल संभव होता नजर नहीं आ रहा है।

बता दें कि वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार की पहल पर बरेली में प्रदेश का पहला वानिकी विश्वविद्यालय बनाने की भी कवायद चल रही है। इसके लिए पिछले दिनों मंझा ग्राम में जमीन चिह्नित की गई थी लेकिन आर्किटेक्ट्स की टीम के सर्वे में पता चला कि यह जमीन रेतीली है जिस पर कोई इमारत खड़ी होनी मुश्किल है।

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