प्रयागराज : बरेली कॉलेज की वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सरकार से जवाब तलब

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली महाविद्यालय में हुई वित्तीय गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। उक्त आदेश न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने बरेली कॉलेज प्रबंधन समिति व अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। दरअसल याचियों पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए विशेष सचिव, उच्च शिक्षा, अनुभाग-2, उत्तर प्रदेश, लखनऊ ने उनके कामकाज पर रोक लगाते हुए जिलाधिकारी, बरेली को उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा 58 के तहत अधिकृत नियंत्रक नियुक्त कर दिया है।

याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि याचियों का प्रबंधन बरेली कॉलेज, बरेली का विधिवत निर्वाचित प्रबंधन है, जो एमजेपी, रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली से संबंध विधिवत मान्यता प्राप्त डिग्री कॉलेज है। राज्य विश्वविद्यालय के प्रावधान संस्थान पर लागू हैं। संस्थान बरेली के नियंत्रण बोर्ड नामक एक सोसाइटी द्वारा संचालित है। अधिवक्ता ने आगे बताया कि वित्तीय गड़बड़ी से संबंधित याचियों के प्रबंधन के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच के परिणामस्वरुप आक्षेपित आदेश पारित किया गया है। इसके अलावा राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा 57, 58 के तहत जिलाधिकारी, बरेली द्वारा याचियों के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए संस्तुति की गई है। याचियों को धारा 57 के तहत 'कारण बताओ' नोटिस जारी की गई थी, जिसके सापेक्ष याचियों ने अपने जवाब में यह कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए वित्तीय गबन के सभी आरोपों में जांच चल रही है, लेकिन चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है।

 चार्जशीट दाखिल होने के बाद वे एक विस्तृत जवाब कोर्ट में प्रस्तुत करेंगे। याची के अधिवक्ता का कहना है कि याचियों के जवाब पर विचार किए बिना उनके खिलाफ कार्यवाही कर दी गई। निदेशक, उच्च शिक्षा द्वारा पारित आदेश पूरी तरह एकपक्षीय है और इसकी प्रति याचियों को कभी भी प्रदान नहीं की गई है। दूसरी तरफ अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याचियों को उचित अवसर देने और उनके उत्तर पर विचार करने के बाद ही आदेश पारित किया गया है। यह कहना गलत होगा कि याचियों के जवाब पर विचार किए बिना किसी स्वतंत्र निष्कर्ष को रिकॉर्ड पर लिए हुए केवल उच्च शिक्षा, निदेशक की रिपोर्ट के आधार पर आदेश पारित किया गया है। इसके अलावा याचियों की प्रबंधन समिति को यूपी राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा 2 (13) के तहत मान्यता भी प्राप्त नहीं है। मामले की अगली सुनवाई आगामी 10 मई को सुनिश्चित की गई है।

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