तनावपूर्ण और अव्यवस्थित जीवन शैली से दांत होते हैं खराब : प्रो. पूरन चंद
लखनऊ, अमृत विचार। पान, सुपारी, गुटका खाने, तनावपूर्ण और अव्यवस्थित जीवन शैली से प्राकृतिक दाँत जल्दी घिस कर अत्यंत छोटे हो जाते हैं, जिसके चलते भोजन करने में तकलीफ़ होती है। साथ ही बोलने एवं देखने में भी खराब लागता है। इससे चेहरे की सुंदरता पर भी असर पड़ता है। यह जानकारी शुक्रवार को केजीएमयू के प्रस्थोंडांटिक्स विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. पूरन चंद ने भारतीय प्रोस्थोडॉन्टिक सोसायटी सम्मेलन में प्री-कॉन्फ्रेंस कोर्स के दौरान कही।
दरअसल, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में तीन दिवसीय कार्यक्रम (कॉन्फ्रेंस) का अयोजन किया गया है। जिसमें आंख,कान,दांत और नाक के कृत्रिम निर्माण की नई तकनीक की जानकारी साझा करने के लिए विशेषज्ञ पहुंचें हैं। जिसकी शुरूआत शुक्रवार से हुई है। इस दौरान एम्स नयी दिल्ली के प्रोस्थोडाँटिक्स विभाग की हेड डॉ. वीना जैन ने बताया कि ऐसे खराब हुए दांतों को फुलमाउथ रीहैब्लीटेसन की नयी तकनीक द्वारा ठीक किया जा सकता है।
महीडोल विश्व विश्वविद्यालय, बैंकाक के चिकित्सकों की टीम ने दुर्घटना अथवा कैंसर से आँख निकल जाने वाले मरीजों के लिए कृत्रिम आंख बनाने की विभिन्न तकनीक पर जानकारी साझा की। वहीं कृत्रिम आंख निमार्ण के लिए प्रशिक्षित करने में प्रो. बालेन्द्र, प्रो. रघुबर, प्रो. सुनीत जुरेल , डा नीति सोलंकी ने लाइव डिमांस्ट्रेशन दिया । डॉ. स्वाति गुप्ता ने खराब दिखने वाले दांतों को सुंदर बनाने में डीजीटल तकनीकी के प्रयोग से कम समय में आकर्षक बनाने के प्रक्रिया से प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया । प्रोस्थोडांटिक्स विभाग के डॉ. सौमेंद्र विक्रम सिंह, डॉ. नीरज मिश्र ,डॉ. कमलेश्वर सिंह , डॉ. शुचि, डॉ. दीक्षा आर्या, डॉ. भास्कर अग्रवाल , डॉ. कौशल अग्रवाल , डॉ. लक्ष्य कुमार, डॉ. मयंक ने कॉन्फ़्रेंस को सफल बनाने में सक्रिय योगदान दिया है।
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